Hathras Stampede: बाबा सूरजपाल के प्रिय शिष्य मधुकर ने खोले तमाम चौंकाने वाले राज…सत्संग समिति से जुड़े कई अधिकारी व सियासी चेहरे, जानें क्या उठाते थे लाभ

Share News

Hathras Stampede: दो जुलाई को उत्तर प्रदेश के हाथरस में भोले बाबा उर्फ, सूरजपाल उर्फ नारायण साकार हरि के सत्संग में मची भगदड़ में 121 लोगों की मौत से न केवल यूपी बल्कि पूरा देश हिल गया है. पुलिस व जांच एजेंसियां लगातार इस घटना को लेकर जांच कर रही है. बाबा सूरजपाल का प्रिय शिष्य कहे जाने वाला कार्यक्रम आयोजक व मुख्य आरोपी देवप्रकाश मधुकर पुलिस के हत्थे चढ़ चुका है.

निजी स्वार्थ के लिए जुड़े
हाथरस एसपी निपुण अग्रवाल ने पत्रकारों से बात करते हुए बताया कि मधुकर से पूछताछ में सामने आया है कि कई राजनीतिक पार्टियां उसके संपर्क में थीं. इसी के साथ ही उन्होंने कहा कि फंड इकट्ठा करने के संबंध में गहराई से जांच की जा रही है. एसपी ने कहा पूछताछ में ऐसा भी प्रतीत हुआ है कि राजनीतिक दल अपने राजनीतिक और निजी स्वार्थ के लिए इनसे जुड़े हैं. मधुकर के सभी बैंक खाते और संपत्ति की जांच की जा रही है. इसके लिए संबंधित एजेंसियों का भी सहयोग लिया जाएगा.

घटना के बाद का दृश्य, यहीं पर हुआ था सत्संग, वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है.

फंड इकठ्ठा करने की थी मधुकर के पास जिम्मेदारी
पुलिस पूछताछ में उसने सत्संग और समिति से जुड़े तमाम राज खोले हैं. कहा जा रहा है कि कुछ ही समय में उसे मुख्य सेवादार का दर्जा भी दे दिया गया था. बाबा सूरजपाल के प्रिय शिष्यो में मधुकर की गिनती होती थी. हाथरस में सत्संग कराने की जिम्मेदारी भी उसी को मिली थी और उसी ने एसडीएम सिंकदराराऊ से सत्संग की अनुमति ली थी और सत्संग को लेकर बड़ी पब्लिसिटी की व शहर भर में 50 से अधिक बाबा के बोर्ड लगाए गए थे और बड़े पैमाने में सत्संग को लेकर चंदा इकठ्ठा किया गया था. मधुकर के सम्बंध कई बडे़ नेताओं से भी निकले हैं. पूछताछ में उसने बताया कि सत्संग आयोजन के लिए वह फंड इकट्ठा करने का काम करता था. साथ ही सभी बड़े आयोजनों की जिम्मेदारी भी उसके पास ही रहती थी. तो वहीं जिस समिति के तहत सत्संग का आयोजन होता था उसके सदस्य उत्तर प्रदेश के साथ ही मध्यप्रदेश, राजस्थान, बिहार और छत्तीसगढ़ में बताए जा रहे हैं.

सियासी चेहरों से लेकर सरकारी अधिकारी और कर्मचारी भी जुड़े
खबर सामने आई है कि बाबा की समिति से कई सरकारी विभागों के अधिकारी व कर्मचारी भी जुडे हैं. देवप्रकाश मधुकर खुद एटा जिले में मनरेगा में तकनीकी सहायक के रूप में तैनात है. पुलिस को जानकारी मिली है कि एक विभाग में तो बाकायदा बाबा का फोटो लगा हुआ था और जब हाथरस हादसा हुआ तो तस्वीर हटा दी गई है. फिलहाल पुलिस ने अब समिति की भी जांच शुरू कर दी है. कहा जा रहा है कि पुलिस के सामने ऐसे कुछ सेवानिवृत अधिकारियों के नाम भी सामने आए हैं जो बाबा की समिति से जुड़े हैं और कहा जा रहा है कि पुलिस उनसे भी पूछताछ कर सकती है. इसके अलावा सेवानिवृत अधिकारी भी बाबा की समिति से जुड़े हैं और सत्संग का आयोजन कराते हैं.

