Diwali Katha: दीवाली पर जरूर पढ़ें ये कथा…नहीं तो पूजा रह जाएगी अधूरी !

October 30, 2024 by No Comments

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Diwali Katha: कार्तिक मास की अमावस्या को लक्ष्मी जी की पूजा का वर्णन शास्त्रों में बताया गया है तो वहीं सनातन धर्म में जब भी कोई पूजा पाठ करते हैं तो कथा कहने के भी परम्परा है. मान जाता है कि अगर किसी भी व्रत या पूजा के दौरान सम्बंधित व्रत-पूजा की कथा न पढ़ो तो पूजा अधूरी रह जाती है. इसी तरह दीवाली के लिए भी कहा गया है कि अगर इस मौके पर कथा नहीं पढ़ी या सुनी गई तो पूजा अधूरी ही रह जाती है और माता लक्ष्मी की कृपा नहीं मिलती.

आचार्य सुशील कृष्ण शास्त्री बताते हैं कि ब्रह्मपुराण के अनुसार कार्तिक अमावस्या की अर्धरात्रि में माता लक्ष्मी खुद ही धरती पर आती हैं और प्रत्येक सद्गृहस्थ के घर पर वितरण करती हैं। जो घर साफ व सुंदर तरीके से प्रकाश से सजा होता है वहां अंश रूप में ठहर जाती हैं और गंदे स्थानों की तरफ देखती भी नहीं हैं।

मान्यता है कि दीपावली मनाने से सद्गृहस्थों के घर पर लक्ष्मी जी स्थायी रूप से निवास करती हैं। वास्तव में धनतेरस, नरक चतुर्दशी और महालक्ष्मी पूजन, इन तीनों पर्वों का मिश्रण ही दीपावली है। मान्यता है कि इसी दिन भगवान राम 14 वर्ष का वनवास काटकर व रावण आदि राक्षसों का वध करके अयोध्या लौटे थे। इसीलिए दीपोत्सव मनाया जाता है। इस दिन उत्तर प्रदेश के अयोध्या में दीपों का खास आयोजन किया जाता है। दीपावली को लेकर तीन कथाएं प्रचलित हैं. कहते हैं कि दीपावली के दिन इन तीनों कथाओं को एक बार अवश्य सुनना चाहिए या फिर पढ़ना चाहिए-

पहली कथा- माता लक्ष्मी का भगवान विष्णु से विवाह

यह कथा त्रेता युग से पहले की हैं जो समुंद्र मंथन के समय से जुड़ी हुई हैं। कहते हैं कि एक बार देवताओं के अहंकार से रुष्ट होकर माता लक्ष्मी पाताल लोक में चली गयी थी जो कि समुंद्र की गहराइयों में था। जब समुंद्र मंथन हुआ तो उसमे से माता लक्ष्मी भी प्रकट हुई थी। यह दिन कार्तिक मास की पूर्णिमा का दिन था जिसे हम शरद मास की पूर्णिमा के नाम से जानते हैं। यह दिन लक्ष्मी माता के प्राकट्य दिवस के रूप में मनाया जाता हैं।

मान्यता हैं कि कार्तिक मास की अमावस्या के दिन ही माता लक्ष्मी ने भगवान विष्णु को अपने पति रूप में स्वीकार किया था जो कि दिवाली का ही दिन था। इसलिये इस दिन उनकी पूजा करने का महत्व हैं।

दूसरी कथा

तीसरी कथा

DISCLAIMER:यह लेख धार्मिक मान्यताओं व धर्म शास्त्रों पर आधारित है। हम अंधविश्वास को बढ़ावा नहीं देते। किसी भी धार्मिक कार्य को करते वक्त मन को एकाग्र अवश्य रखें। पाठक धर्म से जुड़े किसी भी कार्य को करने से पहले अपने पुरोहित या आचार्य से अवश्य परामर्श ले लें। KhabarSting इसकी पुष्टि नहीं करता।)

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