राम मंदिर दान चोरी मामला…जानें क्या लिखा FIR में? इन आरोपियो के नाम आए सामने; अज्ञात में कौन?

June 26, 2026 by No Comments

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Ram Mandir Donation Theft Case: अयोध्या राम मंदिर दान चोरी मामले में आरोपियों के नाम भी सामने आ गए हैं. तो वहीं एफआईआर संख्या 0090/2026 25 जून 2026 को दर्ज की गई है.

ट्रस्ट के सदस्य श्रीकृष्ण मोहन की तहरीर तथा एसआईटी की संस्तुति के बाद एफआईआर में लवकुश मिश्रा, अनुकल्प मिश्रा, टिन्नू यादव, अविनाश शुक्ल, मनीष यादव सहित कुल 8 लोगों को नामजद किया गया है, तो वहीं एक अज्ञात को भी आरोपी बनाया गया है? फिलहाल वो अज्ञात कौन हैं? ये एक बड़ा सवाल है. फिलहाल एफआईआर में जिनके नाम शामिल हैं वो अधिकांश आरोपी दानराशि की गिनती और कैश कार्यों से सम्बंधित कार्यों से जुड़े थे. तो वहीं ये भी बताया जा रहा है कि ये लोग चोरी की धनराशि को बाथरुम में रखते थे.

Ram Mandir donation theft case

फिलहाल कई चेहरे जांच एजेंसियों के निशाने पर है. इस पूरे मामले में रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू की अहम भूमिका मानी जा रही है. यह मंदिर की तमाम व्यवस्थाओं की निगरानी करता था.

बताया जा रहा है कि गणना कक्ष की चाबी के साथ ही कई और जिम्मेदारी भी उसके पास थी. तो वहीं अनुकल्प मिश्रा और लवकुश मिश्रा की ड्यूटी दान की गणना में लगती थी. रिश्तेदारी के जरिए दोनों मंदिर प्रबंधन से जुड़े लोगों के करीबी बताए जा रहे हैं. इनके घरों से जांच के दौरान कथित रूप से चोरी की रकम बरामद होने की भी बात बताई जा रही है.

Ram Mandir donation theft case

मनीष यादव को टिन्नू यादव का भतीजा बताया जा रहा है. ये भी गणना प्रक्रिया में शामिल था. तो वहीं उसके पास से भी रकम मिलने की बात कही जा रही है. तो दूसरी ओर अविनाश शुक्ला के साथ ही गणना इंचार्ज सुभाष श्रीवास्तव की भी भूमिकाओं की जांच की जा रही है. करुणेश पांडेय और रमाशंकर मिश्र पर अनुकल्प व लवकुश के साथ कथित साजिश में शामिल रहने के आरोप लगे हैं. मामले की जांच जारी है.

इन धाराओं में दर्ज हुआ है मामला

आरोपियों के खिलाफ पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धाराएं 305, 306, 316(5), 317(4), 317(5), 61, 3(5) तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 13(1)(a) के तहत केस दर्ज किया गया है. दर्ज एफआईआर में लिखा गया है कि प्रारंभिक जांच में मिले इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों, वित्तीय अभिलेखों के साथ ही अन्य दस्तावेजों के आधार पर आरोपियों के खिलाफ आपराधिक विश्वासघात, आपराधिक षड्यंत्र, गबन, चोरी और अन्य संबंधित अपराधों की जांच जरूरी है. डीएसपी आशुतोष तिवारी को मामले की विवेचना सौंपी गई है. इस सम्बंध में पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई होगी.

गिरफ्तार आरोपियों को मिली थी ये जिम्मेदारी

अनुकल्प मिश्रा जो कि लवकुश मिश्रा का जीजा है और अनिल मिश्रा का रिश्तेदार. इसकी ड्यूटी चढ़ावा गणना में लगती थी और इसके घर से चोरी की रकम बरामद हुई थी.

रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू जो कि चंपत राय का करीबी बताया जा रहा है. इसका मंदिर की हर व्यवस्था में हस्ताक्षेप रहता था और गणना प्रक्रिया की भी निगरानी करता था. गणना कक्ष की चाबी इसके पास ही रहती थी. घटना में इसका अहम किरदार बताया जा रहा है.

लवकुश मिश्रा जो कि अनिल मिश्र का रिश्तेदार है और अनुकल्प का साला है. चढ़ावा गणना में इसकी ड्यूटी लगती थी. इसके भी घर से चोरी की रकम बरामद हुई थी.

मनीष यादव जो कि टिन्नू यादव का भतीजा है औऱ गणना प्रक्रिया में ये शामिल रहता था. चोरी की रकम इसके पास से बरामद हुई थी.

अविनाश शुक्ला की भी ड्यूटी गणना में लगती थी और इसके बैंक खाते से पांच लाख रुपये बरामद होने की बात सामने आ रही है.

सुभाष श्रीवास्तव जो कि गणना इंचार्ज था. गणना की पूरी प्रक्रिया इसकी देख रेख में होती थी.

करुणेश पांडेय को अनुकल्प व लवकुश के साथ पूरी साजिश में शामिल पाए जाने का दोषी पाया गया है.

रमाशंकर मिश्र भी अनुकल्प व लवकुश के साथ पूरी साजिश में शामिल रहे.

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