इस तरह से बाबा के पीछे भागी थी भीड़ और हुआ था हादसा

भरोसेमंद रहा है मधुकर
बताया जा रहा है कि वह 10 साल पहले बाबा सूरजपाल से मिला था और फिर बाबा की मानव मंगल मिलन सद्भावना समागम समिति से जुड़ गया था. हादसे के मामले में गिरफ्तार मु्ख्य आरोपी देवप्रकाश मधुकर रहने वाला तो एटा का है लेकिन कई सालों से वह सिकंदराराऊ के मोहल्ला दमदपुरा नई कॉलोनी में रह रहा था. इसी के बाद धीरे-धीरे बाबा का उस पर भरोसा बढ़ता गया. कहा जाता है कि बाबा किसी से भी फोन पर बात नहीं करता लेकिन मधुकर से बात होती है. खबरों की मानें तो बाबा के जाने के बाद भगदड़ में हुई मौत की खबर भी उसी ने बाबा को दी थी. हालांकि पुलिस ने इस सवाल के जवाब में कहा है कि इसके बारे में पूरी जानकारी कॉल डिटेल खंगालने के बाद ही दी जा सकती है.

कई सियासी दल भी मधुकर के सम्पर्क में
पुलिस को ये भी पता चला है कि इस सत्संग के लिए भी खूब फंडिंग हुई थी. पूछताछ में ये भी जानकारी सामने आई है कि कई सियासी दलों के लोग भी मधुकर के संपर्क में थे और फंडिंग करते थे. इससे ये स्पष्ट हो रहा है कि एक बड़े वर्ग को साधने के लिए राजनीतिक दल बाबा से जुड़े और फंडिंग कर रहे थे. तो वहीं सिंकदराराऊ में भी सत्संग की अनुमति के लिए कई पार्टियों के नेताओं ने अपने सिफारिशी पत्र भी आवेदन के साथ लगाए थे. अब जांच एजेंसियों ने इसको लेकर भी जांच शुरू कर दी है.

चंदे का भी होता बंदरबाट
हाथरस जिले के फुलरई मुगलगढ़ी गांव में सत्संग के आयोजन के लिए पिछले एक महीने से तैयारी चल रही थी और चंदा इकठ्ठा किया जा रहा था. पुलिस को ये भी पता चला है कि इस सत्संग के लिए 70 लाख से अधिक चंदा इकठ्ठा हुआ था. बताया जा रहा है कि चंदा इकठ्ठा करने के लिए 30 से अधिक लोग गांव में टीम बनाकर घूम रहे थे. कहा जा रहा है कि जब समिति के लोग चंदा इकठ्ठा कर लेते थे तो वो मधुकर को सौंप देते थे जिसे बाद में ट्रस्ट में जमा कर दिया जाता था. चंदा देने वालों में 100 से 20 हजार तक देने वाले भी शामिल थे. तो वहीं चर्चा ये भी है कि चंदा इकठ्ठा करने वाले भी इसमें से 30 फीसदी रकम अपने पास ही रख लिया करते थे और 70 फीसदी पैसा ही ट्रस्ट में जमा होता था. इसकी कोई रसीद नहीं दी जाती थी बल्कि डायरी में केवल लिखा जाता था. कोई ऑनलाइन तो कोई कैश पैसा बाबा को भेज रहा था. (फोटो-सोशल मीडिया-मुख्य आरोपी देव प्रकाश मधुकर की है)