World Heart Day: देर रात तक मोबाइल-लैपटॉप का इस्तेमाल… नाइट शिफ्ट…हृदय रोग को दे सकता है बढ़ावा

September 29, 2026 by No Comments

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World Heart Day: विश्व हृदय दिवस के मौके पर आरोग्य भारती महिला कार्य (अवध प्रांत) एवं टीआरसी पीजी कॉलेज एण्ड डिपार्टमेंट ऑफ फार्मेसी बाराबंकी के संयुक्त तत्वावधान में स्वास्थ्य संबंधी परिचर्चा का आयोजन ऑनलाइन माध्यम से किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. रजनी द्वारा प्रस्तुत भगवान धनवंतरी स्तवन के साथ हुई।

इस मौके पर मुख्य वक्ता हिम्स सीतापुर के हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. रश्मि कांत मिश्रा ने कहा कि हृदय हमारे जीवन का मूल आधार है। उन्होंने हृदय को स्वस्थ रखने में शरीर की आंतरिक जैविक घड़ी यानी ‘सर्कैडियन रिदम’ की भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला।

डॉ. मिश्रा ने बताया कि यह 24 घंटे का प्राकृतिक चक्र सूरज की रोशनी और अंधेरे के अनुसार हार्मोन्स को नियंत्रित करता है। सूरज की रोशनी के साथ शरीर ‘कोर्टिसोल’ हार्मोन रिलीज़ करता है जो हमें ऊर्जावान रखता है, वहीं रात में ‘मेलाटोनिन’ हार्मोन विश्राम और गहरी नींद में मदद करता है। देर रात तक मोबाइल-लैपटॉप का इस्तेमाल, नाइट शिफ्ट और अनियमित दिनचर्या से यह रिदम बिगड़ जाता है।

इसका दुष्परिणाम न केवल थकान बल्कि लंबे समय में हृदय रोग, मधुमेह, मोटापा और मानसिक तनाव के रूप में सामने आता है। उन्होंने प्राकृतिक चक्र के अनुसार दिनचर्या ढालने और सुबह धूप लेने की सलाह दी।

महिलाओं में मेनोपॉज़ के बाद बढ़ता है हृदय रोग का खतरा

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए आरोग्य भारती के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य एवं आई-मेड हेल्थ केयर (वाराणसी) के निदेशक डॉ. इन्द्रनील बसु ने महिलाओं के हृदय स्वास्थ्य पर विशेष चर्चा की। उन्होंने बताया कि मेनोपॉज़ से पहले ‘एस्ट्रोजन’ हार्मोन प्राकृतिक रूप से महिलाओं के दिल की रक्षा करता है। मेनोपॉज़ से पहले यदि हृदय संबंधी समस्या होती भी है, तो सीने में दर्द के बजाय थकान, सांस फूलना, पीठ या जबड़े में दर्द जैसे सूक्ष्म लक्षण दिखते हैं। हालांकि, मेनोपॉज़ के बाद महिलाओं में हृदय रोग का खतरा तेजी से बढ़कर पुरुषों के बराबर हो जाता है। उन्होंने महिलाओं को नियमित जांच, संतुलित पोषण, शारीरिक सक्रियता और पर्याप्त नींद अपनाने का परामर्श दिया।

आयुर्वेद व आधुनिक चिकित्सा का समन्वय

प्रांत अध्यक्ष डॉ. एसपी सिंह ने धन्यवाद ज्ञापित करते हुए आधुनिक चिकित्सा पद्धति में हृदय रोगों से बचाव के उपाय बताए और ‘अर्जुन की छाल’ पर अपने वर्षों के शोध के अनुभव साझा किए। व्याख्यान के अंत में प्रतिभागियों की जिज्ञासाओं का समाधान भी किया गया।

टी आर सी पी जी कॉलेज एवं डिपार्टमेंट ऑफ फार्मेसी बाराबंकी के प्रबंधक डॉ. रंजन मिश्रा ने आरोग्य भारती के मंच और सभी अतिथियों का आभार जताया।

इस मौके पर पूर्वी उत्तर प्रदेश के क्षेत्र संयोजक संग्राम, प्रांत सह संयोजिका डॉ. संगीता शर्मा, कार्यालय प्रमुख डॉ. अजीत सिंह, महिला कार्य से जुड़ीं रोली शंकर, डॉ. अंजना, नीलम मिश्रा, अंजली सहित कॉलेज के प्राचार्य गिरजाशकर ,आदेश, अनुप्रिया अन्य प्राध्यापक, विद्यार्थी तथा काशी एवं अवध प्रांत के कई गणमान्य जन उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन कल्याण मंत्र के पाठ के साथ किया गया। कार्यक्रम की सह संयोजिका, आरोग्य भारती (महिला कार्य), अवध प्रांत डॉ. शुचिता चतुर्वेदी रहीं जो कि पूर्व सदस्य, उत्तर प्रदेश राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग भी रह चुकी हैं.

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