Gyanvapi Photos: व्यासजी के तहखाने की Exclusive एक्सक्लूसिव तस्वीरें, देखें क्या-क्या मिला है अंदर?, सुप्रीम कोर्ट से मुस्लिम पक्ष को लगा तगड़ा झटका, पहुंचे हाईकोर्ट, जानें क्या की है मांग
Gyanvapi: ज्ञानवापी परिसर में 30 साल बाद पूजा का अधिकार मिलने के बाद हिंदू पक्ष खुशी से झूम रहा है तो वहीं मुस्लिम पक्ष पूजा रुकवाने के लिए सुप्रीम कोर्ट का सुबह 3 बजे दरवाजा खटखटाया था लेकिन खाली हाथ लौटना पड़ा है. मुख्य न्यायधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने यहां सुनवाई न करते हुए हाईकोर्ट जाने के लिए कहा है. तो दूसरी ओर वाराणसी की जिला अदालत के आदेश पर अमल करते हुए प्रशासनिक अधिकारियों ने कड़ी सुरक्षा में तहखाने में देर रात से ही पूजा-अर्चना शुरू करा दी। गुरुवार तड़के भी मंगला आरती हुई है. इसी बीच तहखाने की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं.

बता दें कि व्यासजी के तहखाने को गंगा जल से धुलवाने के बाद विश्वनाथ मंदिर के मुख्य पुजारी ओम प्रकाश मिश्रा और अयोध्या में श्रीरामलला के प्राण प्रतिष्ठा का शुभ मुहूर्त निकालने वाले गणेश्वर द्रविड़ ने पूजा-अर्चना कराई है। बता दें कि पूजा पाठ का अधिकार काशी विश्वनाथ ट्रस्ट को सौंपा गया है. इस बीच, ज्ञानवापी परिसर में हुए सर्वे की कुछ और नई तस्वीरें सामने आई हैं। इसमें तहखाने की तस्वीरें शामिल हैं। बता दें कि ये सभी तस्वीरें ASI सर्वे के दौरान ली गई थीं जो कि अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं.

जानें क्या कहा जिला जज ने
बता दें कि बुधवार को जिला जज डॉ. अजय कृष्ण विश्वेश की अदालत ने अपने आदेश में कहा कि व्यासजी के तहखाने में स्थित मूर्तियों की पूजा राग-भोग व्यास परिवार और काशी विश्वनाथ ट्रस्ट बोर्ड के पुजारी से कराएं। इसी के साथ ही जिला जज ने अपने आदेश में ये भी लिखा है कि, रिसीवर जिला मजिस्ट्रेट को यह निर्देश दिया जाता है कि वह चौक थाना क्षेत्र के सेटलमेंट प्लाट नंबर-9130 में स्थित भवन के दक्षिण के तरफ स्थित तहखाने में स्थित मूर्तियों की पूजा राग-भोग पुजारी से कराएं।

ये भी आदेश दिया है जिला जज ने
तो इसके अलावा जिला जज ने आदेश देते हुए ये भी कहा है कि, इस संबंध में रिसीवर सात दिन के भीतर लोहे की बाड़ का उचित प्रबंध कराएं। अदालत ने मुकदमे की सुनवाई की अगली तिथि 8 फरवरी दी है। इस बीच वादी और प्रतिवादी पक्ष अपनी आपत्तियां प्रस्तुत कर सकते हैं।
व्यास परिवार का कभी हुआ करता था ज्ञानवापी परिसर
खबरों की मानें तो ज्ञानवापी परिसर कभी व्यास परिवार का हुआ करता था. इस तरह की चर्चा काशी में होती रहती है. शहर के बुजु्र्गों की अगर मानें तो पं. बैजनाथ व्यास एक तहखाने के साथ ही ज्ञानवापी हाता और आवास पर काबिज हुआ करते थे। श्री काशी विश्वनाथ धाम के सुंदरीकरण की परियोजना शुरू हुई तो मंदिर प्रशासन को व्यास आवास खरीदने की जरूरत पड़ी। तो पं. सोमनाथ व्यास और एक अन्य भाई के उत्तराधिकारी ने अपना हिस्सा बेच दिया, लेकिन आवास का अस्तित्व रहने तक पं. केदारनाथ व्यास वहीं रहे। तो वहीं यहां के लोग बताते हैं कि, भवन का कुछ हिस्सा गिरने पर प्रशासन ने नगर निगम, वीडीए और लोक निर्माण विभाग से सत्यापन कराया। तो वहीं जर्जर स्थिति में होने के कारण भवन वर्ष 2017 में ढहा दिया गया। इसके बाद पं. केदारनाथ व्यास मंदिर के समीप स्थित एक किराये के भवन में रहे, जहां साल भर के भीतर उनकी मौत हो गई। भवन को लेकर मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट तक भी गया था।

शास्त्रों में बताया गया है व्यासपीठ का महत्व
शास्त्रों में ज्ञानवापी की व्यास पीठ के महत्व के बारे में वर्णन किया गया है. यहां पंचक्रोशी समेत काशी की परंपरा से जुड़ी अन्य परिक्रमाओं के लिए संकल्प लिए जाते थे। यहां के लोग बताते हैं कि, ज्ञानवापी हाता स्थित व्यास परिवार का आवास भी कोई सामान्य भवन नहीं था। वहां से आदि शंकराचार्य से शास्त्रार्थ करने वाले मंडन मिश्र की यादें जुड़ी है। इसमें उनकी मूर्ति स्थापित थी और राधाकृष्ण का मंदिर भी था।
महात्मा गांधी की जुड़ी हैं यादें
यहां के लोग बताते हैं कि, ज्ञानवापी स्थित व्यास परिवार के आवास में महात्मा गांधी के अलावा स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पंडित मोतीलाल नेहरू, देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू और पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी समेत देश की कई अन्य विशिष्ट शख्सियतें भी कभी पहुंची थीं.
धार्मिक पुस्तकें भी लिखी गई
मीडिया सूत्रों के मुताबिक काशी विश्वनाथ ज्ञानवापी व्यास पीठ, ज्ञानकूप और ज्ञानवापी हाता के पं. केदारनाथ व्यास प्रबंधक रहे थे. उन्होंने पंचकोशात्मक ज्योतिर्लिंग, काशी महात्म्य और अन्नपूर्णा कथा जैसी पुस्तकें लिखीं थीं. उनकी पुस्तक काशी खंडोक्त पंचकोशात्मक यात्रा का 16 भाषाओं में अनुवाद हुआ है। स्थानीय लोग बताते हैं कि उनकी कई पांडुलिपियां और ग्रंथ उनका भवन ध्वस्त होने के साथ ही उसमें समा गए। (सभी तस्वीरें सोशल मीडिया से ली गई हैं)
मुस्लिम पक्ष ने की है ये मांग
मुस्लिम पक्ष ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए 15 दिन की मोहलत मांगी है. साथ ही मांग की है कि 15 दिनों तक पूजा का आदेश लागू न किया जाए. इसी के साथ ही हाईकोर्ट में याचिक दाखिल करने का समय मांगा है. ताकि पूजा को रुकवाया जा सके. हालांकि इससे पहले हिंदू पक्ष व्यासजी के तहखाने में पूजा शुरू कर चुका है.