Bhai Dooj 2022: भाई-बहन मिलकर पहले करें यम, चित्रगुप्त आदि की पूजा, भाई के दीर्घायु के लिए इस तरह अवश्य करें प्रार्थना, देखें पर्व से जुड़ी 5 महत्वपूर्ण जानकारी, पढ़ें दो कथा

October 26, 2022 by No Comments

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भाई दूज स्पेशल। कार्तिक शुक्ल द्वितीया तिथि को भाई दूज का पर्व हर साल मनाया जाता है। इस बार 26 अक्टूबर, दिन बुधवार को भाई-बहन के पवित्र प्रेम का प्रतीक यह त्योहार मनाया जाएगा। मान्यता है कि इस दिन बहन के घर भोजन करने से भाई की उम्र बढ़ती है। इस लेख में भारतीय ज्योतिष अनुसन्धान संस्थान के निदेशक आचार्य विनोद कुमार मिश्र इस पर्व का महत्व इस प्रकार है-

धर्म ग्रंथों के अनुसार, कार्तिक शुक्ल द्वितीया के दिन ही यमुना ने अपने भाई यम को अपने घर बुलाकर सत्कार करके भोजन कराया था। इसीलिए इस त्योहार को यम द्वितीया के नाम से भी जाना जाता है। तब यमराज ने प्रसन्न होकर उनको यह वर दिया था कि जो व्यक्ति इस दिन यमुना में स्नान करके यम का पूजन करेगा, मृत्यु के पश्चात उसे यमलोक में नहीं जाना पड़ेगा। सूर्य की पुत्री यमुना समस्त कष्टों का निवारण करने वाली देवी स्वरूपा है।

उनके भाई मृत्यु के देवता यमराज हैं। यम द्वितीया के दिन यमुना नदी में स्नान करने और यमुना और यमराज की पूजा करने का बड़ा माहात्म्य माना जाता है। इस दिन बहेन अपने भाई को तिलक कर उसकी लंबी उम्र के लिए हाथ जोड़कर यमराज से प्रार्थना करती है। स्कंद पुराण में लिखा है कि इस दिन यमराज को प्रसन्न करने से पूजन करने वालों को मनोवांछित फल मिलता है। धन-धान्य, यश एवं दीर्घायु की प्राप्ति होती है।

भाई की उम्र बढ़ानी है तो करें यमराज से प्रार्थना। इस दौरान मन एकाग्र रखें।

सबसे पहले बहन-भाई दोनों मिलकर यम, चित्रगुप्त और यम के दूतों की पूजा करें तथा सबको अर्घ्य दें। बहन भाई की आयु-वृद्धि के लिए यम की प्रतिमा का पूजन करें। प्रार्थना करें कि मार्कण्डेय, हनुमान, बलि, परशुराम, व्यास, विभीषण, कृपाचार्य तथा अश्वत्थामा इन आठ चिरंजीवियों की तरह मेरे भाई को भी चिरंजीवी कर दें।

इसके बाद बहन भाई को भोजन कराती हैं। भोजन के बाद भाई को तिलक लगाती है। इसके बाद भाई यथाशक्ति बहन को भेंट देता है। जिसमें स्वर्ण,आभूषण, वस्त्र आदि प्रमुखता से दिए जाते हैं। लोगों में ऐसा विश्वास भी प्रचलित है कि इस दिन बहन अपने हाथ से भाई को भोजन कराए तो उसकी उम्र बढ़ती है और उसके जीवन के कष्ट दूर होते हैं।

पढ़ें कथा

गांवों में प्रचलित कथा
एक सताना बहन थीं। उनके सात भाई थे। भाई परदेश कमाने चले गए। तो सात भाभियों के बीच में सताना बहन अकेली रह गईं। इस पर सातों भाभियों ने सताना को दुख देना शुरू कर दिया, जबकि भाईयों ने सताना को लाड प्यार से पाला था। भाइयों के जाते ही सताना बहन से भाभियों ने काम कराना शुरू कर दिया और दुख देना शुरू कर दिया, जबकि भाईयों ने कहा था कि सताना बहन से कोई काम न कराना। एक दिन भाभियों ने सताना को धान दे दिया और कहा कि बिना ओखली के कूटकर चावल निकाल लाओ। इस पर दुखी होकर सताना जंगल चली गई और एक पेड़ के नीचे बैठकर रोने लगीं और भाईयों को याद करने लगीं। इतने में वहां से चिड़िया निकली और सताना से रोने का कारण पूछा तो सताना ने पूरी बात बता दी। इस पर चिड़ियों ने पूरा धान से चावल निकाल दिया और सताना खुश होकर घर चली गईं। इसके बाद भाभियों ने कहा कि जंगल से लकड़ी काट लाओ और लकड़ी का बोझा बिना रस्सी से बांधकर लाना। इस पर सताना की मदद सांप ने की और वह लकड़ी की गठ्ठर घर ले आईं। इस पर भाभियों को बड़ा आश्चार्य हुआ। इसके बाद भाभियों ने कहा कि चलनी में पानी भर लाओ। इस पर मछलियों ने मदद की और सताना घर पर पानी भी ले आईं। इसके बाद काला कम्बल भाभियों ने दिया और कहा कि इसको सफेद कर लाओ। इस पर जंगल में जाकर सताना कम्बल धोने लगीं ताकि कम्बल सफेद हो जाए। इतने में उधर से उनके भाई निकले तो सताना का ये हाल देखकर क्रोधित हो उठे। तो वहीं सताना भी अपने भाइयों को देखकर रोने लगीं। इस पर भाइयों ने अपनी बहन को जांघ में चीरकर भर लिया और घर पहुंचकर अपनी पत्नियों से बहन के बारे में पूछा। इस पर उनकी पत्नियों ने झूठ बोलना शुरू कर दिया और कहा कि खाती होंगी दूध बताशा, झूलती होंगी पालना। अर्थात कहीं घूम रही होंगी। वह भला कोई काम भी करती हैं। इस पर सातो भाई क्रोधित होकर अपनी पत्नियों को जमकर डांटा तो उन्होंने पूरा सच कह दिया और एक-दूसरे पर आरोप लगाने लगीं। इस कहानी से ये स्पष्ट होता है कि भाई अपनी बहन को कितना मानते हैं। गांवों में प्रचलित इस कथा को स्थानीय भाषा में सुनाया जाता है। इसी के साथ कथा खत्म होने पर कहा जाता है कि हे भगवान जिस तरह से सताना को स्नेह व प्यार करने वाला भाई दिया, उसी तरह से सभी बहनों को भाई मिलें। इसी तरह गांवों में तमाम कथाएं प्रचलित हैं।

DISCLAIMER:यह लेख धार्मिक मान्यताओं व धर्म शास्त्रों पर आधारित है। हम अंधविश्वास को बढ़ावा नहीं देते। किसी भी धार्मिक कार्य को करते वक्त मन को एकाग्र अवश्य रखें। पाठक धर्म से जुड़े किसी भी कार्य को करने से पहले अपने पुरोहित या आचार्य से अवश्य परामर्श ले लें। KhabarSting इसकी पुष्टि नहीं करता।)