किसी खतरों के खिलाड़ी से कम नहीं हैं बेसिक शिक्षक…! बाघ से टकरा गई शिक्षक की कार…फिर देखें क्या हुआ- Video

October 6, 2024 by No Comments

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Lakhimpur Viral Video: बेसिक शिक्षक किसी खतरों के खिलाड़ी से कम नहीं है. उनको रोज ही किसी न किसी खतरे को पार करके स्कूल पहुंचना पड़ता है. कोई जंगल तो कई नदी-नाला पार करके स्कूल पहुंचता है. बच्चों को पढ़ाने और अपनी नौकरी चलाने के लिए केवल पुरुष ही नहीं बल्कि महिला शिक्षकों को भी मार्ग में तमाम जोखिम उठाते हुए स्कूल जाना पड़ता है. ऐसा ही एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें कार में कुछ शिक्षक बैठे हैं और एक जंगल से होते हुए गुजर रहे हैं. इसी बीच बाघ आ जाता है और फिर डरते हुए शिक्षक अपनी कार को बैक करने लगते हैं. इस दौरान उनके चेहरे पर खौफ साफ दिखाई दे रहा है.

यह वीडियो लखीमपुर का बताया जा रहा है. वीडियो के साथ लगे कैप्शन में लिखा गया है कि कल बिजुआ ब्लॉक के अलीगंज में शिक्षकों की गाड़ी के सामने बाघ आने से डर का माहौल. फिलहाल इस तरह के और भी वीडियो पहले भी वायरल हो चुके हैं, जिसमें कई बार शिक्षिकाओं को नंगे पांव कीचड़ भरी सड़क या फिर नदी व नाले को पार करते हुए स्कूल जाना दिखाई दे रहा है. यह स्थिति तब और विकट हो जाती है जब शिक्षक का वाहन खराब हो जाता है. इसी तरह बिजनौर के नगीना के बढ़ापुर में रामजी वाला गांव है, वहां भी शिक्षकों को मार्ग में तमाम समस्याओं का सामना करते हुए स्कूल जाना पड़ रहा है.

फिलहाल लखीमपुर जाने वाले शिक्षकों की कार के सामने बाघ का आ जाना इसलिए और भी चिंता का विषय बन गया है क्यों वहां पर हाल ही में यानी शनिवार शाम करीब 7 बजे गंगाबेहड़ निवासी मुन्नर अली साइकिल से मिट्टी ढो रहे थे। उनका 12 साल का बेटा साजेब उर्फ छोटू पीछे से साइकिल को धक्का दे रहा था। इसी दौरान गन्ने के खेत से अचानक तेंदुआ निकला और बच्चे पर हमला कर उसे पकड़ ले गया. मुन्नर अली मदद के लिए जोर-जोर से चिल्लाए. जब तक लोग इकट्ठा हुए, तेंदुआ बच्चे को पेड़ पर ले जा चुका था। नीचे से पिता शोर करते रहे, परंतु तेंदुआ उनकी आंखों के सामने ही बच्चे को मारकर खा गया. सोशल मीडिया पर वायरल इस वीडियो पर लोग तरह-तरह के कॉमेंट कर रहे हैं और इस मार्ग पर दोपहिया वाहन से न जाने की सलाह भी दे रहे हैं.

म्युच्युल ट्रांसफर की राह देख रहे हैं कई शिक्षक- शिक्षिकाएं

प्रदेश में तमाम ऐसे पिछड़े गांव हैं, जहां पर 7 साल से अधिक होने के बावजूद भी शिक्षकों व शिक्षिकाओं का ट्रांसफर नहीं किया गया है. नियम है कि 5 साल पिछड़े ब्लाक में रहने के बाद शिक्षकों का ट्रांसफर कर दिया जाए. हालांकि म्युच्युअल ट्रांसफर के माध्यम से सरकार ने सुविधा दी है ताकि किसी भी स्कूल में शिक्षकों की कमी न होने पाए और स्कूलों में पर्याप्त शिक्षक भी रहें. इसके बावजूद भी तमाम ऐसे पिछड़े गांव हैं जहां के स्कूलों में म्युच्युअल ट्रांसफर के लिए शिक्षक जाना ही नहीं चाहते. ऐसे में इन गांवों में 7 साल से अधिक समय से पढ़ा रहे शिक्षक व शिक्षिकाएं यहीं पर रहने के लिए मजबूर हैं.

 

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