Court News: ” शव के साथ दुष्कर्म नहीं है अपराध”, कहकर हाईकोर्ट ने आरोपी को कर दिया बरी, देश में छिड़ी बहस, केंद्र सरकार से कोर्ट ने कही बड़ी बात
Court News: भारत के कर्नाटक राज्य से चौंका देने वाला मामला सामने आ रहा है. यहां की एक अदालत ने एक दुष्कर्म के आरोपी को ये कहते हुए बरी कर दिया कि शव के साथ दुष्कर्म करना कोई अपराध नहीं है. अब इस पूरे मुद्दे को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर बहस छिड़ी हुई है.
बता दें कि कर्नाटक की हाईकोर्ट ने 30 मई 2023 को एक फैसला सुनाते हुए कहा था कि शव के साथ यौन उत्पीड़न आईपीसी के तहत दुष्कर्म या आप्राकृतिक अपराध के दायरे में नहीं आता है. जिसके बाद पूरे देश में इस मुद्दे को लेकर बहस छिड़ गई है. मालूम हो कि साल 2015 में कर्नाटक के तुमकुरु जिले में 21 साल की लड़की का मर्डर करने के बाद उसके साथ दुष्कर्म किया गया था. इस मामले में सेशन कोर्ट ने आरोपी को हत्या के साथ ही दुष्कर्म का दोषी करार दिया था. इसके बाद इस मामले को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी, जिसे सिंगल बेंच ने निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा था, लेकिन मामला जब डबल बेंच में पहुंचा तो कोर्ट ने हत्या का चार्ज तो बरकरार रखा, लेकिन रेप के आरोप से हैवान को बरी कर दिया.
कोर्ट ने केंद्र सरकार से आईपीसी में बदलाव करने को कहा
मीडिया सूत्रों के मुताबिक कोर्ट ने आरोपी हैवान को बरी करते हुए अपने फैसले में कहा कि, आरोपी ने जो किया है वो नेक्रोफीलिया की श्रेणी में आता है और ये आईपीसी के तहत अपराध नहीं है. डबल बेंच में सुनवाई कर रहे जजों जस्टिस बी वीरप्पा और जस्टिस वेंकटेश नाइक ने कहा कि ये देश का दुर्भाग्य है कि नेक्रोफीलिया के लिए देश में कोई कोई सजा का प्रावधान नहीं है. जजों ने केंद्र सरकार से आईपीसी में बदलाव कर इस अपराध के लिए कानून बनाने को कहा है. कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कहा कि यह मामला 377 के तहत अप्राकृतिक अपराध की श्रेणी में भी नहीं आएगा. पीठ ने अपनी बात को जारी रखते हुए कहा, “आईपीसी की धारा 375 और 377 को सावधानीपूर्वक पढ़ने से यह स्पष्ट होता है कि एक मृत शरीर को इंसान या व्यक्ति नहीं कहा जा सकता है. इसलिए, धारा 375 या 377 के प्रावधान लागू नहीं होंगे.”