Independence Day: 88 रुपए तोला सोना और रूपए के आगे डॉलर भरता था पानी…वर्ष 1947 में जानें कैसा था देश का हाल?
Independence Day 2025: भारत इस साल अपनी स्वतंत्रता के 79वें वर्षगांठ में प्रवेश कर चुका है. यानी हमें अंग्रेजों से आजादी मिले 78 साल हो चुके हैं. इस आजादी के लिए देश के न जाने कितने ही सपूतों ने अपनी जान हंसते-हंसते न्योछावर कर दी थी. तो वहीं आजादी से लेकर आज तक देश ने न जाने कितने ही बदलाव देखे हैं.
जब देश आजाद हुआ था, तब से लेकर आज तक देश तरक्की के तमाम नए कीर्तिमान हासिल कर चुका है तो वहीं दुनिया भर में अपनी एक नई जगह भी बनाई है तो वहीं इतने सालों में कम से कम तीन पीढ़ियां बदल चुकी हैं और हम आज जहां एक ओर विकास की ऊंचाई पर दिन पर दिन आगे बढ़ रहे हैं ठीक वैसे ही महंगाई भी चरम पर है.
आज गरीबों को कमाने-खाने के लाले पड़े हैं तो वहीं अगर वर्ष 1947 की महंगाई को देखें तो उस समय में मात्र एक रुपए में हफ्ते भर का राशन मिल जाता था और सोने की कीमत इतनी की कोई सोच भी नहीं सकता लेकिन भले ही आज हमें उस समय के रेट हर चीज के कम लगें लेकिन उस समय जो चीज जितने रुपए में मिलती थी, वो भी उस समय के लिए महंगा ही था क्योंकि तब लोगों की आमदनी भी कम थी.
हालांकि आज की पीढ़ी के लिए वो जमाना बहुत ही सस्ता लगेगा. क्योंकि तब ढाई रुपए किलो शुद्ध घी मिल जाता था जो कि आज एक हजार रुपए अदा करने पर भी नहीं मिलता. 12 पैसे में एक किलो दूध मिल जाता था जबकि आज 60 से 70 रुपए किलो दूध का रेट है. तो वहीं जहां आज सोने का रेट एक लाख से ऊपर पहुंच चुका है तो वहीं 1947 में 10 ग्राम सोने की कीमत मात्र 88 रुपए थी.
90 रुपए में एक साइकिल खरीदी जा सकती थी जबकि आज साइकिल की कीमत 5 से 6 हजार की है. उस समय जिसके पास साइकिल होती थी वह अमीर माना जाता था. या यूं कहें कि साइकिल होना स्टेटस सिंबल होती थी और आज लोग साइकिल को हेय दृष्टि से देखते हैं. यहां तक कि स्कूल जाने वाले बच्चे तक साइकिल चलाना नहीं चाहते. आज माना जाता है कि साइकिल केवल गरीबों का ही वाहन है.
खाने-पीने की चीजों की कीमत
1947 में चीनी जहां 40 पैसे प्रति किलो बिकती थी और आलू 25 पैसे किलो मिलता था तो वहीं आज की कीमतें आसमान छू रही है. बता दें कि आलू और तमाम सब्जियों के दामों में 1947 से लेकर 70 के दशक तक कोई खास बदलाव नहीं हुआ लेकिन इधर कुछ सालों में इनकी कीमतें इतनी तेजी से बढ़ी है कि आज गरीबों के लिए जीना मुहाल हो गया है. जो रोज कमाने-खाने वाले लोग हैं वो अपनी मूलभूत आवश्यकताओं को भी पूरा नहीं कर पा रहे हैं. इस तरह से 90 के दशक के बाद दामों में महंगाई के पंख ऐसे लगे कि आज तक महंगाई की रफ्तार थमने का नाम नहीं ले रही है.
सोना (Gold)
भारतीय पोस्ट गोल्ड क्वायन सर्विस के मुताबिक, 1947 में 10 ग्राम सोने की कीमत 88.62 रुपए थी जबकि आज एक लाख से ऊपर है. अगर मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो 1947 के बाद सोना ऐसी कमोडिटी है जिसके दाम दूसरी सारी चीजों की तुलना में कहीं अधिक बढ़े हैं.
कार की कीमत
1947 में प्रकाशित एक विज्ञापन की मानें तो भारत में उस समय फोर्ड कपंनी की ब्यूक 51 कार की कीमत करीब 13,000 रुपए थी. इस कार को यहां लाकर बेचा जाता था. 1930 में फोर्ड की ए माडल फेटन कार करीब 3000 रुपए कीमत में भारत में बिका करती थी.
डालर
आज की पीढ़ी को ये जानकर हैरानी होगी कि 1925 तक भारतीय रुपए से डॉलर की कीमत कम थी. तब एक डॉलर हमारे 10 पैसे के बराबर होता था. 1947 में एक डॉलर 4.16 रुपए के बराबर हो गया. 1965 तक एक डालर 4.75 रुपए के बराबर रहा. फिर बढ़कर 06 रुपए 36 पैसे हो गया. फिर लगातार डॉलर की कीमत बढ़ने लगी और 1982 में 09 रुपए 46 पैसा हुआ. उसके बाद अब ये कहां है ये तो सी को मालूम ही है.
डाक
भारतीय पोस्ट डिपार्टमेंट की मानें तो 15 अगस्त 1947 को एक लिफाफे का पोस्टेज शुल्क डेढ़ आना यानी 09 पैसे था और तब डाक विभाग लिफाफे के वजन को ग्राम में नहीं बल्कि तोले में तौला करते थे. इस तरह प्रत्येक अतिरिक्त तोले के वजन के साथ लिफाफे का पोस्टेज चार्ज 06 पैसे यानि एक आना बढ़ जाता था. तो वहीं पोस्टकार्ड की कीमत 06 पैसे हुआ करती थी. इसके बाद अगले दस सालों में इनकी कीमत बढ़ी लेकिन नाम मात्र की. 1957 तक भारतीय डाक विभाग का वजन का मापक भी तोला ही हुआ करता था.
पेट्रोल व एयर ट्रेवल
1947 में पेट्रोल की कीमत मात्र 27 पैसे प्रति लीटर थी और आज की कीमत तो सभी जानते हैं. आज 95 रुपए से 100 रुपए तक पेट्रोल की प्रति लीटर कीमत है. तो वहीं दिल्ली से मुंबई तक की उड़ान का टिकट 140 रुपए का था जबकि आज इसकी कीमत 5500 रुपए या इससे अधिक हो चुकी है.