Jivitputrika Vrat: घाट पर महिलाओं ने की अस्ताचलगामी सूर्य देव की पूजा…संतान की दीर्घायु की प्रार्थना- Video
Jivitputrika Vrat: आश्विनी कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि यानी पितृपक्ष के दौरान पड़ने वाली अष्टमी तिथि को जीवित्पुत्रिका व्रत रखा जाता है. आज इस व्रत को धूमधाम से महिलाओं ने मनाया. घाट पर अस्ताचलगामी सूर्य देव की आराधना कर संतान की दीर्घायु की कामना की. इस मौके पर कानपुर से लेकर लखनऊ और प्रदेश भर में गंगा व नदियों के घाटों पर बड़ी संख्या में महिलाएं पहुंचीं और विधि-विधान से पूजा की.
बता दें कि जीवित्पुत्रिका व्रत को जीयुतिया व्रत भी कहते हैं. महिलाएं संतान की दीर्घायु और जीवन रक्षा के लिए यह व्रत करती हैं. इस व्रत का माताओं के बीच बहुत ही महत्व है. यह व्रत अधिकांश तौर पर पूर्वांचल के इलाकों में प्रचलित है. इस दिन व्रती महिलाएं सूर्यदेव की पूजा करती हैं.
यह व्रत दिन-रात यानी 24 घंटे निर्जला रहा जाता है. किसी नदी के किनारे शाम को महिलाएं विधि-विधान से पूजा करती हैं और सोने या चांदी की ज्युतिया को धागे में पिरोकर गले में माले की तरह धारण करती हैं. यह व्रत खासतौर पर बेटे की दीर्घायु के लिए किया जाता है. मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने वाली महिलाएं चाकू का इस्तेमाल नहीं करतीं. यानी सब्जी आदि नहीं काटती हैं. माताएं व्रत रखकर पुत्र की दीर्घायु, आरोग्य और जीवन में सफल होने के लिए रखती हैं.
इस व्रत में उड़द की खड़ी दाल का बहुत ही महत्व है. मान्यता है कि यही दाल अष्टमी के दिन भोर में निगल कर व्रती व्रत रखती हैं और 24 घंटे बाद यानी नवमी को व्रत का पारण किया जाता है. सप्तमी की शाम को भी महिलाएं पूरी तरह से सात्विक भोजन करती हैं. मान्यता है कि जिन महिलाओं की संतान होती है और जीवित नहीं रहती, अगर वो ये व्रत करती हैं तो उनकी संतान जीवित रहने लगती हैं. इसकी कथा महाभारत काल के पांडव और भगवान श्रीकृष्ण के जुड़ी है.