Sanatan Belief: जानें किन ग्रहों के उलटफेर से कुंडली में लग जाता है पितृ दोष का ग्रहण, देखें इसके 8 लक्षण
पितृदोष विशेष। अक्सर लोग बहुत मेहनत करते हैं, फिर भी उनको सफलता नहीं मिलती और तमाम ऐसे कार्य हैं, जिनको पूरा करने के लिए आप लाख प्रयास कर लेते हैं, लेकिन सफलता नहीं मिलती। इस सम्बंध में आचार्य पंडित रवि शास्त्री बताते हैं कि ऐसा पितृ दोष की वजह से होता है।
वह बताते हैं कि कुन्डली का नवम भाव पिता के सुख, आयु व समृद्धि का कारक है तथा यह जातक के स्वयं के भाग्य, तरक्की, धर्म संबंधी रुझान को बताता है। सूर्य पिता का कारक होता है, ऐसे में सूर्य के साथ यदि राहु जैसा पाप ग्रह आ जाए तो यह ग्रहण योग बन जाता है। यदि नवम भाव पर सूर्य और राहू की युति हो रही हो तो यह माना जाता है कि पितृ दोष योग बन रहा है। शास्त्र के अनुसार सूर्य तथा राहू जिस भी भाव में बैठते है, उस भाव के सभी फल नष्ट हो जाते है। ऐसी स्थिति में जातक के सांसारिक जीवन और आध्यात्मिक उन्नति में अनेक बाधाएं उत्पन्न होती हैं। चन्द्र राशि से नवें भाव का स्वामी अगर राहु से ग्रसित है तो भी पितृ दोष कहा जाता है। इस पर जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए पितृ दोष का निवारण अवश्य कराना चाहिए।
जानें पितृ दोष के लक्षण
विवाह ना होना या विवाह होने में बहुत समस्या होना।
वैवाहिक जीवन में कलह होना।
परीक्षा में बार-बार फेल होना।
नौकरी का ना मिलना या बार-बार नौकरी छूटना।
गर्भपात या गर्भधारण में बहुत ज्यादा समस्या।
अपने आप पर विश्वास ना होना या कोई निर्णय न ले पाना।
बात-बात पर क्रोध आना।
बहुत मेहनत के बावजूद व्यापार ना चलना।