Hanuman Jayanti: हनुमान जयंती आज…आइए जानें हनुमान चालीसा से जुड़े रोचक तथ्य व वैज्ञानिक आधार-Video

April 2, 2026 by No Comments

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Hanuman Jayanti Hanuman Chalisa Facts: भगवान राम के प्रिय भक्त हनुमान जी की आज जयंती है. चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि पर हनुमान जी का जन्म माता अंजनी के गर्भ से हुआ था. माना जाता है कि देवताओं में एकमात्र हनुमान जी ही हैं जो आज भी धरती पर मौजूद हैं. उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान श्रीराम ने उनको अमर होने का वरदान दिया था. इसीलिए हनुमान जी को कलयुग का देवता माना जाता है.

मान्यता है कि प्रतिदिन अगर हनुमान चालीसा का पाठ किया जाए तो हमारे जीवन को नकारात्मक शक्तियां प्रभावित नहीं करती और हमारा जीवन सुखमय होता है. तो आइए इस मौके पर तुलसीदास जी द्वारा रचित हनुमान चालीसा से जुड़े रोचक तथ्यों को जानते हैं और इसके वैज्ञानिक आधार पर भी नजर डालते हैं.

कौन हैं हनुमान जी के गुरु?

वैसे तो हनुमान जी के गुरु के रूप में सूर्यदेव को माना जाता है क्योंकि सूर्य देव ने ही उन्हें शिक्षा और ज्ञान प्रदान की थी लेकिन कुछ ज्योतिषाचार्यों व आचार्यों का मानना है कि वह माता सीता को अपना गुरु मानते थे. दरअसल हनुमान चालीसा में इस बात का उल्लेख मिलता है कि वह माता सीता को अपना गुरु मानते थे. हनुमान चालीसा के शुरू में दो दोहों है, जिसमें पहला शब्द ‘श्री गुरु चरन सरोज रज’ है. इस पंक्ति को लेकर कई आचार्यों का मानना है कि यहाँ ‘श्री गुरु’ का तात्पर्य माता सीता से है.

40 चौपाई

हनुमान चालीसा में 40 चौपाई दी गई है जो कि हनुमान जी के गुणों का वर्णन करती है. इसके छंद में हनुमान जी की शक्ति और जीवन व भक्ति से जुड़ी अनेक बातें दी गई हैं जो कि हमें बेहतर जीवन जीने की सीख देती हैं. हनुमान चालीसा का प्रतिदिन पाठ करने वालों को अपने अंदर एक अलग तरह की ऊर्जा का अनुभव होता है और वे बेहतर ढंग से जीवन में आने वाली किसी भी चुनौती का सामना कर सकते हैं.

हनुमान चालीसा में वर्णित चौपाइयां

हनुमान चालीसा की पहली 10 चौपाइयां हनुमान जी की शक्ति, बुद्धि और श्रीराम भक्ति को दर्शाती हैं। 11 से 20 चौपाइयों में श्रीराम और उनके भ्राता लक्ष्मण का उल्लेख है। चालीसा के अंतिम चौपाइयों में हनुमान जी की कृपा और उनके भक्तों के लिए उनकी उपस्थिति का वर्णन किया गया है। हनुमान चालीसा में तुलसीदास जी ने प्रभु श्रीराम, माता सीता और उनके भ्राता लक्ष्मण का विशेष उल्लेख किया है।

वैज्ञानिक तथ्य

बता दें कि सनातन धर्म में जो भी मान्यताएं हैं उसका कुछ न कुछ वैज्ञानिक आधार जरूर है. इसी तरह से हनुमान चालीसा का एक बहुत ही रोचक और वैज्ञानिक दृष्टि से अद्भुत आधार या कह लें तथ्य यह भी है कि इसमें सूर्य और पृथ्वी के बीच की दूरी का उल्लेख तुलसीदास जी ने 15वीं शताब्दी में ही कर दिया था. यह चालीसा 15वीं शताब्दी में उन्होंने रची थी. उस समय की वैज्ञानिक समझ के हिसाब से भी यह दूरी अत्यंत सटीक बताई गई थी, जो 17वीं शताब्दी के वैज्ञानिकों द्वारा की गई गणनाओं से कहीं अधिक सही थी.

हनुमान चालीसा की एक चौपाई में वर्णन किया गया है कि हनुमान जी सूर्य की ओर एक लंबी छलांग लगाते हैं और उसे मीठा फल समझकर खा लेते हैं यह चौपाई है-

“जुग सहस्र जोजन पर भानू, लील्यो ताहि मधुर फल जानू”

वैज्ञानिक और गणितीय रूप से अगर इसे समझें तो…
1 जुग = 12,000 वर्ष
1 सहस्र = 1,000
1 जोजन = 8 मील
तो दूरी = 12,000 × 1,000 × 8 = 96,000,000 मील
अगर इसको किलोमीटर में बदलते हैं तो ≈ 153,600,000 किमी

यानी वास्तव में, पृथ्वी और सूर्य के बीच की दूरी लगभग 150,000,000 किलोमीटर है. इसका स्पष्ट अर्थ है कि तुलसीदास जी ने अपनी रचना में इस दूरी को 15वीं शताब्दी में ही करीब-करीब बिल्कुल सटीक रूप से बता दिया था. यह हनुमान चालीसा की वैज्ञानिक गहराई और अद्भुतता को दर्शाता है और यह साफ तौर पर कहता है कि हनुमानजी इस धरती पर हुए और रामायण व महाभारत के भी सभी पात्र हुए. दरअसल कई बार कुछ तथाकथित कुंठित लोग रामायण और महाभारत के पात्रों को काल्पनिक पात्र बताते हैं और कहते हैं कि कभी राम और कृष्ण, हनुमान आदि हुए ही नहीं जबकि सनातन शास्त्रों में लिखी हर बात का आज वैज्ञानिक आधार है और इसे विज्ञान भी आज मान रहा है.

तुलसीदास जी ने कराया था हनुमान मंदिर का निर्माण

वैसे तो आज देश में हनुमान जी के कई मंदिर हैं लेकिन तुलसीदास जी ने वाराणसी में मौजूद संकट मोचन हनुमान मंदिर का निर्माण कराया था और हनुमान चालीसा की रचना की थी. माना जाता है कि जब तुलसीदास जी हनुमान चालीसा की रचना कर रहे थे तब अप्रत्यक्ष रूप से स्वयं श्रीराम उस समय उपस्थित थे और उन्होंने इस रचना को सुना था.

इस भाषा में लिखी गई हनुमान चालीसा

कवि तुलसीदास ने हनुमान चालीसा की रचना अवधी भाषा में की थी. अपने जीवन के अंतिम दिनों तक तुलसीदास जी वाराणसी में रहे. उनके सम्मान में वाराणसी में एक घाट का नाम भी रखा गया जिसे आज भी तुलसी घाट के नाम से जाना जाता है.

DISCLAIMER:यह लेख धार्मिक मान्यताओं व धर्म शास्त्रों पर आधारित है। हम अंधविश्वास को बढ़ावा नहीं देते। किसी भी धार्मिक कार्य को करते वक्त मन को एकाग्र अवश्य रखें। पाठक धर्म से जुड़े किसी भी कार्य को करने से पहले अपने पुरोहित या आचार्य से अवश्य परामर्श ले लें। KhabarSting इसकी पुष्टि नहीं करता।)

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