Bihar News: सिपाही ने डंडे से फोड़ी वकील की एक आंख, चली गई रोशनी…मानवाधिकार आयोग ने लगाया इतने लाख का जुर्माना; मुख्य सचिव को भी नोटिस
Bihar Police: बिहार से चौंका देने वाली खबर सामने आ रही है. यहां सिपाही ने अधिवक्ता की आंख फोड़ दी है जिससे उनकी आंख की रोशनी चली गई है. दरअसल रात में वाहन जांच के लिए सिपाही खड़े थे और पटना से मुजफ्फरपुर आ रहे एक अधिवक्ता को वाहन जांच करने के लिए रोका और फिर आंख में डंडे पर इस तरह से वार किया कि उनकी आंख फूट गई और हमेशा के लिए उनकी आंख की रोशनी चली गई है. हालांकि उनका इलाज अभी जारी है. फिलहाल इस पूरी घटना का संज्ञान लेते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (National Human Rights Commission) ने जुर्माना लगाया है।
ये घटना मुजफ्फरपुर सिविल कोर्ट के अधिवक्ता पंकज कुमार के साथ घटी है. उन्होने बताया कि सात फरवरी को वह रात करीब 11:40 बजे पटना से अपने आवास मुजफ्फरपुर लौट रहे थे, तब पावर हाउस चौक पर पहले से मौजूद काजीमोहम्मदपुर थाने के पुलिसकर्मी वाहन जांच के लिए खड़े थे।
पुलिसकर्मियों द्वारा उनकी गाड़ी को रोका गया और पूछा गया कि वे कहाँ से आ रहे हैं? उन्होने बताया है कि जब तक वह कुछ कहते तब तक एक पुलिस पदाधिकारी ने उनको गाली दी और पुलिसकर्मियों को उन्हें मारने का आदेश दिया. इसी के बाद ही उनकी एक आंख में सिपाही ने डंडा भोंक दिया और वह दर्ज से छटपटाते हुए जमीन पर गिर पड़े. वह किसी से जब तक मदद लेते तब सभी पुलिसकर्मी वहां से भाग चुके थे. उन्होंने बताया कि उनका इलाज शंकर नेत्रालय कोलकाता में हुआ। उनकी एक आंख की रौशनी खत्म हो चुकी है।
मामला लेकर पहुंचे मानवाधिकार आयोग
पीड़ित अधिवक्ता पंकज कुमार ने बताया कि वह इस मामले को लेकर मानवाधिकार के अधिवक्ता एसके झा के माध्यम से राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, नई दिल्ली तथा बिहार मानवाधिकार आयोग, पटना पहुंचे. इस पर सुनवाई करते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने मुआवजे के लिए कार्रवाई की है। मानवाधिकार अधिवक्ता एस. के. झा ने पूरे केस को लेकर मीडिया को जानकारी दी कि यह पूरा प्रकरण मानवाधिकार उल्लंघन के अतिगंभीर श्रेणी का मामला है। आयोग मामले को लेकर शुरू से ही काफी सख्त है और आयोग के द्वारा मामले को काफी गंभीरता से लिया गया है।
मामले में अगली सुनवाई होगी नवम्बर में
इस केस में अगली सुनवाई आठ नवंबर को होगी, जिसमें पीड़ित अधिवक्ता को 20 लाख रुपये मुआवजा दिलाने के लिए एवं दोषी पुलिसकर्मियों को बर्खास्त कराने के लिए अनुरोध किया जायेगा। मानवाधिकार अधिवक्ता ने कहा कि अधिवक्ता पर हमला कतई बर्दाश्त नहीं किया जायेगा। इसके लिए दोषी पुलिसकर्मी को कानून का एहसास कराना जरुरी है।
मानविधाकार ने लिया बड़ा एक्शन
बता दें कि पुलिस द्वारा आंख फोड़े जाने के मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने बिहार सरकार पर कड़ी कार्रवाई की है. इस मामले में पीड़ित अधिवक्ता की ओर से मानवाधिकार अधिवक्ता एसके झा मामले की पैरवी कर रहे हैं। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने राज्य सरकार को इस दिशा में आदेश दिया है। एनएचआरसी ने बिहार राज्य सरकार के मुख्य सचिव को पीड़ित अधिवक्ता को 25 हजार रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है। दरअसल पहले आयोग ने मुख्य सचिव को ‘कारण बताओ’ नोटिस दिया था और दो सप्ताह के भीतर जबाव माँगा था, लेकिन मुख्य सचिव द्वारा कोई जवाब नहीं दिया गया। इसी के बाद आयोग ने विगत 21 अगस्त को मामले की सुनवाई के दौरान सख्त टिप्पणी करते हुए कहा था कि सरकार मुआवजा देने की जवाबदेही से नहीं भाग सकती है, क्योंकि यहां एक लोक सेवक ने मानवाधिकार का उल्लंघन किया है। इस कारण पीड़ित को अपनी एक आंख गंवानी पड़ी। यह कहते हुए आयोग ने मुख्य सचिव को आदेश दिया कि वह पीड़ित को 25 हजार रुपये मुआवजे दे. इसी के साथ ही आयोग ने आदेश के अनुपालन के लिए चार हफ्ते का समय दिया है.