Hartalika Teej 2025: तीजा व्रत पर भूलकर भी न करें ये गलतियां…पढ़ें चार प्रहर की पूजा का विधान

August 25, 2025 by No Comments

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Hartalika Teej 2025: प्रत्येक वर्ष की भाद्रपद का शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हरतालिका तीज यानी तीजा व्रत किया जाता है. इस बार यह व्रत त्योहार 26 अगस्त को पड़ रहा है. इस दिन अधिकांश हिंदू महिलाएं व कुंवारी लड़कियां निर्जला व्रत रखकर शिव-पार्वती की पूजा करती हैं और पति व होने वाले वर की दीर्घायु व अच्छे स्वास्थ्य की कामना करती हैं.

इस दिन सुबह स्नान आदि करने के बाद व्रती महिलाओं को व्रत करने का संकल्प लेना चाहिए और फिर पूजा की आगे की विधि शुरू करनी चाहिए. बता दें कि ये करीब 30 घंटे का व्रत होता है. इस दौरान महिलाएं न तो पानी पीती हैं और न ही कुछ खाती हैं.

व्रत करने वाली महिलाएं रात्रिकालीन चार प्रहर की पूजा भी करती हैं और सुबह विसर्जन, दान, पुण्य करने के बाद ही व्रत का पारण किया जाता है.

न करें ये काम

व्रत के दौरान काले वस्त्र या काली चूड़ियां पहनने से बचें. इसे अशुभ माना जाता है. मान्यता है कि इससे वैवाहिक जीवन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है.

इस व्रत में रात में न सोएं, बल्कि रात जागरण करें और भजन-कीर्तन करें. भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना के साथ ही नाम जप करें.

व्रत के दौरान दूध, दही या किसी भी तरह के डेयरी उत्पाद का सेवन करने से बचें. साथ ही भगवान को भोग भी घर का ही लगाएं, बाहर का कुछ भी भोग खरीद कर लगाने से बचें. कुल मिलाकर शुद्धता का ख्याल रखें. क्योंकि इससे व्रत खंडित हो सकता है.

हरतालिका तीज के दिन मन में किसी के प्रति गुस्से की भावना न रखें और किसी से कड़वी बात न करें. मन को शांत रखकर पूजा करें.

सुहागिन महिलाएं पूरा श्रृंगार कर ही पूजन करें. बिना श्रृंगार के पूजा करना अशुभ माना गया है. हाथों में मेहंदी और पैरो में महावर जरूर लगाएं. साथ ही लाल या पीली साड़ी पहनें या लहंगा भी पहन कर पूजा कर सकती हैं.

इस तरह होती है चार प्रहर की पूजा

तीजा के दिन सुबह महिलाएं स्नान आदि के बाद दिन भर व्रत की तैयारी करती हैं और फिर शाम के होते ही चार प्रहर की पूजा शुरू हो जाती है. इस सम्बंध में ज्योतिषाचार्य पंडित सुशील कृष्ण शास्त्री कहते हैं कि ”प्रहर की पूजा को महिलाएं काफी विधि विधान से करती हैं. पूजा रात भर चलती है और ये तपस्या की तरह होती है.”

पहले प्रहर की पूजा

पहले प्रहर की पूजा शाम 6 बजे से शुरू होती है. पूजा रात में 9 बजे तक चलती है. इस दौरान पुरोहित द्वारा शिव-पार्वती की पूजा की जाती है. इस दौरान महिलाएं माता पार्वती-शिव को श्रृंगार का सामान और शिव जी को भोग लगाती हैं. बता दें कि माता पार्वती का भी व्रत होता है, इसलिए शाम को माता पार्वती को भोग नहीं लगता है, सुबह 4 बजे पूजा के दौरान माता पार्वती को भोग लगाया जाता है. शाम को हर तरह के फल, मिठाई आदि का भोग लगाया जाता है और फिर व्रती महिलाएं कथा का श्रवण करती हैं.

दूसरा प्रहर

दूसरे प्रहर की पूजा रात 9 बजे से 12 बजे के बीच होती है. इस दौरान पहले से तैयार किए गए हर तरह के पकवान का भोग भोले बाब को चढ़ाया जाता है. कथा का श्रवण करने के साथ ही हवन पूजन किया जाता है.

तीसरा प्रहर

तीसरे प्रहर की पूजा रात 12 बजे से 3 बजे के बीच होती है. इस प्रहर की पूजा में शिव-पार्वती की पहले विधि विधान से पूजा करें और फिर तीसरे प्रहर की पूजा में जितनी भी तरह की मिठाइयां हैं उनका भोग लगाएं. आरती करें. माना जाता है कि ऐसा करने से पूरे घर का कल्याण होता है.

चौथा प्रहर

चौथे प्रहर की पूजा तड़के 3 बजे से सुबह 6 बजे तक होती है. इस दौरान माता पार्वती को भी भोग लगाया जाता है. इसमें दूध, गंगाजल, शहद, शक्कर, मिश्री, और अनेक प्रकार के फल-मिठाई घर के पकवान आदि सभी को एक थाली में सजा कर शिव-पार्वती की पूजा करने के बाद भोग लगाएं. बाद में फलों का प्रसाद ग्रहण करने के बाद व्रत का पारण करें.

व्रती महिलाएं सुबह 6 बजे पूजा सामग्री का विसर्जन करती हैं. बता दें कि पूजा सामग्री का विसर्जन बहते हुए पानी में या फिर तालाब में करें. पुजारी या पुरोहित को सुहाग आदि व वस्त्र आदि का दान करें.

DISCLAIMER: यह लेख धार्मिक मान्यताओं व धर्म शास्त्रों पर आधारित है। हम अंधविश्वास को बढ़ावा नहीं देते। पाठक धर्म से जुड़े किसी भी कार्य को करने से पहले अपने पुरोहित या आचार्य से अवश्य परामर्श ले लें। KhabarSting इसकी पुष्टि नहीं करता।)

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