शिकायत के बाद भी नहीं चेते और 6 दिन बाद ही गिर गई स्कूल की छत… 8 बच्चों की मौत; 5 शिक्षक सस्पेंड, रूह कंपा देने वाला Video वायरल
Rajasthan School Collapse: राजस्थान के झालावाड़ जिले से सुबह ही बुरी खबर सामने आई है. यहां एक सरकारी स्कूल की छत गिरने से पूरा देश हिल गया है. इस हादसे में छह से लेकर 7 बच्चों की मौत की खबर सामने आ रही है तो वहीं करीब 15 बच्चे घायल बताए जा रहे हैं. इसी के साथ ही अभी भी 41 बच्चों के मलबे में दबे होने की आशंका जाहिर की जा रही है.
इस घटना के बाद से ये सवाल खड़ा हो रहा है कि ये सिस्टम की लापरवाही है या फिर कुछ और? तो वहीं परिजनों का दावा है कि कुछ दिन पहले ही छत के जर्जर होने की शिकायत की थी लेकिन एक नहीं सुनी गई और उसी जर्जर छत के नीचे बैठाकर बच्चों को पढ़ाया जा रहा था. सोशल मीडिया पर कई रूह को झकझोर देने वाले वीडियो वायरल हो रहे हैं.
सोचा था-
स्कूल में ख्वाबों को परवाज़ मिलेगी,
किताबों से, रोशन सवालो-ज़वाबों से
क़िरदार को इक आवाज़ मिलेगी।
एक साथ टूट गया सब कुछ,
केवल स्कूल की छत नही गिरी…
मासूम आँखों क़ा पूरा यक़ीन ढह गया। #झालावाड़हादसा pic.twitter.com/13CxnpEUNu— sushant pareek (@pareek12sushant) July 25, 2025
एक वीडियो में माता-पिता गोद में अपने लालों को लेकर अस्पताल जाते हुए दिख रहे हैं तो वहीं माताएं बिलख रही हैं. इस घटना ने पूरे देश को हिला कर रख दिया है. सोशल मीडिया पर यूजर्स तरह-तरह के कॉमेंट करते हुए कह रहे हैं कि आज चांद पर जाने वाले भारत के गांवों में स्थित स्कूलों की छत इस तरह से जर्जर होने पर देश की सरकार को शर्म आनी चाहिए. इस हादसे के बाद से ही लोग राजस्थान की सरकार से जवाब मांग रहे हैं और कह रहे हैं कि जब जर्जर स्कूल होने की शिकायत की गई थी तो इस ओर ध्यान क्यों नहीं दिया गया?
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, राजस्थान के झालावाड़ जिले के मनोहरथाना में पिपलोदी प्राइमरी स्कूल की छत उस वक्त भरभरा कर गिर गई जब बच्चे पढ़ रहे थे. हादसा सुबह करीब 8 बजे हुआ. हादसे में 8 बच्चों की मौत हो गई और 27 से अधिक बच्चे घायल हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, हादसे के वक्त स्कूल में करीब 70 बच्चे मौजूद थे. तो वहीं मलबे में 44 बच्चों के फंसे होने की आशंका भी जताई जा रही है. फिलहाल रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है.यह हादसा स्कूलों में पुरानी इमारतों और रखरखाव की कमी को लेकर फिर से सवाल उठाता है, लेकिन यह पहली बार नहीं है जब देश में ऐसा कुछ हुआ हो.
इससे बड़ा दर्द क्या होगा?
राजस्थान के झालावाड़ में स्कूल की छत गिरी, 7 बच्चों की मौत, 29 घायल।क्या सत्ता में बैठे भाजपा के नेता कभी समझ पाएँगे माँ-बाप का ये दर्द?
क्यों न ज़िम्मेदार मंत्री और अफसरों पर हत्या का मुकद्दमा चलाया जाए? pic.twitter.com/Coaf7yXDVm
— Sameer Naqvi (@SameerNaqviii) July 25, 2025
पुलिस, प्रशासन, और NDRF की टीमें रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटी हुई हैं. तो वहीं कई घायल बच्चों को परिजन स्कूल लेकर पहुंचे हैं. झालावाड़ के SP अमित कुमार बुदानिया का एक बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है जिसमें उन्होंने कहा कि जिला कलेक्टर और पुलिस तुरंत मौके पर पहुंचे और घायलों को अस्पताल ले जाया गया.
हादसे को लेकर जब जिला कलेक्टर अजय सिंह राठौड़ से मीडिया ने सवाल किया तो उन्होंने ये कहते पल्ला झाड़ लिया कि जर्जर स्कूलों की सूची में इस स्कूल का नाम ही नहीं था. उन्होंने कहा कि शिक्षा विभाग से जर्जर स्कूलों की सूची मांगी गई थी, लेकिन इस स्कूल का नाम उस सूची में नहीं था। उन्होंने कहा कि चूक कहां हुई है इसकी जांच की जा रही है और दोषियों को इस मामले में बख्शा नहीं जाएगा।
शिक्षक निलम्बित
तो वहीं हादसे के बाद स्कूल के सभी 5 शिक्षकों को निलंबित कर दिया गया है। शिक्षा विभाग ने प्रारंभिक लापरवाही मानते हुए इन शिक्षकों को सस्पेंड किया है. तो वहीं सवाल खड़ा होता है कि क्या इस पूरे मामले में सिर्फ शिक्षकों की लापरवाही है और क्या जितनी कार्रवाई की गई है वो पर्याप्त है, क्या कोई और इसका जिम्मेदार नहीं है.
कांग्रेस ने साधा निशाना
इस हादसे के बाद से ही प्रदेश में सियासत तेज हो गई है. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने इसे सिस्टम की लापरवाही करार देते हुए कहा है कि जब वे शिक्षा मंत्री थे, तब सभी स्कूलों का डाटा शालादर्पण पर अपलोड किया गया था, जिसमें स्कूल की स्थिति, कक्ष संख्या, मरम्मत की जरूरत जैसे बिंदु दर्ज थे। इसी के साथ ही उन्होंने सवाल खड़ा करते हुए कहा कि फिर सवाल उठता है कि क्या उस डेटा का कोई उपयोग नहीं किया गया?
की गई थी छत से पानी टपकने की शिकायत
घायल बच्चों को अस्पताल लेकर पहुंचे गांव के ही शख्स बनवारी ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि 5-6 दिन पहले ही छत से पानी टपकने की शिकायत स्कूल प्रशासन से की थी लेकिन स्कूल प्रशासन ने यह कहकर कि पल्ला झाड़ लिया था कि गांव वाले ही ये काम करें. अगर शिकायत मिलते ही छत की मरम्मत करवा दी जाती, तो शायद आज ये 8 मासूम जिंदा होते।
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