अरविंद केजरीवाल ने मोहन भागवत से पूछे ये 5 सवाल…बताई CM की कुर्सी छोड़ने की वजह, हुए भावुक-Video
Arvind Kejriwal: दिल्ली के मुख्यमंत्री के पद से इस्तीफा देने के बाद आम आदमी पार्टी (AAP) प्रमुख अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) पहली बार जनता के बीच रविवार यानी 22 सितंबर को जनता के बीच पहुंचे. दिल्ली के जंतर-मंतर पर ‘जनता की अदालत’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया था. इस मौके पर उन्होंने लोगों को संबोधित करते हुए भाजपा पर हमला बोला और आप सरकार की उपलब्धियों को एक-एक कर जनता के सामने रखा.
इसी के साथ ही उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर भी निशाना साधा और कहा कि आरएसएस वाले कहते हैं हम राष्ट्रवादी हैं, हम देश भक्त है. मैं पूरे सम्मान के साथ मोहन भागवत (Mohan Bhagwat) से पांच प्रश्न पूछना चाहता हूं.
इसलिए दिया इस्तीफा
जनता की अदालत में अरविंद केजरीवाल ने लोगों को सम्बोधित करते हुए खुद बताया कि उन्होंने मुख्यमंत्री की कुर्सी क्यों छोड़ी. इस दौरान वह भावुक भी दिखाई दिए और नम आंखों को पोछते हुए भी नजर आए. केजरीवाल ने कहा, ‘मैंने इसलिए इस्तीफा दिया, क्योंकि मुझे सीएम की कुर्सी की भूख नहीं है. मुझे पैसे नहीं कमाने हैं. हम देश की राजनीति बदलने आए थे. मैं नेता नहीं हूं, मेरी मोटी चमड़ी नहीं है. भाजपा वाले जब मुझे चोर और भ्रष्टाचारी कहते हैं तो मुझे फर्क पड़ता है, दुःख होता है. मैं आज इसलिए यहां आया हूं, क्योंकि मैं अंदर से पीड़ित और दुःखी हूं. थोड़े दिन में मुख्यमंत्री आवास भी छोड़ दूंगा. आज मेरे पास घर भी नहीं है, लेकिन लोगों का प्यार खूब मिला है. दिल्ली के कई लोगों का मैसेज आया कि आप मेरे घर में आकर रहो.’
केजरीवाल ने मोहन भागवत के पूछे ये प्रश्न
दिल्ली के पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल ने सवाल किया कि जिस तरह मोदी जी देशभर में लालच देकर या ED, CBI का डर दिखाकर दूसरी पार्टी के नेताओं को तोड़ रहे हैं, सरकारें गिरा रहे हैं. क्या ये देश के लोकतंत्र के लिए सही है? क्या आप नहीं मानते ये भारतीय जनतंत्र के लिए हानिकारक है?
देशभर में सबसे ज्यादा भ्रष्टाचारी नेताओं को मोदी ने अपनी पार्टी में शामिल करवाया. जिन नेताओं को कुछ दिन पहले उन्होंने खुद सबसे भ्रष्टाचारी बोला. जिन नेताओं को अमित शाह जी ने भ्रष्टाचारी बोला. कुछ दिन बाद उन्हें बीजेपी में शामिल करवा लिया? क्या आपने ऐसी बीजेपी की कल्पना की थी? क्या इस प्रकार की राजनीति पर आपकी सहमति है?
बीजेपी आरएसएस की कोख से पैदा हुई है. कहा जाता है कि ये देखना आरएसएस की जिम्मेदारी है कि बीजेपी पथभ्रष्ट न हो. क्या आप आज की बीजेपी के कदमों से सहमत हैं? क्या आपने कभी मोदी जी से ये सब न करने के लिए कहा?
चुनाव के दौरान जेपी नड्डा ने कहा कि बीजेपी को आरएसएस की जरूरत नहीं है. आरएसएस बीजेपी की मां समान है. क्या बेटा इतना बड़ा हो गया है कि मां को आंखें दिखाने लगा है? जिस बेटे को पाल पोसकर कर बड़ा किया, प्रधानमंत्री बनाया. आज वो अपनी मातातुल्य संस्था को आंखें दिखा रहा है. जब नड्डा जी ने ये कहा तो आपको दुख नहीं हुआ? क्या आरएसएस के हर कार्यकर्ता को दुख नहीं हुआ?
आरएसएस बीजेपी ने मिलकर ये कानून बनाया था कि 75 वर्ष का होने पर किसी भी व्यक्ति को रिटायर होना पड़ेगा. इस कानून के तहत आडवाणी जी और मुरली मनोहर जोशी जी जैसे बहुत बड़े नेताओं को भी रिटायर कर दिया गया. अब अमित शाह जी कह रहे हैं कि वो रूल मोदी जी पर लागू नहीं होगा. क्या आप इससे सहमत हैं कि जो रूल आडवाणी जी पर लागू हुआ वो मोदी जी पर लागू नहीं होगा?