Sharad Purnima-2022: शरद पूर्णिमा 9 अक्टूबर को, हाथ में गेहूं के 13 दाने लेकर अवश्य सुनें कथा, करें इस तरह “प्रार्थना”, नहीं बासी मानी जाती है इस दिन की खीर, जानें ये बड़ी वजह, पढ़ें कथा

October 8, 2022 by No Comments

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शरद पूर्णिमा विशेष। आश्विन मास की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है, इस बार यह पूर्णिमा 9 अक्टूबर दिन रविवार को पड़ रही है। इस दिन न केवल मंदिरों बल्कि घरों में भी परम्परागत रूप से विधि-विधान से लोग अपने आराध्य देव की पूजा-अर्चना करते हैं और कथा सुनते हैं। मान्यता है कि हिंदू धर्म के इस प्रमुख त्योहार पर व्रत करके कथा सुनने से पुण्य की प्राप्ति होती है। मान्यता है कि कथा सुनने से पहले हाथ में गेहूं के 13 दाने ले लेने चाहिए। कहते हैं कि इस दिन माताएं अपनी संतान की मंगल कामना के लिए व्रत भी रखती हैं।

जाने चंद्रमा को कब दिया जाता है आर्घ्य
सुशील कृष्ण शास्त्री बताते हैं कि मान्यता है कि पूर्णिमा का व्रत करने के बाद कथा सुननी चाहिए। कथा सुनने से पहले एक लोटे में जल तथा गिलास में गेहूं, पत्ते के दोनों में रोली तथा चावल रखकर कलश की वंदना करके दक्षिणा चढाएं, इसके बाद तिलक करने के बाद गेंहूं के 13 दाने हाथ में लेकर कथा सुनें। फिर गेहूं के गिलास पर हाथ फेरकर तो ब्रह्माणी के पांव स्पर्श करने के बाद गेहूं का गिलास उनको दे दें और लोटे के जल का रात में चंद्रमा को अर्घ्य दे दें।

संतानों के लिए भी किया जाता है इस दिन व्रत
शरद पूर्णिमा से ही कार्तिक स्नान, व्रत की शुरुआत हो जाती है। माताएं अपनी संतान की मंगलकामना के लिए इस दिन देवी-देवताओं की पूजन करती हैं। इस दिन चंद्रमा धरती के बहुत नजदीक होता है। कार्तिक का व्रत भी इसी दिन से शुरू हो जाता है। विवाह होने के बाद इसी दिन से पूर्णिमा के व्रत के नियम की शुरूआत करना चाहिए।

मंदिरों में इस तरह होती है पूजा
शरद पूर्णिमा पर मंदिरों में भी विशेष पूजा का विधान हिंदू शास्त्रों में दिया गया है। इस दिन सुबह ही स्नान आदि के बाद अपने आराध्य देव को सुंदर परिधान पहनाकर वस्त्र आभूषण आदि पहनाने चाहिए। इसके बाद गंध, अक्षत, पुष्प, दीप, नैवेद्य, ताम्बूल, सुपारी, दक्षिणा आदि से उनका पूजन करें। रात में गाय के दूध से बनी खीर में घी तथा चीनी मिलाकर आधी रात को भगवान को भोग लगाएं, इसके बाद चंद्रमा की पूजा करें, खीर का नैवेद्य चढ़ाएं, इसके बाद रात में खीर से भरा बर्तन खुली चांदनी में रखकर दूसरे दिन इसका भोजन करें और प्रसाद वितरित करें। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण की पूजा करने का विधान शास्त्रों में बताया गया है।

नहीं बासी होती है इस दिन की खीर

भारतीय ज्योतिष अनुसन्धान संस्थान के निदेशक आचार्य विनोद कुमार मिश्र बताते हैं कि आश्विन मास की पूर्णिमा को ‘शरद पूर्णिमा’ कहते हैं। इस रात को चन्द्रमा अपनी पूर्ण कलाओं के साथ पृथ्वी पर शीतलता, पोषक शक्ति एवं शांतिरूपी अमृतवर्षा करता है। विजयादशमी से शरद पूर्णिमा तक चन्द्रमा की चाँदनी में विशेष हितकारी रस, हितकारी किरणें होती हैं। इन दिनों चन्द्रमा की चाँदनी का लाभ उठाना, जिससे वर्षभर आप स्वस्थ और प्रसन्न रहें। अश्विनी कुमार देवताओं के वैद्य हैं। शरीर की जो भी इन्द्रियाँ शिथिल हो गयी हों, उनको पुष्ट करने के लिए चन्द्रमा की चाँदनी में खीर रखें और भगवान को भोग लगाकर अश्विनी कुमारों से प्रार्थना करें कि ‘हमारी इन्द्रियों का बल-ओज बढ़ायें ।’ फिर वह खीर खा लें। खीर दूध, चावल, मिश्री, चाँदी, चन्द्रमा की चाँदनी – इन पंचश्वेतों से युक्त होती है, अतः सुबह बासी नहीं मानी जाती।


यहां पढ़ें कथा

DISCLAIMER:यह लेख धार्मिक मान्यताओं व धर्म शास्त्रों पर आधारित है। हम अंधविश्वास को बढ़ावा नहीं देते। किसी भी धार्मिक कार्य को करते वक्त मन को एकाग्र अवश्य रखें। पाठक धर्म से जुड़े किसी भी कार्य को करने से पहले अपने पुरोहित या आचार्य से अवश्य परामर्श ले लें। KhabarSting इसकी पुष्टि नहीं करता।)