राहुल गांधी पर SC-ST एक्ट में केस दर्ज होने के बाद उठ रहे ये सवाल-Video
Rahul Gandhi under the SC-ST Act: कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ उत्तराखंड के हल्द्वानी में एससी-एसटी एक्ट में मुकदमा दर्ज होने के बाद सवाल उठ रहा है कि उनकी गिरफ्तारी तुरंत होगी या फिर उनको सांसद होने का लाभ मिलेगा? दरअसल कई अन्य मामलों में इसी मुकदमे के तहत तुरंत गिरफ्तारियां हो चुकी हैं और सालों जेल में आरोपियों को रखा गया है.
यहां तक कि फर्जी एससी-एसटी एक्ट में विष्णु तिवारी नाम के शख्स को 20 साल जेल में रखा गया और जब 20 साल बाद साबित हुआ कि वो निर्दोष हैं तब उनको जेल से रिहा किया गया, तब तक वो अपनी पूरी जवानी खोने के साथ ही पूरे परिवार को भी खो चुके थे.
राहुल गांधी को SC/ST एक्ट के तहत बिना जांच के उत्तराखंड पुलिस तुरंत गिरफ्तार करें। 💪
अगर राहुल गांधी गिरफ्तार नहीं होते हैं, तो मैं मान लूंगा कि अब SC/ST एक्ट कमज़ोर हो चुका है। pic.twitter.com/r1yjcAl69C
— Voice Of Brahmins (@VoiceOfBrahmins) August 30, 2026
ऐसे में ये सवाल और भी बड़ा हो जाता है कि क्या राहुल गांधी की गिरफ्तारी होगी या नहीं या फिर उनको बड़े घराने और सांसद होने का लाभ मिलेगा. यहां ये बताना अति जरूरी है कि इस कानून के तहत मामला दर्ज होने के बाद आसानी से आरोपी को अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) नहीं मिलती है. तो वहीं इस मामले में पुलिस तुरंत कार्रवाई कर सकती है और अगर सजा की बात करें तो अपराध की गंभीरता के आधार पर इसमें 6 महीने से लेकर उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान है.
मात्र चाय के कप की ही जाति नहीं बताई माननीय @RahulGandhi जी ने। उन्होंने यह भी सिद्ध कर दिया कि चाय की दुकान पर सभी चाय बनाने वाले सामान्य वर्ग के ही लोग होते हैं।
इतने योग्य व्यक्ति की भला तारीफ़ क्यों नहीं करते लोग ? अब मैं तो इससे भी ज्यादा तारीफ़ इन महोदय की तभी करूंगी जब ये… https://t.co/5P5zmgKhPK pic.twitter.com/sac0yLikSJ
— बेटी महाकाल की (सनातनी ब्राह्मणी) (@PandeyR_O2025O) August 31, 2026
जानें क्या है मामला?
बता दें कि एससी-एसटी एक्ट में जो शिकायत की गई है उसमें राहुल गांधी पर मल्लिकार्जुन खड़गे की रैली के बाद हुए शुद्धिकरण मामले को जातिगत रंग देने और छुआछूत से जोड़ने का आरोप लगाया गया है. शिकायत कर्ता श्रीराम धर्मार्ध सेवा समिति के सदस्य ही हैं जिन्होंने रामलीला मैदान में शुद्धिकरण कार्यक्रम का आयोजन किया था.
राहुल गांधी के खिलाफ मामला रविवार रात कोतवाली पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया है. एससी समुदाय से सम्बंध रखने वाले अमित कुमार ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने दिल्ली में एक प्रेस वार्ता की और 11 अगस्त को रामलीला मैदान में किए गए सामान्य सफाई काम को जातिगत रंग देने के साथ ही इस काम को छुआछूत का काम बताते हुए इसे अपराध बताया और कार्रवाई की मांग तक की.
जांच करेंगे एएसपी अमित सैनी
नैनीताल के एसएसपी टीसी मंजूनाथ का बयान इस मामले में सामने आया है जिसमें कहा गया है कि अपने आरोपों को साबित करने के लिए सभी जरूरी सबूत उन्होंने सौंपे हैं जिसके बाद एफआईआर दर्ज की गई है. इस मामले की जांच एएसपी अमित सैनी के नेतृत्व में होगी.
देश के हर दलित व्यक्ति का जन्म से मृत्यु तक, हर जगह, हर कदम अपमान किया जाता है।
उनकी जितनी बुलंद आवाज़ होती है, उनपर उतना तेज़ हमला होता है।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे जी के साथ हल्द्वानी में जो भी हुआ वो “शुद्धिकरण” का नाम दे कर उनके खिलाफ़ छुआछूत है – और छुआछूत भारत… pic.twitter.com/MJpDFRm9Zj
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) August 29, 2026
राहुल गांधी ने कही थी ये बात
सोशल मीडिया पर वायरल खबरों के मुताबिक, राहुल गांधी ने ‘शुद्धिकरण यज्ञ’ को दलित-विरोधी कहा था. दरअसल 8 अगस्त को हल्द्वानी में कांग्रेस की रैली के बाद एक हिंदू संगठन ने शुद्धिकरण कार्यक्रम का आयोजन किया था. शिकायतकर्ता ने कहा है कि कांग्रेस ने हल्द्वानी के रामलीला मैदान में एक राजनीतिक रैली की थी, जिसमें कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और अन्य नेता शामिल हुए थे.
मैदान में गंदगी साफ करने के लिए चलाया था सफाई अभियान
11 अगस्त को रैली के बाद शिकायतकर्ता अमित कुमार सहित स्थानीय संगठन के पदाधिकारियों और सदस्यों ने मैदान का निरीक्षण किया तो मौके पर गंदगी और शराब की बोतलें मिलने का दावा किया. इसके बाद सभी ने सफाई अभियान चलाया और सांस्कृतिक स्थल की पवित्रता बहाल करने के लिए पारंपरिक हवन-शुद्धिकरण (शुद्धि की रस्म) का कार्यक्रम किया. शिकायतकर्ता का कहना है कि ये सिर्फ मैदान को साफ सुथरा बनाए रखने के लिए किया गया था लेकिन राहुल गांधी ने इसे राजनीति से जोड़ा और गलत ढंग से इसे समाज के सामने प्रस्तुत किया. शिकायतकर्ता ने ये भी आरोप लगाया कि इन बयानों ने सामाजिक समूहों के बीच नफरत, दुश्मनी और दुर्भावना को बढ़ावा दिया है, जिससे इसमें शामिल लोगों की व्यक्तिगत प्रतिष्ठा, शांति और सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ा है.
शिकायतकर्ता ने ये भी कहा है कि अनुसूचित जाति समुदाय के सदस्यों ने व्यक्तिगत रूप से स्थल की सफाई की थी और शुद्धिकरण के रस्म को पूरा करने में हिस्सा लिया था. राहुल गांधी ने बिना पहले से जांच-पड़ताल किए ही इस कार्यक्रम को भेदभावपूर्ण छुआछूत का मामला बताया. यही वजह है कि उनकी टिप्पणियों ने कथित तौर पर SC समुदाय के प्रतिभागियों को जातिगत भेदभाव करने वालों के रूप में गलत तरीके से पेश किया.
मालूम हो कि 29 अगस्त को राहुल गांधी ने नई दिल्ली में एक राष्ट्रीय प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी और इसमें उन्होंने कथित तौर पर शुद्धिकरण की रस्म को “छुआछूत” और दलित-विरोधी भेदभाव का कार्य बताते हुए इसमें शामिल लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग भी की थी.