Lucknow University: कार्य परिषद की बैठक में छात्र हित में लिए गए ये बड़े फैसले, शैक्षणिक भ्रमण और मेडल निर्धारण के नए पारदर्शी मानकों पर लगी मुहर
Lucknow University: आज यानी सोमवार को लखनऊ विश्वविद्यालय की कार्य परिषद (Executive Council) की महत्वपूर्ण बैठक हुई. अपराह्न 04:00 बजे प्रशासनिक भवन स्थित ‘मंथन हॉल’ में आयोजित बैठक की अध्यक्षता लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर जय प्रकाश सैनी ने की. तो वहीं संचालन पदेन सचिव एवं कुलसचिव डॉ. भावना मिश्रा द्वारा किया गया.
बैठक में कार्य परिषद के सम्मानित सदस्यगण उपस्थित रहे. इस बैठक में विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गुणवत्ता, पारदर्शिता और छात्र-हितों को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से कई दूरगामी निर्णय लिए गए.
शैक्षणिक भ्रमण हेतु विस्तृत एसओपी (SOP) का अनुमोदन
बैठक का सबसे महत्वपूर्ण निर्णय विभिन्न पाठ्यक्रमों के छात्र-छात्राओं के शैक्षणिक भ्रमण (Educational Tours/Excursions) के सुचारू संचालन हेतु तैयार किए गए ‘स्टेटमेंट ऑफ पर्पस’ (SOP) को हरी झंडी देना रहा।
व्यावहारिक व व्यावहारिक शिक्षा पर जोर
एसओपी के अनुसार, शैक्षणिक भ्रमण का मुख्य उद्देश्य किताबी ज्ञान को जमीनी और व्यावहारिक अनुभवों से जोड़ना है। इसके अंतर्गत छात्र विभिन्न राष्ट्रीय संस्थानों, संग्रहालयों, वन्यजीव अभयारण्यों, राष्ट्रीय उद्यानों, बायोस्फीयर रिजर्व, पर्वतीय व तटीय क्षेत्रों, पठारों तथा वनों का दौरा कर प्रत्यक्ष अवलोकन, नमूना संग्रह और फील्ड विश्लेषण करेंगे।
कमेटी का गठन व सुरक्षा उपाय
भ्रमण के लिए विभागाध्यक्ष द्वारा एक समर्पित ‘टूर कमेटी’ बनाई जाएगी, जिसमें छात्र-छात्राओं के अनुपात के अनुसार पुरुष व महिला संकाय सदस्य और सहायक स्टाफ शामिल होंगे। इस कमेटी को माननीय कुलपति की पूर्व अनुमति अनिवार्य होगी।
सहमति पत्र एवं अनुशासन
प्रत्येक छात्र तथा उनके अभिभावकों से लिखित सहमति पत्र लिया जाएगा, जिसमें यात्रा विवरण, सुरक्षा नियमों और अकादमिक दायित्वों का उल्लेख होगा। अनुशासनहीनता करने वाले छात्रों का मामला सीधे कुलानुशासक (प्रॉक्टर) कार्यालय को संदर्भित किया जाएगा।
अकादमिक मूल्यांकन
भ्रमण के दौरान छात्रों को ‘फील्ड डायरी’ बनाए रखना, डेटा संग्रह करना और विस्तृत रिपोर्ट जमा करना अनिवार्य होगा। रिपोर्ट, प्रेजेंटेशन और अनुशासन का मूल्यांकन अंतिम परीक्षा के अंकों में जोड़ा जाएगा।
पारदर्शी वित्तीय व्यवस्था
जिन पाठ्यक्रमों में टूर अनिवार्य है, उनका बजट प्रवेश शुल्क में निर्धारित आंशिक राशि और यात्रा से पूर्व स्थान व दूरी के आधार पर लिए जाने वाले नाममात्र शुल्क से तय होगा। इसी बजट से परिवहन, आवास, भोजन, सफारी, प्रवेश टिकट तथा साथ जाने वाले शिक्षकों/स्टाफ का TA-DA वहन किया जाएगा। इससे विश्वविद्यालय पर कोई अतिरिक्त वित्तीय भार नहीं पड़ेगा।
मंजूरी की त्रिस्तरीय श्रृंखला
