पैगम्बर मोहम्मद टिप्पणी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने नूपुर शर्मा के लिए कहा, “देश में जो हो रहा है उसके लिए यह महिला अकेले जिम्मेदार है”, “याचिका में आती है अहंकार की बू”, हाईकोर्ट जाओ, ओवैसी ने कहा प्रधानमंत्री समझें, केवल सस्पेंड कर देना ही सजा नहीं, आप केवल नूपुर शर्मा के प्रधानमंत्री नहीं, देखें कोर्ट ने चैनल के लिए क्या कहा
पैगम्बर मोहम्मद टिप्पणी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने नुपूर शर्मा को फटकार लगाते हुए कहा है कि जो भी देश में हो रहा है, उसकी अकेले नूपुर शर्मा जिम्मेदार हैं। इसके बाद AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी, हैदराबाद बयान सामने आया है और उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर बड़ी बात कही है।
एएनआई हिंदी को दिए बयान में AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी, हैदराबाद ने कहा कि क्या देश के प्रधानमंत्री अभी भी कोई प्रतिक्रिया नहीं देंगे? प्रधानमंत्री को समझना चाहिए कि किसी को सस्पेंड कर देना कोई सजा नहीं होती। आप सिर्फ नुपूर शर्मा के प्रधानमंत्री नहीं हैं। आप देश की 133 करोड़ की जनता के प्रधानमंत्री हैं जिसमें 20 करोड़ के करीब मुसलमान भी रहते हैं। आप (PM) कब तक नुपूर शर्मा को बचाएंगे?
बता दें कि शुक्रवार की सुबह ही सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने पैगंबर मोहम्मद पर कथित टिप्पणी के मामले में नूपुर शर्मा (Nupur Sharma) ने कई राज्यों में उनके खिलाफ दर्ज दर्जनों एफआईआर (FIR) की जांच के लिए दिल्ली ट्रांसफर करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए नूपुर शर्मा को फटकार लगाई है। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जेबी पारदीवाला की अवकाश पीठ ने राष्ट्रीय टेलीविजन पर एक विशेष धार्मिक समुदाय के संस्थापक के खिलाफ ”अपमान करने वाले” बयान देने के लिए भाजपा की पूर्व प्रवक्ता नूपुर शर्मा की आलोचना की है।
ये महिला अकेली जिम्मेदार है
लाइव लॉ हिंदी वेबसाइट की रिपोर्ट के मुताबिक कोर्ट ने यह भी नोट किया कि उसने केवल “सशर्त माफी” मांगी, वह भी अपनी टिप्पणी के खिलाफ सार्वजनिक हंगामे के बाद। कोर्ट ने ये भी कहा कि नूपुर शर्मा ने देश भर में भावनाओं को प्रज्वलित किया है। देश में जो हो रहा है उसके लिए यह महिला अकेले जिम्मेदार है। जैसे शर्मा की ओर से पेश एडवोकेट मनिंदर सिंह ने उनके द्वारा जारी लिखित माफी की ओर इशारा किया, अदालत ने कहा कि उसे टीवी चैनल में जाकर देश से माफ़ी मांगनी चाहिए थी। उसने माफी मांगने में भी देरी की है और वह भी सशर्त रूप से कहती है कि अगर भावनाओं को ठेस पहुंची है।
ये धार्मिक लोग नहीं हैं
इस पूरे मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्ती से कहा कि केवल एक राष्ट्रीय राजनीतिक दल की प्रवक्ता होने से किसी के खिलाफ अपमानजनक बातें करने का लाइसेंस नहीं मिलता है। सुप्रीम कोर्ट ने आगे ये भी कहा कि ये बिल्कुल भी धार्मिक लोग नहीं हैं, ये भड़काऊ बयान देते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने शर्मा पर निचली अदालतों को दरकिनार कर सीधे शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाने पर भी आपत्ति जताई। कोर्ट ने कहा कि याचिका में उसके अहंकार की बू आती है कि देश के मजिस्ट्रेट उसके लिए बहुत छोटे हैं।
चैनल के पास इस मुद्दे पर नहीं था चर्चा करने का अधिकार
बता दें कि 27 मई को टाइम्स नाउ में ज्ञानवापी मस्जिद मुद्दे पर चैनल डिबेट के दौरान शर्मा ने पैगंबर मुहम्मद के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी की थी। आज, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चैनल के पास इस मामले पर चर्चा करने का कोई अधिकार नहीं है, जब मामला कोर्ट में विचाराधीन है। आगे कहा कि अगर शर्मा बहस के कथित दुरुपयोग से व्यथित हैं, तो उन्हें एंकर के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करानी चाहिए थी।
सिंह ने तर्क दिया कि बयान उकसाने की स्थिति में दिए गए थे। उन्होंने आगे कहा कि इस मुद्दे पर एक ही समुदाय के भीतर गंभीर बहस चल रही है और शर्मा की टिप्पणी इससे हटकर नहीं है। इसी के साथ कोर्ट ने नूपुर शर्मा की उस याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया, जिसमें उन्होंने मांग की थी कि देश भर के तमाम राज्यों में उनके खिलाफ दर्ज मामलों को दिल्ली ट्रांसफर कर दिया जाए। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने शर्मा को हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने की सलाह दी है। कोर्ट ने कहा कि अदालत की अंतरात्मा संतुष्ट नहीं है। आप अन्य उपायों का लाभ उठाएं। तद्नुसार, याचिका को वापस लेने की स्वतंत्रता प्रदान की गई।