Healthy Routine: औषधि है बथुआ, पहलवान से लेकर गर्भवती के लिए है रामबाण, जानें इसका अनोखा उपयोग, इसमें छुपा है महिलाओं की बड़ी समस्या का समाधान

December 5, 2022 by No Comments

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बथुआ को सागों का सरदार यूंही नहीं कहा जाता है। यह न केवल तमाम विटामिन व गुणों से भरा है, बल्कि सर्दी का एक ऐसा आहार है, जो हमारे शरीर को एक साथ तमाम लाभ पहुंचाता है। बथुआ को अंग्रेजी में Lamb’s Quarters या White goosefoot भी कहते हैं। इसका वैज्ञानिक नाम Chenopodium album है। आयुर्वेद में भी इसका बहुत महत्व माना गया है। इसे साग, रायते या फिर चटनी के रूप में भी खा सकते हैं। सबसे बड़ी बात कि इस असाधारण साग की कीमत बहुत की कम होती है।

जानें बुथुए में कौन-कौन से हैं विटामिन और मिनरल्स
बथुआ विटामिन B1, B2, B3, B5, B6, B9 और C से भरपूर है तथा इसमें कैल्शियम, लोहा, मैग्नीशियम, मैगनीज, फास्फोरस, पोटाशियम, सोडियम व जिंक आदि मिनरल्स भी पाए जाते हैं। 100 ग्राम कच्चे बथुवे पत्तों में 7.3 ग्राम कार्बोहाइड्रेट, 4.2 ग्राम प्रोटीन व 4 ग्राम पोषक रेशे होते हैं। मतलब कुल मिलाकर 43 Kcal होती है।

जब बथुआ मट्ठा, लस्सी या दही में मिला दिया जाता है, तो यह किसी भी मांसाहार से ज्यादा प्रोटीन वाला व किसी भी अन्य खाद्य पदार्थ से ज्यादा सुपाच्य व पौष्टिक आहार बन जाता है, इसी के साथ स्वादिष्ट भी। इसके साथ बाजरे या मक्का की रोटी, मक्खन व गुड़ की डली हो तो इसका स्वाद और भी दोगुना हो जाता है।

ये तो सभी जानते हैं कि जब हम बीमार होते हैं तो डाक्टर सबसे पहले विटामिन की गोली खाने की सलाह देते हैं। गर्भवती महिलाओं को खासतौर पर विटामिन बी, सी व आयरन की गोलियां दी जाती हैं, लेकिन बथुए में ये सब कुछ है, अर्थात गोलियां खाने की आवश्यकता नहीं। यहां ये भी कहना अतिश्योक्ति नहीं होगी कि बथुआ पहलवानों से लेकर गर्भवती महिलाओं और बच्चों से लेकर बूढों तक, सबके लिए रामबाण है।

आयुर्वेदाचार्य रोहित यादव बताते हैं कि बथुआ का साग प्रतिदिन खाने से गुर्दों में पथरी की सम्भावना न के बराबर हो जाती है। बथुआ अमाशय को बलवान बनाता है, गर्मी से बढ़े हुए यकृत को ठीक करता है। बथुए के साग का सही मात्रा में सेवन किया जाए तो निरोग रहने के लिए सबसे उत्तम औषधि है।

यहां बता दें कि बथुए का सेवन कम से कम मसाले डालकर करना चाहिए। नमक न मिलाएँ तो बहुत अच्छा है, लेकिन नमक के बिना भला कहां स्वाद अच्छा लगता है, तो इसलिए काले नमक का इस्तेमाल करें। इसी के साथ देशी गाय के घी से छौंक लगाए। बथुए के उबले हुए पानी का स्वाद भी स्वादिष्ट होता है। इसी के साथ दही में बनाया हुआ रायता भी स्वादिष्ट होता है।

नित्य करें बथुए का सेवन

आयुर्वेदाचार्य रोहित यादव बताते हैं कि किसी न किसी तरह के प्रतिदिन बथुआ का सेवन करना चाहिए। क्योंकि बथुए में जिंक होता है जो कि शुक्रवर्धक होता है। बथुआ कब्ज दूर करता है और अगर पेट साफ रहेगा तो कोई भी बीमारी शरीर में नहीं होगी। बथुआ ताकत और स्फूर्ति देता है। अर्थात सर्दी भर या जब तक उपलब्ध हो, तब तक सभी साग-सब्जियों के राजा बथुआ का सेवन करते रहें।

अवश्य पढ़ें ये महत्वपूर्ण जानकारी, महिलाओं की बड़ी समस्या का है इसमें समाधान
बथुए का रस या इसका उबाला हुआ पानी पीने से खराब लीवर भी ठीक हो जाता है। पथरी हो तो एक गिलास कच्चे बथुए के रस में शक्कर मिलाकर नित्य पिए तो पथरी टूटकर बाहर निकल आएगी। कभी-कभी महिलाओं का मासिक धर्म रुक जाता है, जो कि महिलाओं की बड़ी समस्या है। इससे निजात पाने के लिए दो चम्मच बथुए के बीज एक गिलास पानी में उबालें, आधा रहने पर छानकर पी जाए, तुरंत लाभ होगा। आँखों में सूजन, लाली हो तो प्रतिदिन बथुए की सब्जी खाएँ। पेशाब के रोगी बथुआ आधा किलो, पानी तीन गिलास, दोनों को उबालें और फिर पानी छान लें। बथुए को निचोड़कर पानी निकाल कर यह भी छाने हुए पानी में मिला लें। स्वाद के लिए नींबू , जीरा, जरा सी काली मिर्च और काला नमक डाल लें और पी जाएं।

इस तरह किया जाता रहा है बथुआ का अनोखा उपयोग
हमारे बड़-बुजुर्ग बताते हैं कि बथुआ को साग और रायता बना कर अनादि काल से खाया जाता रहा है, लेकिन इससे बड़ी बात कि इसका उपयोग दीवारों को हरे रंग से रंगने के लिए भी इस्तेमाल किया जाता था। सुप्रीम कोर्ट अधिवक्ता अजय अग्रवाल बताते हैं कि विश्व की सबसे पुरानी महल बनाने की पुस्तक शिल्प शास्त्र में लिखा है कि हमारे बुजुर्ग अपने घरों को हरा रंग करने के लिए पलस्तर में बथुआ मिलाते थे। इसी के साथ महिलाएं सिर से डैंड्रफ साफ करने के लिए बथुए के पानी का इस्तेमाल करती थीं। अर्थात इससे अपने बाल धोती थीं। इस तरह से तो ये बात पक्की है कि बथुआ गुणों की खान है और भारत में इस तरह की अनेक-अनेक जड़ी बूटियां हैं, जिससे हमारा देश महान बनता है।

बथुआ साग नहीं औषधि है
जानकारों का दावा है कि बथुआ साग नहीं बल्कि औषधि है। बताया जाता है कि इस दिव्य पौधे को नष्ट करने के लिए अपने-अपने खेतों में लोग रासायनिक जहर डालने लगे हैं। तथाकथित कृषि वैज्ञानिकों ने बथुए को भी कोंधरा, चौलाई, सांठी, भाँखड़ी आदि सैकड़ों आयुर्वेदिक औषधियों को खरपतवार की श्रेणी में डाल दिया है और हम भारतीयों ने इसके लिए कोई आवाज नहीं उठाई।