जानें दवा कब बन जाती है जहर…? क्या कहती है अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स की ये रिपोर्ट्
Cough Syrup Deaths: जब हम बीमार पड़ते हैं तो हमें खुद को स्वस्थ्य करने के लिए दवा (Medicine) का सहारा लेना पड़ता है लेकिन अगर ये दवा ही हमारी मौत का कारण बनने लगे तो हम कहां जाएं? इस बात ने हाल ही में मध्य प्रदेश और राजस्थान में जेनेरिक खांसी की दवाई पीने के बाद 12 बच्चों की हुई मौत के बाद लोगों की चिंता बढ़ा दी है और अब लोगों का दवाओं पर से भी भरोसा उठता जा रहा है.
हालांकि इस घटना के सामने आने के बाद ड्रग कंट्रोलर ने सिरप के यूज पर तत्काल रोक लगा दी और आगे की जांच के लिए इसको लैब में भेज दिया लेकिन सवाल ये उठता है कि क्या दवाओं को बनाते समय इसकी जांच नहीं की जाती और अगर की जाती है तो फिर ये दवाएं मौत का सौदागर कैसे बन रही हैं?
तो वहीं इस कफ सिरप को पीने के बाद कुछ और बच्चे भी बीमार हुए तो वहीं एक डॉक्टर ने दवा को सही साबित करने की कोशिश की और खुद भी पी लिया तो उनको भी अस्पताल में भर्ती होना पड़ा. ये तो गनीमत रही कि वह समय पर अस्पताल चले गए नहीं तो उनको भी काल के गाल में समाना पड़ता. इसी के बाद से एक बार फिर कफ सिरप की क्वालिटी संदेह के घेरे में है. क्योंकि सरकारी अस्पतालों में बांटे गए इन सिरपों से बच्चों की जिंदगी खतरे में पड़ गई है.
बता दें कि इस तरह की घटना पहली नहीं है. इससे पहले मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में भी बच्चों की मौत की खबरें सामने आई थी. हालांकि राजस्थान सरकार के हेल्थ डिपार्टमेंट ने दवा से मौते होने की खबर के तुरंत बाद ही जांच समिति गठित करने के साथ ही Dextromethorphan Hydrobromide Syrup IP 13.5 mg/5 ml नामक दवा के 20 से अधिक बैचों पर प्रतिबंध लगा दिया. तो आइए इस लेख में आपको बताते हैं कि कैसे सिरप जानलेवा बन जाता है और हमें क्या सावधानी बरतनी चाहिए?
जानें क्या है Dextromethorphan Hydrobromide Syrup?
बता दें कि हाल ही में मध्य प्रदेश और राजस्थान में जेनेरिक खांसी की दवाई पीने बच्चों की मौत के बाद ही राजस्थान सरकार ने Dextromethorphan Hydrobromide Syrup IP 13.5 mg/5 ml नामक दवा के 20 से अधिक बैचों पर प्रतिबंध लगा दिया था और सैंपल जांच के लिए भेज दिए गए थे.
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस सिरप की खोज 1950 के दशक के दौरान हुई थी और इसको कोडीन की आदत डालने वाली दवाओं का एक सुरक्षित विकल्प बताया गया था. इसे खांसी कम करने वाली दवा के तौर पर जाना गया. ज्यादातर सूखी खांसी के दौरान डॉक्टर इसे देते हैं. इसका मुख्य काम है ब्रेन में खांसी पैदा करने वाले संकेतों को रोकना है ताकि मरीजों को इससे राहत मिल सके. इसको केमिकल प्रोसेसिंग करके तैयार किया जाता है, जिसमें डेक्सट्रोमेथॉर्फन हाइड्रोब्रोमाइड एक्टिव कंपाउंड के तौर पर होता है. बच्चे इसे आसानी से पी सकें इसलिए इसे ज्यादातर सिरप के तौर पर दिया जाता है.
क्या सलाह देते हैं एक्सपर्ट?
इस घटना के बाद से ही सोशल मीडिया पर अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स (AAP) और US FDA की तरफ से एक बयान वायरल हो रहा है जिसमें कहा गया है कि 4 साल से कम उम्र के बच्चों को डेक्सट्रोमेथॉर्फन या इसी तरह के ओवर-द-काउंटर सिरप नहीं देना चाहिए. FDA की एक रिपोर्ट सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है जिसमें इस बात का जिक्र किया गया है कि इस तरह के सिरप से सांस लेने की दिक्कत के साथ ही नींद में ज्यादा दबाव हो जाता है और चक्कर या फिर दौरे आने की सम्भावना रहती है. यहां तक कि मौत का कारण भी यह बन सकता है.
तो वहीं कई रिपोर्ट में इसको 2 साल के बच्चों को नहीं देने की सलाह दी गई है. 2 साल से 6 साल के बच्चों को सीमित मात्रा में देने की सलाह दी गई है. तो वहीं 6 साल से बड़े बच्चों को भी इसको देने से पहले डॉक्टरों की सलाह लेने की बात कही गई है. डॉक्टर बताते हैं कि अगर आपको पहले से ही लिवर, किडनी की समस्या या अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्या है तो इसका इस्तेमाल करने से पहले डॉक्टर या विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें.
Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों के विचारों पर आधारित है. इस लेख को मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह अवश्य लें.
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