Sanatan Life Style: जानें क्या है तिलक का महत्त्व, न लगाएं केमिकल युक्त बिंदियां, प्लास्टिक की बिंदी का करें त्याग, ये वाला तिलक है हितकारी

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Sanatan Life Style: ये तो सभी जानते हैं कि सनातन धर्म में तिलक (Tilak) का कितना महत्व है. बिना तिलक लगाए कोई भी पूजा-पाठ सम्पूर्ण नहीं माना जाता है. इस सम्बंध में आचार्य विनोद कुमार मिश्र बताते हैं कि ललाट पर दोनों भौंहों के बीच विचारशक्ति का केन्द्र है।

योगी इसे आज्ञाचक्र कहते हैं। इसे शिवनेत्र अर्थात् कल्याणकारी विचारों का केन्द्र कहा जाता है। दोनों भौहों के बीच ललाट पर चंदन या सिंदूर आदि का तिलक आज्ञाचक्र और उसके नजदीक की पीनियल और पीयूष ग्रंथियों को पोषण देता है। यह बुद्धिबल व सत्त्वबलवर्धक है तथा विचारशक्ति को भी विकसित करता है। अतः तिलक लगाना आध्यात्मिक तथा वैज्ञानिक, दोनों दृष्टिकोणों से बहुत लाभदायक है.

आचार्य बताते हैं कि, चंदन, सिंदूर के तिलक लाभकारक है, वह आजकल क केमिकल युक्त बिंदिय न लगाएं। ललाट पर प्लास्टिक की बिंदी लगाना हानिकारक है, इसका त्याग करें। तुलसी या पीपल की जड़ की मिट्टी अथवा गाय के खुर की मिट्टी पुण्यदायी, कार्यसाफल्यदायी व सात्त्विक होती है।उसका या हल्दी या चंदन का अथवा हल्दी-चंदन के मिश्रण का तिलक हितकारी है। भाइयों को भी तिलक करना चाहिए । इससे आज्ञाचक्र (यहीं पर पीनियल ग्रंथि होती हैं) का विकास होता है और निर्णय लेनें की शक्ति बढ़ती है।

DISCLAIMER:यह लेख धार्मिक मान्यताओं व धर्म शास्त्रों पर आधारित है। हम अंधविश्वास को बढ़ावा नहीं देते। पाठक धर्म से जुड़े किसी भी कार्य को करने से पहले अपने पुरोहित या आचार्य से अवश्य परामर्श ले लें। किसी भी प्रकार की भ्रम की स्थिति में प्रमाणिक ज्योतिषियों से ही परामर्श लें। KhabarSting इसकी पुष्टि नहीं करता।) (फोटो सोशल मीडिया)