सरकारी स्कूल का बुरा हाल…शिक्षिका नहीं पढ़ सकी छोटे बच्चों की अंग्रेजी बुक-Video

August 4, 2026 by No Comments

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Unnao Viral Video: सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है जिसमें साफ दिख रहा है कि एक शिक्षिका कक्षा एक या दो के बच्चे की अंग्रेजी की बुक भी नहीं पढ़ पा रही हैं. हालांकि ये वीडयो पुराना है जो कि आरक्षण के खिलाफ उठी ताजा आवाज की वजह से सोशल मीडिया पर एक बार फिर से वायरल किया जा रहा है और सवाल खड़ा किया गया है कि क्या इस तरह के शिक्षक बच्चों को वो शिक्षा दे सकेंगे जिससे बच्चे आगे चलकर अच्छा करियर बना सकें?

तो क्या जरूरी है कि आरक्षण देकर पूरी शिक्षा व्यवस्था को चौपट किया जाए? सवाल ये भी खड़ा किया जा रहा है कि जो जिस काबिल है, उसे उसके हिसाब से रोजगार क्यों नहीं दिया जा रहा है? आखिर क्यों अशिक्षित को शिक्षक बनाकर सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले गरीब व शोषित बच्चों का और बुरा किया जा रहा है?

ये वीडियो Reform India Movement (@ReformMov_India) द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स (ट्विटर) पर दो अगस्त 2026 को शेयर किया गया है जबकि ये खबर 29 नवम्बर 2019 की है.सोशल मीडिया पर ये वीडियो शेयर करते हुए @ReformMov_India ने लिखा है, कि यूपी के उन्नाव से है, सिकंदरपुर सरौसी के एक सरकारी स्कूल के निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी देवेंद्र कुमार पांडेय ने अंग्रेज़ी की शिक्षिका से किताब से कुछ पंक्तियाँ पढ़ने को कहा लेकिन शिक्षिका अंग्रेज़ी की कुछ पंक्तियाँ भी नहीं पढ़ सकीं.

इसी के साथ ही पोस्ट में सवाल खड़ा करते हुए आगे कहा गया है कि भारत की आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को अंधकार में झोंकने के लिए आरक्षण का यह जाल बिछाया गया है। इसका विरोध होना चाहिए।

जानें क्या है पूरा मामला?

बता दें कि साल 2019 के 29 नवम्बर को जिलाधिकारी देवेंद्र कुमार पांडेय उन्नाव के जूनियर हाईस्कूल चौरा (Junior High School Chaura) में औचक निरीक्षण करने पहुंचे थे. बीएसए प्रदीप कुमार पांडे की मौजूदगी में जिलाधिकारी ने निरीक्षण किया था. इस दौरान बच्चों से संवाद करने के साथ ही उन्होंने कक्षा 8 के बच्चों से इंग्लिश की बुक पढ़ने को कहा लेकिन बच्चे बुक नहीं पढ़ सके. इस पर शिक्षिका से बुक पढ़ने को कहा तो वह भी इंग्लिश की किताब ठीक से नहीं पढ़ सकीं.

वायरल वीडियो में साफ दिख रहा है कि ये देखते हुए डीएम आग बबूला हो गए और शिक्षिका को तुरंत निलंबित करने का आदेश दिया. तो वहीं शिक्षिका ने चश्मा न होने का बहाना बनाया था.

हालांकि इस पूरे मामले ने एक सवाल तो खड़ा ही किया है कि जो इतने सालों से सरकारी स्कूल में बच्चे पढ़ाए जा रहे हैं वो किस तरह के शिक्षकों द्वारा पढ़ाए जा रहे हैं? शायद यही वजह है कि सरकारी स्कूलों के बच्चे किसी अच्छे ओहदे पर नहीं पहुंच पाते.

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