इस दिन जरूरतमंद लोगों को या फिर योग्य ब्राह्मण को ऊनी वस्त्र, कंबल आदि व जूते-चप्पल का दान करना चाहिए. इससे पितृ दोष शांत होता है और संतान से जुड़ी समस्याएं दूर होती हैं.
धनतेरस का ये खुशियों भरा त्योहार,
जीवन में लाएं सुख-समृद्धि अपार।
घर के ईशान कोण में गाय के घी का दीपक जलाएं. बत्ती में रुई के स्थान पर लाल रंग के धागे का उपयोग करें साथ ही दिए में थोड़ी सी केसर भी डाल दें.
शरद पूर्णिमा की रात खीर बनाकर चंद्रमा की रोशनी में रखने की परम्परा है. इसको लेकर धार्मिक मान्यता है कि इस दिन चंद्रमा की किरणों में औषधीय गुण होते हैं।
अगर किसी व्रती महिला के साथ ऐसी कोई भी स्थिति बनती है तो उसे इस पूजन से दूर रहना चाहिए. घर के किसी अन्य सदस्य से कन्या पूजन करवा सकती हैं.
इस दिन कन्याओं को मिठाई, कोल्ड क्रीम आदि भेंट करना शुभ माना गया है। बता दें कि देवी कुष्मांडा की पूजा करने से पहले हाथों में फूल लेकर देवी को प्रणाम कर इस मंत्र का जाप करें।
प्राचीन काल में महिष्मती नगरी में महीजित नाम का एक धर्मात्मा राजा शासन करता था. वह बहुत ही शांतिप्रिय, दानवीर और ज्ञानी थी.
इस दिन व्रत रखना भी अच्छा माना गया है. मान्यता है कि इस दिन व्रत-पूजा करने से जीवन में सुख-समृद्धि का वास होता है।
अगर आप काल सर्प दोष से पीड़ित हैं और तमाम उपाय के बाद भी आपको लाभ नहीं मिल रहा है तो नाग पंचमी के दिन सरल उपाय से इस संकट से बचा जा सकता है.
विशाल स्वरूप और छांव वाला होता है उसी तरह से पति की उम्र भी विशाल होती है और पति स्वस्थ्य रहते हैं. इस व्रत को सुहागिन महिलाओं के साथ ही अविवाहित कन्याएं सुयोग्य वर के लिए कर सकती हैं.