Chhath Puja 2022: नहाय-खाय के साथ छठ महापर्व का हुआ शुभारम्भ, 29 को खरना में देखें क्या खाएंगी व्रती, जानें सूर्यास्त व सूर्योदय का सही समय और देखें 30 अक्टूबर को कितने बजे से लग रही है षष्ठी तिथि, वीडियो
छठ महापर्व विशेष। कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि पर छठी मैया की पूजा की परम्परा सदियों से चली आ रही है। प्रत्येक वर्ष लोक आस्था के महापर्व छठ को इस दिन मनाया जाता है। कहा जाता है कि छठ पूजा करने वाले भक्तों को सुख-समृद्धि, धन, वैभव, यश और मान-सम्मान की प्राप्ति होती है। कहते हैं जो महिलाएं यह व्रत रखती हैं उनकी संतानों को दीर्घायु और सुख समृद्धि प्राप्त होती है। इसके साथ यह व्रत करने से निरोगी जीवन का आशीर्वाद भी मिलता है।
आचार्य पंडित रवि शास्त्री बताते हैं कि आस्था का यह महापर्व 4 दिनों तक चलता है। इस पर्व में 36 घंटे निर्जला व्रत रख कर सूर्य देव और छठी मैया की पूजा की जाती है और उन्हें अर्घ्य दिया जाता है। यह व्रत मनोकामना पूर्ति के लिए भी किया जाता है कार्तिक माह की चतुर्थी तिथि से नहाय-खाय से ही इस व्रत की शुरुवात हो जाती है। इसके बाद दूसरे दिन खरना और तीसरे दिन डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। चौथे दिन उगते सूर्य को अर्घ्य देने के बाद व्रत का पारण किया जाता है। इस बार यह पर्व 28 अक्टूबर से शुरू हो रहा है, जिसका समापन 31 अक्टूबर को सुबह होगा।
28 को मनाया गया छठ पूजा का पहला दिन
नहाय- खाए के साथ 28 अक्टूबर 2022 से छठ पर्व की शुरूआत हो गई है। मान्यता है कि कार्तिक शुक्ल पक्ष कि चतुर्थी तिथि को छठ महापर्व कि पहली परंपरा का निर्वाह किया जाता है। इस परंपरा के अनुसार सबसे पहले घर की सफाई कर उसे शुद्ध किया जाता है। इसके बाद छठव्रती स्नान कर शुद्ध शाकाहारी भोजन ग्रहण कर व्रत की शुरुआत करते हैं। घर के अन्य सभी सदस्य व्रती सदस्यों के भोजन करने के बाद ही भोजन ग्रहण करते हैं। नियम के अनुसार, इस दिन भात, लौकी की सब्जी और दाल ग्रहण किया जाता है और खाने में सिर्फ सेंधा नमक का इस्तेमाल होता है।
छठ पूजा के दूसरे दिन होगा खरना
खरना, 29 अक्टूबर 2022, शनिवार को मनाया जाएगा। दूसरे दिन कार्तिक शुक्ल पंचमी को भक्त दिनभर का उपवास रखते हैं और शाम को भोजन करते हैं। इसे ‘खरना’ कहा जाता है। खरना के प्रसाद के रूप में गन्ने के रस में बने हुए चावल की खीर (रसियाव) के साथ दूध, चावल का पिट्ठा और घी चुपड़ी रोटी बनाई जाती है। इसमें नमक या चीनी का उपयोग नहीं किया जाता है। खीर ग्रहण करने के बाद 36 घंटे का व्रत रखा जाता है।

छठ पूजा का तीसरा दिन
डूबते सूर्य को अर्घ्य: 30 अक्टूबर 2022, रविवार
आचार्य रवि शास्त्री बताते हैं कि कार्तिक शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि छठ पूजा का मुख्य दिन माना जाता है। सायंकाल को पूरी तैयारी और व्यवस्था कर बांस की टोकरी में अर्घ्य का सूप सजाया जाता है और व्रती के साथ परिवार तथा पड़ोस के सारे लोग अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देने घाट की ओर जाते हैं। सभी छठव्रती तालाब या नदी किनारे सामूहिक रूप से अर्घ्य दान संपन्न करते हैं।
छठ पूजा की तिथि
कार्तिक शुक्ल षष्ठी तिथि प्रारंभ: 30 अक्टूबर 2022, सुबह 05:49
कार्तिक शुक्ल षष्ठी तिथि समाप्त: 31 अक्टूबर 2022, सुबह 03:27
सूर्यास्त का समय: सायं 5:37 पर

छठ पूजा का चौथा दिन
उगते सूर्य को अर्घ्य- 31 अक्टूबर 2022, सोमवार
चौथे दिन कार्तिक शुक्ल सप्तमी की सुबह उदीयमान सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। इस दिन सूर्योदय से पहले भक्त पानी में खड़े हो जाते हैं और उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देते हैं। इसके बाद प्रसाद का सेवन करके व्रत का पारण करके सुहागिनें एक-दूसरे को सिंदूर लगाकर सुहाग और संतान के दीर्घायु की कामना करती हैं। इस बार सूर्योदय का समय: प्रातः 06:31 पर है। (सभी तस्वीरें पिछले वर्ष की हैं)
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