Gyanvapi ASI Survey: ज्ञानवापी मस्जिद मामले में हाईकोर्ट ने मुस्लिम पक्ष की याचिका की खारिज तो डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने कहा- “हर-हर महादेव “, जानें मुस्लिम पक्ष ने क्या दी थी दलील, देखें कई वीडियो
Gyanvapi Survey: ज्ञानवापी मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मुस्लिम पक्ष की ASI सर्वे पर रोक लगाने वाली याचिका को जहां आज सुबह खारिज किया कि, हिंदू पक्ष की खुशी का ठिकाना नहीं रहा. तो वहीं डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने कहा- “हर-हर महादेव.”
न्यूज एजेंसी एएनआई को बयान देते हुए केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि, “मैं इस फैसले का स्वागत करता हूं. मुझे विश्वास है कि एएसआई सर्वेक्षण के बाद सच्चाई सामने आ जाएगी और ज्ञानवापी मुद्दा सुलझ जाएगा.” उन्होंने एक बयान में कहा है कि, सर्वे के माध्यम से मुगल आक्रमणकारी जिन्होंने मंदिर का विध्वंस किया था और उसको छिपाया गया था, इससे उसका सच बाहर आएगा. बाकि ये मामला माननीय न्यायालय के समक्ष है जो भी फैसला आएगा हम उसका स्वागत करेंगे.” वहीं अब मुस्लिम पक्ष सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी कर रहा है. जानकारी सामने आ रही है कि, एक-दो दिन में मुस्लिम पक्ष सुप्रीम कोर्ट का रुख कर सकता है.
बाकि ये मामला माननीय न्यायालय के समक्ष है जो भी फैसला आएगा हम उसका स्वागत करेंगे.” तो वहीं अपने अधिकारिक ट्विटर हैंडल से ट्विट करते हुए उन्होंने कहा है कि, “इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ज्ञानव्यापी परिसर का एएसआई के सर्वे को रोकने वाली याचिका ख़ारिज किए जाने का शिव भक्त के नाते हार्दिक स्वागत करता हूँ. सर्वे से सच्चाई सामने आएगी, मामला न्यायालय में विचाराधीन है, सभी को न्यायालय पर भरोसा है!, विश्वास है अंत में सत्य की जीत होगी! हर हर महादेव.”
जानें मुस्लिम पक्ष आपत्ति में क्या कहा था
ज्ञानवापी मामले में मुस्लिम और हिंदू, दोनों ही पक्षों की दलील हाईकोर्ट में पेश की जा चुकी है. जहां सर्वे को लेकर मुस्लिम पक्ष ने कहा था कि, ASI ने इस मामले में इतनी तेजी क्यों दिखाई?, जिला जज के आदेश के कुछ घंटे बाद ही ASI की टीम वाराणसी पहुंच गई थी. सर्वे से ज्ञानवापी के मूल स्वरूप को नुकसान हो सकता है? सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालत को मुकदमा सुनने लायक है अथवा नहीं के बारे में कहा था? तो वहीं इससे आगे बढ़कर सर्वे कराने का फैसला दे दिया गया. मुस्लिम पक्ष ने कहा कि, 1991 के प्लेसेस आफ वरशिप एक्ट के तहत केस सुनवाई लायक ही नहीं है. इसी के साथ मुस्लिम पक्ष ने ये भी कहा था कि, निचली अदालत ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर निर्णय सुनाया है.
जानें हिंदू पक्ष ने क्या दी थी दलील
तो दूसरी ओर इस मामले को लेकर हिन्दू पक्ष ने दलील देते हुए कोर्ट के समक्ष कहा था कि, राम जन्म भूमि में भी इसी तरह का सर्वे हुआ था और वहां पर किसी तरह का कोई नुकसान नही हुआ. सर्वे से आखिर मुस्लिम पक्ष क्यों डर रहा है, आखिर सच्चाई क्यों सामने नहीं आने देना चाहता?, एएसआई सर्वे होने के बाद पूरी सच्चाई सामने आ जाएगी. ASI ने भी सर्वे को लेकर न सिर्फ सहमति दी है, बल्कि यह भी साफ किया है कि इससे ढांचे को कोई नुकसान नहीं होगा.
जानें क्या है पूरा मामला
बता दें कि हिंदू पक्ष की ओर से विवादित जगह पहले मंदिर होने का दावा किया गया था. हिंदू पक्ष ने दावा किया था कि, औरंगजेब ने यहां पर मंदिर को तोड़कर मस्जिद बनवाई थी. इसी के साथ हिंदू पक्ष की ओर से ये भी दावा किया गया है कि, विवादित परिसर में आज भी हिंदू धर्म के प्रतीक चिन्ह मौजूद हैं और एडवोकेट कमीशन की रिपोर्ट में यह बात सामने भी आ चुकी है. वहीं अब कोर्ट का निर्णय आने के बाद अब कभी भी ज्ञानवापी का सर्वे शुरू किया जा सकता है. तो वहीं हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद मुस्लिम पक्ष अब सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी कर रहा है. जानकारी सामने आ रही है कि, मुस्लिम पक्ष एक या दो दिन में सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकता है.
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