Guru Purnima: अगर कोई गुरु न हो तो गुरु पूर्णिमा पर करें इस भगवान की पूजा…जानें पूजन विधि
Guru Purnima: सनातन धर्म में आषाढ़ मास की पूर्णिमा को व्यास पूर्णिमा कहा जाता है. इसे आषाढ़ी पूर्णिमा या गुरुपूर्णिमा भी कहते हैं. इस बार यह पूर्णिमा 10 जुलाई को पड़ रही है. परम्परानुसार इस दिन गुरु की पूजा की जाती है। पूरे भारत में इस त्योहार को बड़ी ही श्रद्धा और भक्ति से मनाया जाता है।
वैसे तो व्यास नाम के कई विद्वान हुए हैं, लेकिन व्यास ऋषि, जो चारो वेदों के प्रथम व्याख्याता थे, उन्हीं की पूजा करने का विधान इस दिन शास्त्रों में बताया गया है और उनकी ही स्मृति में गुरु पूर्णिमा मनाई जाती है.
शास्त्रों में बताया गया है कि हमें वेदों का ज्ञान देने वाले व्यास जी ही थे। वह हमारे आदिगुरु थे। हमें अपने-अपने गुरुओं को व्यासजी का अंश मानकर उनकी पूजा करनी चाहिए।

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भोले बाबा की भी कर सकते हैं पूजा
आचार्य सुशील कृष्ण शास्त्री बताते हैं कि प्राचीनकाल में विद्यार्थी जब नि:शुल्क शिक्षा ग्रहण करते थे तो इसी दिन श्रद्धाभाव से प्रेरित होकर अपने गुरु की पूजा किया करते थे और उन्हें यथाशक्ति दक्षिणा भी अर्पित किया करते थे। इस दिन केवल गुरु ही नहीं बल्कि माता-पिता, बड़े भाई-बहन को भी गुरु तुल्य मानकर पूजा करनी चाहिए।
बता दें कि इस दिन ब्राह्मणों को भी दान किया जाता है। इसी के साथ सनातन धर्म को मानने वालों के घरों में चने की दाल भर कर पूड़ी, घुइंयां की सब्जी और आम खाने का प्रचलन है। इस दिन आषाढ़ी भी मनाई जाती है। इस दिन दान-पुण्य का बड़ा महत्व शास्त्रों में बताया गया है। इसी के साथ यह भी कहा गया है कि अगर आपके कोई गुरु नहीं है तो भोले बाबा की पूजा कर सकते हैं।
इस तरह करें भोले बाबा या फिर गुरु की पूजा
सुबह ही स्नान करने के बाद शुद्ध वस्त्र धारण कर गुरु के पास जाएं अगर गुरु नहीं हैं तो किसी भी शिव मंदिर में जाकर शिव जी की पूजा कर सकते हैं. इस दिन जिस तरह गुरु की पूजा की जाती है उसी तरह शिव जी की भी पूजा का विधान बताया गया है. गुरु को सुसज्जित ऊंचे आसन पर बिठाकर पुष्पमाला पहनाएं। इसके बाद वस्त्र, फल, फूल व माला अर्पण करें और उपहार में कुछ भी भेंट करें। चाहे तो केवल दक्षिणा भी दे सकते हैं या आपकी जो भी इच्छा हो, वह उपहार स्वरूप भेंट करें। इसके बाद श्रद्धापूर्वक पूजन कर गुरु का आशीर्वाद प्राप्त करें।
मालूम हो कि गुरु के आशीर्वाद से ही विद्यार्थी को विद्या आती है और मन का अंधकार दूर होता है। गुरु का आशीर्वाद ही प्राणीमात्र के लिए कल्याणकारी, ज्ञानवर्धक और मंगलकारी होता है। संसार की सम्पूर्ण विद्याएं गुरु की कृपा से ही प्राप्त होती है। इस पर्व को श्रद्धा भाव से करें अंधविश्वास के आधार पर नहीं। क्योंकि गुरु की दी हुई विद्या सिद्ध और सफल होती है।
गुरु का पूजन मंत्र
“गुरु ब्रह्मा गुरुर्विष्णु: गुरुदेव महेश्वर:।
गुरु साक्षात्परब्रह्म तस्मैश्री गुरुवे नम:।। “
DISCLAIMER:यह लेख धार्मिक मान्यताओं व धर्म शास्त्रों पर आधारित है। हम अंधविश्वास को बढ़ावा नहीं देते। पाठक धर्म से जुड़े किसी भी कार्य को करने से पहले अपने पुरोहित या आचार्य से अवश्य परामर्श ले लें। किसी भी प्रकार की भ्रम की स्थिति में प्रमाणिक ज्योतिषियों से ही परामर्श लें। KhabarSting इसकी पुष्टि नहीं करता।)
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