छिंदवाड़ा के परासिया में जहरीला कफ सिरप पीने से 10 बच्चों की मौत हो गई थी.
इस सिरप की खोज 1950 के दशक के दौरान हुई थी और इसको कोडीन की आदत डालने वाली दवाओं का एक सुरक्षित विकल्प बताया गया था.
बच्चों की मौत के मामलों से जुड़े एक केस में लेप्टोस्पायरोसिस इंफेक्शन पाया गया. फिलहाल इसकी जांच अभी जारी है.