Poonam Pandey: मौत की फर्जी खबर फैलाने पर क्या पूनम पांडे जा सकती हैं जेल! देखें क्या कहते हैं अधिवक्ता
Poonam Pandey News: मॉडल और अभिनेत्री पूनम पांडे ने फिलहाल खुद ही सामने आकर अपनी मौत की खबर का खंडन कर दिया है. शुक्रवार को अपने मैनेजर के हवाले से उन्होंने खुद की मौत का फर्जी पोस्ट सोशल मीडिया पर डाला था। पूरे दिन उनके मौत पर रहस्य बना रहा। न तो उनके परिवार की ओर से इसे लेकर कोई बयान दिया गया और न ही उनका शव कहीं दिखाई दिया. आखिरकार शनिवार को उन्होंने एक वीडियो जारी करके कहा कि उनका निधन नहीं हुआ है। उन्होंने दावा किया कि यह सब उन्होंने कैंसर से जागरुकता पैदा करने के लिए किया था। फिलहाल उनकी इस हरकत को लेकर तमाम लोग उन पर कानून कार्रवाई की मांग कर रह हैं. ऐसे में देखें क्या है वकीलों की राय, क्या वाकई इसके लिए पूनम को कोई सजा हो सकती है?
जानें पहले भी किसी ने किया है क्या अपनी मौत का दावा?
मीडिया सूत्रों की मानें तो देश में ऐसी कई घटनाएं सामने आई हैं जब लोग अपनी मौत का फर्जी दावा करते पाए गए हैं। हालांकि, ऐसे मामलों में अलग-अलग लोगों के अलग-अलग मकसद सामने आए हैं. पिछले साल अक्तूबर में ही नौसेना के पूर्व अधिकारी बलेश कुमार को दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार किया था जिसने हत्या के लिए सजा से बचने के लिए अपनी मौत का फर्जी दावा किया था। यही नहीं आरोपी ने अपना दावा साबित करने के लिए फर्जी आईडी तक बनवा ली थी. गिरफ्तारी के वक्त दिल्ली पुलिस ने अपराध शाखा पुलिस स्टेशन में भारतीय दंड संहिता की धोखाधड़ी, गलत पहचान, आपराधिक साजिश और जालसाजी सहित अन्य धाराओं के तहत मामला दर्ज कर आरोपी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की थी.
जानें कितना अलग है पूनम पांडे का मामला?
वहीं अगर पूनम पांडे का मामला देखा जाए तो यह कई मामलों से अलग हैं, क्योंकि पूनम ने खुद ही अपनी मौत के रहस्य से पर्दा उठाया है. तो वहीं क्या पूनम के खिलाफ कोई केस बनता है या नहीं इस पर हमनें सर्वोच्च न्यायालय के अधिवक्ता और साइबर कानून विशेषज्ञ विराग गुप्ता ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि, ‘कोई शख्स अगर दो समूह, धर्म, नस्ल, क्षेत्र या भाषा के नाम पर नफरत बढ़ाने की कोशिश करे तो उसके खिलाफ आईपीसी की धारा-153ए के तहत मामला दर्ज किया जा सकता है। वह आगे बताते हैं कि, गैरजमानती अपराध होने के कारण ऐसे मामलों में पुलिस आरोपी को गिरफ्तार कर सकती है। अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ आईपीसी की धारा-505 के तहत भी केस दर्ज हो सकता है, जिसमे दोषी पाए जाने पर तीन साल तक की सजा का प्रावधान है। आगे उन्होंने बताया कि, हिंसा भड़काने वाले पोस्ट डालने और दंगा भड़कने पर किसी की मौत होने के मामले में आईपीसी के तहत आजीवन कारावास तक की सजा हो सकती है। तो वहीं वह कहते हैं कि, अफवाह फैलाने पर तोड़फोड़ होने या सार्वजनिक संपत्ति के नुकसान होने पर अफवाह फैलाने वाले से सरकार वसूली भी कर सकती है।’
क्या पूनम को हो सकती है सजा?
इस मामले में विराग ने आगे बताया कि, ‘कंप्यूटर, मोबाइल या अन्य इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से अपराध के खिलाफ कारवाई के लिए आईटी एक्ट 2000 में प्रावधान हैं। धारा-67 के तहत सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक, भड़काऊ या समुदायों के बीच नफरत पैदा करने वाले पोस्ट, वीडियो या तस्वीर शेयर करने पर जेल के साथ जुर्माना भी देना पड़ सकता है। वह आगे कहते हैं कि, पहली बार दोषी पाए जाने पर तीन साल की जेल के साथ पांच लाख रुपये तक का जुर्माना देना पड़ सकता है। अगर यही अपराध दोहराया तो दोषी को पांच साल की जेल और 10 लाख रुपये तक का जुर्माना देना पड़ सकता है। झूठ फैलाना, झूठी जानकारी वाले ईमेल या मैसेज भी अपराध के दायरे में आते हैं।’ इसी के साथ ही विराग बताते हैं कि, ‘पूनम पांडे पहले भी चर्चा में आने के लिए अनेक तरह के आपराधिक कार्यों में लिप्त रह चुकी हैं। मौत की झूठी खबर उड़ाने के मामले में अगर उनके खिलाफ मामला दर्ज हुआ या गिरफ्तारी हुई तो चर्चित रहने का उनका फार्मूला और कामयाब हो जाएगा। अफवाह फैलाने में उनकी भूमिका और अफवाह से नुकसान होने की बात को अदालत में साबित करने में अनेक मुश्किलों की वजह से पूनम पांडे को अंत में सजा दिलवाना मुश्किल होगा।’ तो इसी मामले में अधिवक्ता सौभाग्य मिश्रा बताते हैं कि, ‘इस मामले में कोई आपराधिक केस नहीं बनता है। हालांकि, कोई व्यक्ति कहे कि इस खबर से उसे मानसिक पीड़ा हुई है तो वह सिविल कोर्ट का रुख कर सकता है।’
हो जाएगा फ्राड
इसी मामले में इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने अधिवक्ता सिद्दार्थ शंकर दुबे ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि, ‘अगर कोई दो-तीन दिन के लिए अपनी मौत का दावा करता है और फिर खुद ही आकर कहता है कि मुझे कुछ नहीं हुआ है। तो यह प्रोमोशनल है और यह अपराध की श्रेणी में नहीं आता। दूसरे मामले में यदि पूनम इसे सच बनाने की कोशिश करें तो यह फ्रॉड हो जाएगा।’