LU:मेस फीस मामले में छात्रों और लखनऊ विश्वविद्यालय के बीच बढ़ी तकरार, स्टुडेंट्स बोले गर्मी की छुट्टी की वजह से हुई परीक्षा में देरी, NAAC टीम आने के पहले ही देनी चाहिए थी नोटिस, विश्वविद्यालय ने कहा होगी कार्यवाही, देखें आदेश
लखनऊ। मेस फीस मामले को लेकर लखनऊ विश्वविद्यालय और छठे सेमेस्टर के छात्रों के बीच तकरार बढ़ती जा रही है। दोपहर में जहां छात्रों के विरोध प्रदर्शन और धरना करने के बाद लखनऊ प्रशासन द्वारा उन पर कार्यवाही करने को लेकर आदेश जारी कर दिया गया है तो वहीं छात्रों ने गलत तरीके से ली जा रही मेस फीस के मामले में तर्क देते हुए कहा है कि परीक्षा में देरी गर्मी की छुट्टी की वजह से हुई है। इसी के साथ आक्रोशित छात्रों ने ये भी कहा है कि जब मेस की फीस लेनी थी तो NAAC टीम के आने के पहले ही नोटिस जारी कर देते, टीम के जाने के तुरंत बाद ही इस सम्बंध में क्यों बताया गया।
छात्रों ने विश्वविद्यालय पर आरोप लगाते हुए कहा कि परीक्षा तिथि कोर्स पूरा ना होने कि वजह से बढ़ाई गई थी, हम छात्रों के कहने पर नहीं। तो वहीं गर्मी की छुट्टी की वजह से भी परीक्षा में देरी हुई है। जब सभी कामों के लिए विश्वविद्यालय खुला था तो कक्षाएं क्यों नहीं संचालित की गईं। अगर गर्मी में छुट्टी के दौरान भी क्लासेस लगती तो, कोर्स पूरा हो जाता। इसी के साथ छात्रावास में रहने वाले छात्रों ने कहा कि गर्मी की छुट्टी में हम घर भी नहीं जा सके क्योंकि लाइब्रेरी खुली थी और असाइन्मेंट जमा हो रहे थे।
इसी के साथ छात्रों ने ये भी तर्क दिया कि अभी तक तो इंटरनल एग्जाम हुए हैं तो भला सेमेस्टर एग्जाम कैसे हो सकते थे। इसी के साथ छात्रों ने ये भी तर्क दिया है कि सभी विश्वविद्यालयों के लिए भी कोरोना था, तो वहां परीक्षाएं लेट नहीं हुई, फिर लखनऊ विश्वविद्यालय में ही परिक्षाएं लेट क्यों हुईं। अन्य विश्वविद्यालयों के तो रिजल्ट भी घोषित हो चुके हैं। इसी के साथ आक्रोशित छात्रों ने ये भी कहा कि अगर विश्वविद्यालय को मेस की फीस लेनी थी तो NAAC टीम के आने से पहले भी इसका नोटिस जारी कर सकते थे, आखिर नैक टीम के जाने के तुरंत बाद ही इस मामले में नोटिस क्यों जारी किया गया। बता दें कि विश्वविद्यालय का कहना है कि नियमानुसार मेस की फीस 11 महीने की ली जाती है, लेकिन विद्यार्थी केवल 10 महीने की ही फीस दे रहे हैं और गलत तरीके से विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं, तो वहीं विद्यार्थियों का कहना है कि उनसे गलत तरीके से फीस ली जा रही है।
देखें क्या जारी किया गया है आदेश
