महाशिवरात्रि पर बना उत्तराषाढ़ा और श्रवण नक्षत्र का अद्भुत संयोग…राशि के अनुसार करें अभिषेक-पूजा
Mahashivratri 2026: सनातन धर्म में फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी को महाशिवरात्रि का व्रत-त्योहार मनाया जाता है. इस बार यह व्रत 15 फरवरी को मनाया जा रहा है. अगर पंचांग की मानें तो इस बार महाशिवरात्रि पर कई शुभ योग एक साथ बन रहे हैं जो इस दिन को और भी महत्वपूर्ण बना रहे हैं.
आचार्य सुशील कृष्ण शास्त्री कहते हैं कि महाशिवरात्रि का व्रत-त्योहार तो वैसे भी हर तरह से फलदायी है लेकिन इस बार सर्वार्थ सिद्धि योग जैसे कई बेहद शुभ योग होने की वजह से यह दिन और भी शुभ फलदायी बन गया है.
महाशिवरात्रि पर बना सर्वार्थ सिद्धि योग
पंचांग के मुताबिक, सर्वार्थ सिद्धि योग 15 फरवरी को प्रातः काल 7 बजे से शुरू होगा और शाम 7 बजकर 48 मिनट तक रहेगा. माना जाता है कि सर्वार्थ सिद्धि योग में महाशिवरात्रि जैसे महापर्व का पड़ना शिवजी की विशेष कृपा की ओर संकेत करता है.
मान्यता है कि सर्वार्थ सिद्धि योग में महाशिवरात्रि का व्रत और पूजा करने से श्रद्धालु के मनचाहे कार्य बिना किसी बाधा के पूरे होते हैं. व्यवसाय और करियर में सफलता मिलती है, लेकिन ध्यान रहे कि किसी भी पूजा में मन का एकाग्र होना जरूरी है. इसलिए मन-मस्तिष्क को एकाग्र रखें, मन में किसी के प्रति बुरा भाव न हो और न ही काम वासना का कोई भाव हो.
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उत्तराषाढ़ा और श्रवण नक्षत्र का बना संयोग
महाशिवरात्रि की शाम को 7 बजकर 47 मिनट तक उत्तराषाढ़ा नक्षत्र रहेगा. माना जाता है कि यह नक्षत्र सूर्य की ऊर्जा (तेज, सफलता) और शिव की शक्ति का मिश्रण है. इससे जीवन में स्थिरता आती है और स्वास्थ्य व सुख की प्राप्ति भी होती है. मान्यता है कि इस दौरान भगवान शिव की पूजा विधि-विधान से करने से घर-परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है और वैवाहिक जीवन सुखी होता है.
तो वहीं श्रवण नक्षत्र का प्रारंभ शाम 7 बजकर 48 मिनट पर होगा. इस नक्षत्र अत्यंत शुभ माना जाता है, क्योंकि यह चंद्रमा से संबंधित है. अगर इस नक्षत्र के दौरान शिवलिंग का अभिषेक जल, दूध, बेलपत्र, सफेद फूल और धतूरे से किया जाए व “ॐ नमः शिवाय” का 108 बार जाप किया जाए तो विशेष फल की प्राप्ति होती है. इस दिन शिव-पार्वती की कथा सुनना विशेष पुण्यदायी होता है. यह पूजा मानसिक शांति और सुख-समृद्धि लाने वाली होती है.
मनोकामना पूरी करने के लिए
अगर आपकी कोई मनोकामना है तो उत्तराषाढ़ा नक्षत्र के दौरान महाशिवरात्रि के दिन 11 बेलपत्र और धतूरे के साथ शिवजी का जलाभिषेक करें. माना जाता है कि इस तरह से पूजा करने से मनोकामना पूरी होती है.
निशीथ काल में सिद्धि योग
बता दें कि महाशिवरात्रि पर निशीथ काल की पूजा का समय रात 11 बजकर 57 मिनट से रात 12 बजकर 48 मिनट तक रहेगा. मान्यता है कि इस काल में शिव जी की साधना करने से संपूर्ण फल की प्राप्ति होती है. इस दौरान शिव पूजा के लिए किए जाने वाले सभी उपाय बहुत ही फलकारी माने जाते हैं.
जानें क्या है पौराणिक मान्यता?
पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक, महाशिवरात्रि के त्योहार को भगवान शिव और माता पार्वती की वैवाहिक उत्सव के रूप में मनाया जाता है. शिवपुराण में दी गई कथा के मुताबिक, जो लोग विवाहित हैं उन्हें अपने जीवनसाथी के साथ इस दिन पूरे विधि विधान से महाशिवरात्रि की पूजा करनी चाहिए. इससे वैवाहिक जीवन सुखी रहता है और घर-परिवार में सुख-समृद्धि का वास होता है.
राशि अनुसार इस तरह करें शिवलिंग का अभिषेक और पूजा
मेष राशि वालों को गाय के कच्चे दूध में शहद मिलाकर अभिषेक करना चाहिए.
वृष राशि के जातकों को दही से अभिषेक करने के साथ ही सफेद पुष्प, फल और वस्त्र चढ़ाएं.
मिथुन राशि वाले गन्ने के रस से अभिषेक करें व धतूरा, पुष्प, भांग व हरा फल चढ़ाएं.
कर्क राशि के जातक दूध में शक्कर मिलाकर अभिषेक करें और सफेद वस्त्र, मिष्ठान्न व मदार का पुष्प चढ़ाएं.
सिंह राशि के जातक शहद या गुड़ मिश्रित जल से अभिषेक करें व लाल पुष्प, वस्त्र और रोली अर्पित करें.
कन्या राशि वाले गन्ने के रस से अभिषेक करें व भांग, धतूरा, मंदार का पत्र व पुष्प चढ़ाएं.
तुला राशि वाले शहद से अभिषेक करें व भाग, मंदार पुष्प और सफेद वस्त्र चढ़ाएं.
वृश्चिक राशि के जातक शहद युक्त तीर्थ जल से अभिषेक करें साथ ही लाल पुष्प, फल और मिष्ठान चढ़ाएं.
धनु राशि वाले जातक गाय के दूध में केसर मिलाकर अभिषेक करें व पीला वस्त्र, फल, भांग व धतूरा चढ़ाएं.
मकर राशि वाले गंगाजल या गन्ने के रस से अभिषेक करें व शमी पत्र, भांग, धतूरा चढ़ाएं.
कुंभ राशि वाले जातक गन्ने के रस से अभिषेक करें व दूर्वा, शमी, मंदार पुष्प चढ़ाएं.
मीन राशि वाले केसर मिश्रित दूध से अभिषेक करें साथ ही केला और पीला पुष्प, फल व मिष्ठान चढ़ाएं.
DISCLAIMER:यह लेख धार्मिक मान्यताओं व धर्म शास्त्रों पर आधारित है। हम अंधविश्वास को बढ़ावा नहीं देते। किसी भी धार्मिक कार्य को करते वक्त मन को एकाग्र अवश्य रखें। पाठक धर्म से जुड़े किसी भी कार्य को करने से पहले अपने पुरोहित या आचार्य से अवश्य परामर्श ले लें। KhabarSting इसकी पुष्टि नहीं करता।
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