UP Politics: बसपा प्रमुख मायावती ने किया ये बड़ा ऐलान, क्षेत्रीय दलों को लेकर किया ये फैसला

October 11, 2024 by No Comments

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Mayawati: शुक्रवार को बहुजन समाज पार्टी (बसपा) सुप्रीमो मायावती ने गठबंधन को लेकर बड़ा फैसला किया है और इसको लेकर सोशल मीडिया एक्स पर ऐलान भी कर दिया है. इसी के साथ ही अपने कार्यकर्ताओं को भी नसीहत दी है. उन्होंने अपनी पोस्ट के जरिए ये संकेत दिया है कि उनकी पार्टी अब भविष्य किसी दल के साथ गठबंधन नहीं करेंगी. यह फैसला उन्होंने हरियाणा विधानसभा चुनाव परिणाम को देखते हुए लिया है.

गौरतलब है कि हरियाणा विधानसभा चुनाव में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने इंडियन नेशनल लोकदल (आईएनएलडी) के साथ गठबंधन कर चुनाव लड़ा था और यहां पर बसपा अपना खाता तक नहीं खोल पाई थी. जबकि इंडियन नेशनल लोकदल ने दो सीटों पर जीत हासिल की और बसपा को कुल 1.82 फीसदी वोट ही मिला. तो वहीं यहां पर भाजपा ने 48 सीटें हासिल करते हुए सरकार बनाई है और कांग्रेस को 37 सीटें हासिल हुई हैं.

बीएसपी का वोट ट्रांसफर हो गया गठबंधन को

उन्होंने एक्स पर पोस्ट शेयर करते हुए कहा कि, यूपी सहित दूसरे राज्यों के चुनाव में भी बीएसपी का वोट गठबंधन की पार्टी को ट्रांसफर हो जाने किन्तु उनका वोट बीएसपी को ट्रांसफर कराने की क्षमता उनमें नहीं होने के कारण अपेक्षित चुनाव परिणाम नहीं मिलने से पार्टी कैडर को निराशा व उससे होने वाले मूवमेन्ट की हानि को बचाना जरूरी।

एक अन्य पोस्ट में उन्होंने कहा कि, इसी संदर्भ में हरियाणा विधानसभा के चुनाव परिणाम व इससे पहले पंजाब चुनाव के कड़वे अनुभव के मद्देनजर आज हरियाणा व पंजाब की समीक्षा बैठक में क्षेत्रीय पार्टियों से भी अब आगे गठबंधन नहीं करने का निर्णय, जबकि भाजपा/एनडीए व कांग्रेस/इण्डिया गठबंधन से दूरी पहले की तरह ही जारी रहेगी।

कमजोर करने की हो रही है कोशिश

मायावती ने अपने एक अन्य पोस्ट में कहा है कि देश की एकमात्र प्रतिष्ठित अम्बेडकरवादी पार्टी बीएसपी व उसके आत्म-सम्मान व स्वाभिमान मूवमेन्ट के कारवाँ को हर प्रकार से कमजोर करने की चौतरफा जातिवादी कोशिशें लगातार जारी हैं, जिस क्रम में अपना उद्धार स्वंय करने योग्य व शासक वर्ग बनने की प्रक्रिया पहले की तरह ही जारी रखनी जरूरी। इसी के साथ ही बसपा सुप्रीमो ने ये भी कहा कि बीएसपी विभिन्न पार्टियों/संगठनों व उनके स्वार्थी नेताओं को जोड़ने के लिए नहीं, बल्कि ’बहुजन समाज’ के विभिन्न अंगों को आपसी भाईचारा व सहयोग के बल पर संगठित होकर राजनीतिक शक्ति बनाने व उनको शासक वर्ग बनाने का आन्दोलन है, जिसे अब इधर-उधर में ध्यान भटकाना अति-हानिकारक।