दुनिया भर के लिए चुनौती बने अल्जाइमर रोग का इलाज करेगा पान का पत्ता…लखनऊ विश्वविद्यालय की महत्वपूर्ण खोज

December 4, 2025 by No Comments

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Lucknow University: अल्ज़ाइमर रोग, जो कि दुनिया भर डिमेंशिया का प्रमुख कारण है, लंबे समय से चिकित्सा जगत के लिए चुनौती बना हुआ है. इसके इलाज के लिए दुनिया भर के शोधार्थी नई-नई खोज में लगे हुए हैं. इसी क्रम में लखनऊ विश्वविद्यालय ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. दरअसल लखनऊ विश्वविद्यालय के बायोजेरोन्टोलॉजी एवं न्यूरोबायोलॉजी प्रयोगशाला ने एक उल्लेखनीय वैज्ञानिक उपलब्धि हासिल कर ली है.

शोधकर्ताओं ने पान के पत्ते (Piper betle) में पाए जाने वाले प्राकृतिक यौगिक हाइड्रॉक्सीचाविकोल को अल्ज़ाइमर रोग के संभावित उपचार के लिए बहु-लक्ष्यीय औषधि उम्मीदवार के रूप में चिन्हित किया है.

विश्वविद्यालय से मिली जानकारी के मुताबिक, इस अध्ययन में उन्नत कम्प्यूटेशनल तकनीकों का उपयोग करते हुए यह विश्लेषण किया गया कि हाइड्रॉक्सीचाविकोल मानव प्रोटीनों के साथ किस प्रकार अंतःक्रिया करता है. शोध दल ने 88 ऐसे जीनों की पहचान की जो इस यौगिक और अल्ज़ाइमर रोग दोनों से जुड़े हैं.

इनमें से तीन प्रमुख प्रोटीन – COMT, HSP90AA1 और GAPDH – “हब” लक्ष्यों के रूप में उभरे। ये प्रोटीन मस्तिष्क संकेतों, टाउ एवं अमाइलॉइड प्रसंस्करण तथा न्यूरॉन्स की जीवित रहने की क्षमता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.

मॉलिक्यूलर डॉकिंग और दीर्घकालिक सिमुलेशन अध्ययनों से यह स्पष्ट हुआ कि हाइड्रॉक्सीचाविकोल इन प्रोटीनों से मज़बूती और स्थिरता से जुड़ता है. इससे संकेत मिलता है कि यह यौगिक एक साथ कई अल्ज़ाइमर-संबंधी मार्गों को प्रभावित कर सकता है. इसके अतिरिक्त, विश्लेषण से यह भी पता चला कि हाइड्रॉक्सीचाविकोल में अनुकूल “ड्रग-लाइक” गुण मौजूद हैं तथा इसका अवशोषण भी अच्छा अनुमानित किया गया है, जिससे यह एक संभावित मौखिक दवा के रूप में उभर सकता है.

अल्ज़ाइमर रोग की जटिलता इस तथ्य से स्पष्ट होती है कि इसमें प्रोटीन का गुच्छा बनना, सूजन और ऑक्सीडेटिव तनाव जैसी अनेक प्रक्रियाएँ शामिल होती हैं. यही कारण है कि एकल-लक्ष्यीय दवाएँ अक्सर सीमित लाभ ही प्रदान कर पाती हैं. इसके अलावा यह शोध इस बात को भी दर्शाता है कि एक सुरक्षित, पौध-आधारित अणु एक साथ कई मार्गों पर कार्य कर सकता है.

यह आधुनिक चिकित्सा अनुसंधान की उस प्रवृत्ति से मेल खाता है जिसमें बहु-लक्ष्यीय एवं हर्बल-आधारित उपचारों को जटिल मस्तिष्क रोगों के लिए अधिक प्रभावी माना जा रहा है. प्रमुख अन्वेषक डॉ. नितीश राय ने कहा कि ये निष्कर्ष अभी प्रारंभिक हैं और कम्प्यूटर आधारित अध्ययनों पर आधारित हैं.

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि हाइड्रॉक्सीचाविकोल को रोगियों के उपचार विकल्प के रूप में परखने से पहले व्यापक प्रयोगशाला एवं नैदानिक परीक्षण आवश्यक होंगे. तथापि, उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि यह परिणाम भविष्य में इस पान पत्ते के घटक को एक सुलभ एवं किफायती उम्मीदवार के रूप में आगे बढ़ाने के लिए ठोस वैज्ञानिक आधार प्रदान करते हैं.

लखनऊ विश्वविद्यालय का यह शोध न केवल भारतीय पारंपरिक पौधों की औषधीय क्षमता को उजागर करता है, बल्कि वैश्विक स्तर पर अल्ज़ाइमर रोग से लड़ने की दिशा में नई आशा भी जगाता है.

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