Vinay Pathak Corruption Case: इसी हफ्ते कानपुर विश्वविद्यालय पहुंच सकती है STF टीम, कलेक्ट करेगी दस्तावेज
लखनऊ/कानपुर। इसी हफ्ते छत्रपति शाहू जी महाराज वश्वविद्यालय कानपुर (कानपुर विश्वविद्यालय- CSJMU) के कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक के खिलाफ जांच को लेकर STF टीम पहुंच सकती है। मालूम हो कि प्रो. पाठक के खिलाफ दर्ज मुकदमे को लेकर एसटीएफ पूरे मामले की जांच कर रही है।
मीडिया सूत्रों के मुताबिक एसटीएफ विश्वविद्यालय में प्रो. पाठक के कार्यकाल में अजय मिश्रा को दिए गए कार्यों व भुगतान के दस्तावेज जुटाने के लिए इसी हफ्ते पहुंच सकती है। फिलहाल तमाम दस्तावेज एसटीएफ पहले भी मंगवा चुकी है। बताया जा रहा है कि एसटीएफ परीक्षा सम्बंधी कार्य कर रही अजय मिश्रा की कम्पनी के कर्मचारियों से भी पूछताछ कर सकती है।

मीडिया सूत्रों के मुताबिक एसटीएफ के एक अधिकारी ने जानकारी दी कि टीम के दो सदस्यों को भेजकर कुछ दस्तावेज पहले ही मंगवा लिए गए थे। इनकी जांच की जा रही है। हालांकि जल्द ही टीम कानपुर विश्वविद्यालय में अजय मिश्रा के कार्यों व अब तक हुए भुगतान की जांच करेगी। इसी के साथ रिपोर्ट दर्ज कराने वाली कम्पनी डेविड के आरोपों के आधार पर कुछ अन्य लोगों से पूछताछ भी की जाएगी।
जानें क्या है 2019 का मामला, हर जगह अजय मिश्रा व उसके सहयोगियों को ही दिया गया काम
मीडिया सूत्रों के मुताबिक अजय मिश्रा की कम्पनी 2019 से कानपुर विश्वविद्यालय का परीक्षा सम्बंधी कार्य देख रही है। बताया जा रहा है कि इस बार उत्तर पुस्तिकाओं की डिजिटल मूल्यांकन कार्य भी अजय व उसके सहयोगियों ने ही कराया था। इसके लिए कानपुर नगर में 6 व कानपुर मंडल के अन्य जिलों को मिलाकर कुल 14 मूल्यांकन केंद्र बनाए गए थे। इन सभी में कम्प्यूटर सिस्टम लगवाने से लेकर सारे कार्य में अजय के सहयोगी भी जुटे रहे। नतीजतन रिजल्ट में तमाम गड़बड़ियां भी सामने आई और स्पेट मार्किंग न होने के साथ ही सैकड़ों विद्यार्थियों को फेल करने का भी आरोप लगा। हालाकि विद्यार्थियों द्वारा विरोध प्रदर्शन करने के बाद कई विद्यार्थियों के रिजल्ट में सुधार भी किया गया।
जानें दर्ज रिपोर्ट में क्या लगाए गए हैं आरोप
मालूम हो कि गत 29 अक्टूबर को डेविड मारियो डेनिस ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी। रिपोर्ट के मुताबिक आगरा विश्वविद्यालय का कुलपति रहने के दौरान प्रो. पाठक व एक अन्य अभियुक्त ने उसकी कम्पनी द्वारा किए गए कार्यों के भुगतान के लिए उससे 15 प्रतिशत कमीशन वसूला था। उससे कुल एक करोड़ 41 लाख रुपये की जबरिया वसूली की गई है। एफआईआर में अभियुक्तों से अपनी जान को खतरा भी बताया है। बता दें कि प्रो. विनय पाठक ने अपने खिलाफ दर्ज इसी एफआईआर को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में याचिका दाखिल की थी, जिसमें उन्होंने उनके खिलाफ थाना इंदिरा नगर में दर्ज एफआईआर को रद् करने की मांग की थी। साथ ही गिरफ़्तारी पर तत्काल रोक लगाने की गुजारिश भी याचिका में की गई है। मामले पर फैसला 15 नवम्बर को आएगा।