दो साल की उम्र में तेजाब से हमला और खो दी दोनों आंखें…अब CBSE में किया टॉप; बनना है IAS-Video
CBSE Topper 2025 Acid Attack Survivor: जरा सोच कर देखिए कि कोई बच्ची मात्र दो साल की है और उस पर तेजाब (Acid ) से हमला कर दिया गया हो और वह चेहरा झुलसने की वजह से जोर-जोर से चीख रही हो…व उसकी दोनों आंखें चली गई हों…ये सब सोच कर ही रूह कांप जाती है लेकिन उस मासूम से पूछिए जब उसने उस गहरे दर्द और जख्मों को सहा होगा…फिर बस हमारी आत्मा यही कह उठती है कि आखिर कितनी बुरी ये दुनिया है…लेकिन इसी बुरी दुनिया से लड़कर आगे बढ़ने को ही तो लड़ाका कहते हैं.
जी हां यहां पर एक ऐसी ही लड़ाका यानी हौसलों के पंख लगाकर उड़ने वाली बेटी की बात होने जा रही है जिसने गहरे जख्मों को सहते हुए अपने सपनों को जिंदा रखा और आज वह समाज में अपने माता-पिता का नाम रोशन कर रही है. यहां बात हो रही है चंडीगढ़ के सेक्टर 26 स्थित ब्लाइंड स्कूल में पढ़ने वाली 12वीं कक्षा की कैफी (Kafi) की जिसने हाल ही में जारी सीबीएसई बोर्ड की परीक्षा में 95.6% अंक के साथ टॉप किया है. इस सफलता के बाद उसके परिवार की खुशी देखते ही बन रही है. कक्षा 10 में भी कैफी ने 95.2 प्रतिशत अंक हासिल किए थे और पहला स्थान प्राप्त किया था.
#WATCH चंडीगढ़: चंडीगढ़ की एसिड अटैक सर्वाइवर 17 वर्षीय कैफ़ी ने CBSE 12वीं में 95.6% अंक प्राप्त किए हैं, वह आईएएस अधिकारी बनना चाहती है।
कैफ़ी ने कहा, “मैं हरियाणा के हिसार की रहने वाली हूं। सीबीएसई बोर्ड के हालिया नतीजों में मैंने 12वीं में 95.6% अंक प्राप्त किए हैं। 10वीं… pic.twitter.com/coXNAe6CTH
— ANI_HindiNews (@AHindinews) May 14, 2025
दिल्ली यूनिवर्सिटी से करना चाहती हैं आगे की पढ़ाई
एसिड अटैक में कैफी (Acid Attack Survivor) की दोनों आंखें चली गईं लेकिन कैफी ने अपने सपने को नहीं मरने दिया. वह लगातार संघर्ष करती हुए आगे बढ़ती रही. अब कैफी का सपना दिल्ली यूनिवर्सिटी से पॉलिटिकल साइंस में ग्रेजुएशन करना है. कैफी बताती हैं कि उन्होंने ऑडियो बुक्स और यूट्यूब से पढ़ाई की.
IAS बनना है सपना
न्यूज एजेंसी एएनआई से बात करते हुए कैफ़ी ने कहा, सीबीएसई बोर्ड के हालिया नतीजों में मैंने 12वीं में 95.6% अंक प्राप्त किए हैं। 10वीं में भी मैंने 95.2% अंक प्राप्त किए थे। मैं हरियाणा के हिसार की रहने वाली हूं। मैं एसिड अटैक पीड़िता हूं और मेरा लक्ष्य आईएएस अधिकारी बनना है।”
माता-पिता और शिक्षकों ने की मदद
कैफी ने आगे बताया कि दृष्टिबाधित लड़की होने के कारण उनके सामने कई चुनौतियां थीं, लेकिन उनके माता-पिता और शिक्षकों ने उनको इन चुनौतियों से निपटने में बहुत मदद की. उन्होंने बताया कि उनकी पढ़ाई का मुख्य सोर्स ऑडियो और पाठ्यपुस्तकें थीं. वह पढ़ने के साथ ही ऑडियो सुनकर तैयारी करती थीं. ऑडियो सुनकर तैयारी करने में उनको खासा मदद मिली.
पारिवारिक रंजिश में हुआ था हमला
कैफी के पिता पवन ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि आज कैफी की उम्र 17 साल है. वह जब दो साल की थी तब पड़ोसियों ने पारिवारिक रंजिश के चलते उसके ऊपर तेजाब से हमला कर दिया था जिससे उसकी दोनों आंखों की रोशनी हमेशा के लिए चली गई. कैफी का बहुत इलाज कराया. कई सालों तक दिल्ली के एम्स में इलाज चला लेकिन आंखें वापस नहीं आ सकीं. 2016 में उसने स्कूल में उसे दाखिला दिलाया गया और फिर पढ़ाई में उसकी लगन और मेहनत देखकर 2018 में उसके माता-पिता बेहतर शिक्षा के लिए उसे लेकर चंडीगढ़ आ गए.
#WATCH कैफ़ी के पिता पवन ने कहा, “मैं बहुत खुश हूं मेरे बेटी ने बहुत अच्छा प्रदर्शन किया है। उसने 10वीं में भी टॉप किया है… जब वह 2 साल की थी, तो हमारे पड़ोसियों ने उस पर तेज़ाब डाल दिया था। उस घटना के बाद वह अंधी हो गई…मैं एक कॉन्ट्रैक्ट वर्कर हूं और यहां ऑटोरिक्शा भी चलाता… https://t.co/fgwmk18l6S pic.twitter.com/irioB2Iaqe
— ANI_HindiNews (@AHindinews) May 14, 2025
चलाते हैं ऑटो रिक्शा
न्यूज एजेंसी एएनआई से बात करते हुए कैफ़ी के पिता पवन ने कहा, “मैं बहुत खुश हूं मेरे बेटी ने बहुत अच्छा प्रदर्शन किया है। उसने 10वीं में भी टॉप किया था. मैं एक कॉन्ट्रैक्ट वर्कर हूं और यहां ऑटोरिक्शा भी चलाता हूं.” कैफी की मां सुमन गृहिणी हैं. बता दें कि कैफी के माता और पिता दोनों ही 5वीं पास हैं. कैफ़ी को पहली बार 10 साल की उम्र में दूसरी कक्षा से सीधे कक्षा 6 में प्रवेश दिया गया था. कैफी बताती हैं कि शुरुआत में कक्षा-6 में पढ़ाई करना मुश्किल था, लेकिन मैंने खुद से पढ़ाई की और धीरे-धीरे सब आसान हो गया. अब मैं रोज सुबह-शाम दो से तीन घंटे पढ़ाई करती हूं. मेरा लक्ष्य अब IAS ऑफिसर बनना है.
कैफी की ये कहानी उन सभी छात्रों के लिए किसी प्रेरणा से कम नहीं है जो जरा सी तकलीफ जीवन में आने पर हिम्मत हार जाते हैं.
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