Halshashthi Vrat katha: ग्वालिन को मिला झूठ बोलने का फल…पढ़ें हलषष्ठी व्रत कथा-Video

September 1, 2026 by No Comments

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Halshashthi Vrat katha: भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की षष्ठी को हलषष्ठी व्रत मनाया जाता है. इस व्रत को हरछठ, ललही छठ भी कहा जाता है. हल षष्ठी व्रत को लेकर एक कथा प्रचलित है। मान्यता है कि प्राचीन काल में एक ग्वालिन थी। वह गर्भवती थी और उसका प्रसवकाल निकट आ रहा था। एक ओर जहां वह प्रसव पीड़ा की वजह से परेशान थी तो दूसरी ओर उसका मन दूध-दही बेचने को कर रहा था।

उसके मन में विचार आया कि यदि प्रसव हो गया तो गौ-रस यूं ही पड़ा रह जाएगा और खराब हो जाएगा। इस पर उसने दूध-दही के घड़े सिर पर रखकर उसे बेचने के लिए निकल पड़ी, लेकिन कुछ ही दूर पहुंचने पर उसे असहनीय प्रसव पीड़ा होने लगी। इस पर वह एक झरबेरी की आड़ में चली गई और एक बच्चे को जन्म दे दिया। इसके बाद वह बच्चे को वहीं छोड़कर पास के गांवों में दूध-दही बेचने चली गई।

संयोग से उस दिन हल षष्ठी थी। गाय-भैंस के मिले हुए दूध को केवल भैंस का दूध बताकर उसने सीधे-सादे गांव वालों को बेच दिया। उधर एक किसान खेत में हल जोत रहा था और पास ही ग्वालिन का बच्चा झरबेरी के नीचे लेटा हुआ था। अचानक किसान के बैल भड़क गए और हल का फल उछल कर बच्चे के शरीर में घुस गया, जिससे बच्चे की मौके पर ही मौत हो गई। इस घटना से किसान बहुत दुखी हुआ। फिर भी उसने हिम्मत और धैर्य से काम लिया। उसने झरबेरी के कांटों से ही बच्चे के चीरे हुए पेट में टांके लगाए और फिर उसे वहीं छोड़कर चला गया।

कुछ देर बाद ग्वालिन दूध बेचकर वहां पहुंची तो जैसे ही उसने अपने बच्चे की दशा देखी वह रोने लगी और बहुत दुखी हुई। इसी के साथ वह यह भी समझ गई कि उसके गलत कार्यों का वजह से ही उसके बच्चे का ये हाल हुआ है। वह मन ही मन अपने किए कर्मों को कोस रही थी। कह रही थी कि भैंस के दूध को गाय का दूध बताकर महिलाओं को बेच दिया और उनका धर्म भ्रष्ट कर दिया।

अब मुझे प्रायश्चित करना होगा। इसके तुरंत बाद ही उसी गांव में पहुंच गई जहां उसने भैंस का दूध बेचा था। वह घूम-घूम कर अपने किए गलत कार्य को लोगों को बताने लगी। इस पर व्रती महिलाओं ने उसे माफ कर दिया। कई महिलाओं ने उसे आशीर्वाद भी दिया। इसके बाद रोते-रोते जब वह झरबेरी के पेड़ के पास पहुंची तो उसका बेटा जीवित अवस्था में लेटा हुआ मिला। इसके बाद से उसने कभी भी झूठ न बोलने का निश्चय किया। कथा के अंत में हलषष्ठी माता की जय जरूर बोलें.

 

DISCLAIMER:यह लेख धार्मिक मान्यताओं व धर्म शास्त्रों पर आधारित है। हम अंधविश्वास को बढ़ावा नहीं देते। पाठक धर्म से जुड़े किसी भी कार्य को करने से पहले अपने पुरोहित या आचार्य से अवश्य परामर्श ले लें। KhabarSting इसकी पुष्टि नहीं करता।)

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