प्रदूषण बढ़ा रहा डायबीटीज का खतरा…कब हो गए रोगी पता भी नहीं चलेगा; जाने क्या है बचने के उपाय

April 6, 2026 by No Comments

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Diabetes Causes: अक्सर डायबिटीज (शुगर) जैसी बीमारी को गलत खानपान या फिर खराब लाइफस्टाइल की वजह से होना बताया जाता रहा है लेकिन ताजा रिसर्च के मुताबिक अब ये बीमारी तेजी से बढ़ते वायु प्रदूषण के कारण भी हो रही है. अगर जानकारों की मानें तो हवा में मौजूद धूल और प्रदूषण के कण सीधे शरीर के अंदर जाकर ऐसी प्रक्रियाएं शुरू कर देते हैं, जिससे धीरे-धीरे इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ जाता है और डायबिटीज की ओर इंसान को धकेल देता है

इसको लेकर सोशल मीडिया पर कानपुर के चिकित्सक डॉ. एसके गौतम का एक बयान तेजी से वायरल हो रहा है जिसमें उन्होंने दावा किया है कि पिछले कुछ वर्षों में डायबिटीज के मामले अधिक सामने आए हैं और उसमें काफी हद तक प्रदूषण का अहम रोल देखा गया है.

ऐसे बन जाते हैं हम शुगर के मरीज

डॉ. एसके गौतम कहते हैं कि हवा में पीएम 2.5 मौजूद रहता है जो कि बेहद महीन कण है और ये सांस के जरिए हमारे शरीर में प्रवेश कर जाता है. ये कण इतने छोटे होते हैं कि ये सीधा फेफड़ों से होते हुए ब्लडस्ट्रीम तक पहुंच जाते हैं और फिर ये हमारे शरीर की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाना शुरू कर देते हैं और फिर ये कण हानिकारक केमिकल रिलीज कराने लगते हैं और फिर यही केमिकल इंसुलिन के काम करने की क्षमता को कमजोर कर देते हैं. नतीजतन शरीर में शुगर का स्तर धीरे-धीरे बढ़ने लगता है और इस तरह से व्यक्ति कब डायबिटीज की चपेट में आ गया उसे पता ही नहीं चलता. व्यक्ति सोचता रहता है कि उसने तो संतुलित आहार लिया फिर भी उसके साथ ऐसा कैसे हो गया?

इन शहरों में बढ़ा है खतरा

डा. गौतम ने उन शहरों के बारे में भी बताया है जहां प्रदूषण का स्तर सबसे अधिक है और वहां डायबिटीज के मरीजों की संख्या भी तेजी से बढ़ी है. इन शहरों में देश की राजधानी दिल्ली के साथ ही नोएडा, गाजियाबाद जैसे बड़े शहर शामिल हैं. यहां की दूषित होती हवा लोगों की सेहर और शरीर को लगातार प्रभावित कर रही है. कानपुर जैसे शहरों में भी गर्मियों और सर्दियों में धूल और प्रदूषण का स्तर बढ़ जाता है, जो कि यहां के लोगों के लिए भी बड़ा खतरा है. अगर हम लंबे समय तक प्रदूषित हवा में रहते हैं तो धीरे-धीरे इस बीमारी की ओर बढ़ते जाते हैं और हमें इसका पता भी नहीं लगता.

ऐसे में क्या करें?

डॉ. गौतम ने अपने बयान में ये बात स्पष्ट की है कि इस गम्भीर खतरे से पूरी तरह बच पाना तो बेहद मुश्किल जरूर है, लेकिन वह दावा करते हैं कि अगर हम कुछ सावधानी बरतें तो इस जोखिम को कम किया जा सकता है. यानी प्रदूषण जहां अधिक हो, वहां पर मास्क का इस्तेमान अनिवार्य रूप से करें. सुबह-शाम जब हवा में धूल अधिक हो तो उस समय कोशिश करें कि बाहर न निकलें. अगर अधिक जरूरी है तो मास्क लगाकर निकलें. शरीर को मजबूत रखें. खान-पान और व्यायाम को प्रतिदिन क्रिया में शामिल करें. ताकि प्रदूषण का असर शरीर पर कम पड़े. शुगर लेवल का समय-समय पर जांच कराते रहें क्योंकि इस पर नजर रखना बेहद जरूरी है.

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