भ्रमण का प्रस्ताव एक्सकर्शन कोऑर्डिनेटर तैयार करेगा, जिसे विभागाध्यक्ष, अधिष्ठाता छात्र कल्याण (DSW), कुलसचिव, वित्त अधिकारी और अंत में कुलपति महोदय द्वारा प्रशासनिक व वित्तीय स्वीकृति प्रदान की जाएगी।
मेडल, पुरस्कार व सम्मान निर्धारण के नए वस्तुनिष्ठ मानक
कार्य परिषद द्वारा गठित विशेष समिति (बैठक दिनांक 13 जुलाई 2026) की सिफारिशों को स्वीकार करते हुए मेडल निर्धारण प्रक्रिया में बड़ा ऐतिहासिक सुधार किया गया है।
व्यक्तिपरकता का अंत
समिति ने पाया कि आंतरिक मूल्यांकन (क्विज, असाइनमेंट, क्लास पार्टिसिपेशन, प्रैक्टिकल, फील्ड वर्क, इंटर्नशिप, डिसर्टेशन, प्रोजेक्ट आदि) में अलग-अलग शिक्षकों के अलग मानकों और उच्च अंक देने के दबाव के कारण मेडल निर्धारण में निष्पक्षता प्रभावित होती थी। अक्सर मेडल का फैसला 1-2 अंकों के अति-सूक्ष्म और व्यक्तिपरक अंतर से होता था।
केवल अंतिम थ्योरी परीक्षा बनेगी आधार
नए नियमों के अनुसार अब सभी मेडल, अवार्ड और पुरस्कार केवल अंतिम सेमेस्टर की थ्योरी (लिखित) परीक्षा में प्राप्त अंकों के आधार पर ही तय किए जाएंगे। आंतरिक अंक केवल डिवीजन, पास प्रतिशत, SGPA और CGPA निर्धारण के लिए प्रभावी रहेंगे।
प्रथम प्रयास में उत्तीर्ण होना अनिवार्य
मेडल की पात्रता के लिए अभ्यर्थी को अपनी सभी आंतरिक और बाह्य परीक्षाओं को प्रथम प्रयास (First Attempt) में ही अलग-अलग उत्तीर्ण करना होगा। यह शर्त केवल मेडल और पुरस्कारों की पात्रता तय करने के लिए होगी, सामान्य पासिंग नियमों पर नहीं।
आजीवन प्रतिष्ठा की रक्षा
समिति ने स्पष्ट किया कि मेडल एक आजीवन सम्मान है, जो उच्च शिक्षण संस्थानों, नियोक्ताओं और वैश्विक फेलोशिप एजेंसियों के समक्ष छात्र की वास्तविक योग्यता का प्रमाण होता है, इसलिए इसे पूरी तरह निष्पक्ष और वस्तुनिष्ठ होना चाहिए।
इसके अतिरिक्त कार्य परिषद् को यह भी सूचित किया गया कि 69 वें दीक्षांत समारोह के दौरान कुल 1,25,239 विद्यार्थियों को उपाधियाँ प्रदान की जाएँगी। इसमें स्नातक (UG) स्तर पर 93,536, परास्नातक (PG) स्तर पर 31,006 तथा विभिन्न डिप्लोमा पाठ्यक्रमों के 419 छात्र-छात्राएं शामिल हैं।
इसके अतिरिक्त डिजिटल एवं आधुनिक शिक्षा को बढ़ावा देने के क्रम में ऑनलाइन एजुकेशन के 30 विद्यार्थियों और शोध के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले 248 शोधार्थियों को पीएचडी (Ph.D.) की उपाधि से सम्मानित किया जाएगा।इसमें 54.38 प्रतिशत लड़कियां हैं और 45.62 प्रतिशत लड़के हैं
कुलपति ने कही ये बात
कुलपति “लखनऊ विश्वविद्यालय अपने विद्यार्थियों को वैश्विक स्तर की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और निष्पक्ष वातावरण प्रदान करने के लिए निरंतर प्रयासरत है। एसओपी के लागू होने से शैक्षणिक भ्रमण अधिक सुरक्षित, शोध-उन्मुख और अनुशासित होंगे। वहीं, मेडल निर्धारण के नए मानकों से विश्वविद्यालय के सर्वोच्च सम्मानों की प्रतिष्ठा और प्रामाणिकता अक्षुण्ण रहेगी।”