Halshashthi Vrat: संतान की दीर्घायु के लिए हरछठ व्रत…जानें महत्व और पूजा विधि

September 1, 2026 by No Comments

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Halshashthi Vrat: भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की षष्ठी को हलषष्ठी व्रत मनाया जाता है. इसी दिन भगवान श्री कृष्ण के बड़े भाई बलरामजी का जन्म हुआ था. इसलिए इस दिन को हरछठ, ललही छठ भी कहा जाता है.

चूंकि हल बलरामजी का प्रिय शस्त्र है, इसीलिये उन्हे हलधर और उनकी जयंती के पर्व को ‘हल षष्ठी’ (Halshashthi) कहा जाता हैं। इस दिन महिलाएं संतान की उम्र लम्बी होने के लिए ये व्रत रखती हैं. ये व्रत खासकर पुत्रों के लिए किया जाता है. हालांकि कई माताएं अपनी बेटियों के लिए भी इस व्रत को करती हैं. माना जाता है कि इस व्रत को करने वाली स्त्रियों की संतानें रोगमुक्त होती हैं और कभी भी कोई संकट नहीं आता. इस बार यह व्रत 2 सितम्बर को किया जाएगा.

इस व्रत की खास बात ये है कि इस दिन खेत में पैदा होने वाले किसी अन्न और साग-सब्जी की सेवन नहीं किया जाता है बल्कि तालाब या समुद्र से निकली चीजों का सेवन किया जाता है. यानी नमक और पानी, मखाना, सिंघाड़ा आदि का सेवन कर सकते हैं. तो वहीं भैंस के दूध-दही का सेवन कर सकते हैं. गाय के दूध-दही का सेवन नहीं कर सकते.

पूजाविधि

आचार्य बताते हैं कि हरछठ वाले दिन सुबह स्नानादि से निवृत्त होकर साफ-सुथरे वस्त्र धारण करें। फिर पूजा के लिये गोबर लेकर आयें और उससे जमीन लीप कर एक तालाब की आकृति बनायें। तत्पश्चात झरबेरी, अमलतास और पलाश की एक-एक ड़ाली को बाँधकर एक हरछठ बनायें। फिर उस हरछठ को इस तालाब में झरबेरी, ताश (अमलतास ) तथा पलाश की एक-एक शाखा बांधकर बनाई गई ‘हरछठ’ को तालाब में गाड़ दें। इसके बाद इनका पूजन करें।

इसकी पूजा में सात अनाज चढ़ाने की परम्परा हैं। सात अनाज में गेहूं, जौ, चना, मूंग, मक्का धान और अरहर लें। इन सात अनाजों को चढ़ाने के पश्चात हरी कजरियां, धूल, होली दहन की राख, होली की आग पर भुने होरहा (भुने हुए बूटे) और जौ की बालें अर्पित करें. तालाब में गाड़ दी गई हरछठ के पास आभूषण और हल्दी का रंगा हुआ कपड़ा रखें. इसके बाद भैंस के दूध से बने मक्खन से हवन करें। ध्यान रहे इस दिन गाय के दूध से बनी कोई चीज काम न लें। हवन के बाद हल छठ की कथा कहें या सुनें। हालांकि इस व्रत में पूजन विधि को परम्परागत तरीके से भी किया जा सकता है.

DISCLAIMER: यह लेख धार्मिक मान्यताओं व धर्म शास्त्रों पर आधारित है। हम अंधविश्वास को बढ़ावा नहीं देते। पाठक धर्म से जुड़े किसी भी कार्य को करने से पहले अपने पुरोहित या आचार्य से अवश्य परामर्श ले लें। KhabarSting इसकी पुष्टि नहीं करता।)

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