Sawan-2022: कलयुग में सर्वोपरि है पार्थिव शिवलिंग का रुद्राभिषेक, सत्ता से लेकर विद्या, संतान और भूमि सब होता है हासिल, जानें क्या कहते हैं शिव पुराण, अग्निपुराण और स्कंदपुराण,देखें वीडियो

August 3, 2022 by No Comments

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सावन (श्रावण) मास को लेकर पुराणों में वर्णित किया गया है कि अगर सावन के महीने में पूरे मन, श्रद्धा, भक्ति और बिना किसी लालच के एक बार भी पार्थिव शिवलिंग की पूजा कर लेते हैं तो प्रजा अर्थात सत्ता, शासन व सरकार के साथ ही भूमि, विद्या, संतान आदि की भी प्राप्ति होती है। इसके बारे में अलग-अलग पुराणों में अलग-अलग वर्णन किया गया है।

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आचार्य विनोद कुमार मिश्र बताते हैं कि जो पार्थिव शिवलिंग का निर्माण कर एक बार भी उसकी पूजा कर लेता है। वह दस हजार कल्प तक स्वर्ग में निवास करता है। शिवलिंग के अर्चन से मनुष्य को प्रजा, भूमि, विद्या, पुत्र, बान्धव, श्रेष्ठता, ज्ञान एवं मुक्ति सब कुछ प्राप्त हो जाता है। जो मनुष्य ‘शिव’ शब्द का उच्चारण कर शरीर छोड़ता है वह करोड़ों जन्मों के संचित पापों से छूटकर मुक्ति को प्राप्त हो जाता है। कलियुग में पार्थिव शिवलिंग पूजा ही सर्वोपरि है। पार्थिव शिवलिंग का पूजन सदा सम्पूर्ण मनोरथों को देने वाला हैं तथा दुःख का तत्काल निवारण करने वाला है। सभी पुराणों में अलग-अलग मंत्रों का उल्लेख कर बताया गया कि पार्थिव शिवलिंग की पूजा से क्या लाभ प्राप्त होता है और किन कष्टों से मुक्ति मिल सकती है।

शिव पुराण
कृते रत्नमयं लिंगं त्रेतायां हेमसंभवम्
द्वापरे पारदं श्रेष्ठं पार्थिवं तु कलौ युगे (शिवपुराण)
बता दें कि शिवपुराण के अनुसार पार्थिवप्रतिमापूजाविधानं ब्रूहि सत्तम॥ येन पूजाविधानेन सर्वाभिष्टमवाप्यते॥ मंत्र का जाप फलदायी माना गया है। व्यक्ति के तमाम दुख व कष्ट कम होते हैं।

अग्निपुराण
त्रिसन्ध्यं योर्च्चयेल्लिङ्गं कृत्वा विल्वेन पार्थिवम्।
शतैकादशिकं यावत् कुलमुद्‌धृत्य नाकभाक्।।327.15।। अग्निपुराण
जो मनुष्य प्रतिदिन तीनों समय पार्थिव लिङ्ग का निर्माण करके बिल्वपत्रों से उसका पूजन करता है, वह अपनी एक सौ ग्यारह पीढ़ियों का उद्धार करके स्वर्गलोक को प्राप्त होता है।

स्कंदपुराण
प्रणम्य च ततो भक्त्या स्नापयेन्मूलमंत्रतः॥
ॐहूं विश्वमूर्तये शिवाय नम॥
इति द्वादशाक्षरो मूलमंत्रः॥41.102॥
“ॐ हूं विश्वमूर्तये शिवाय नमः” यह द्वादशाक्षर मूल मंत्र है। इससे शिवलिंग को स्नान कराना चाहिए।

श्रावण में रुद्राभिषेक का महत्व
रुद्राभिषेकं कुर्वाणस्तत्रत्या क्षरसङ्ख्यया, प्रत्यक्षरं कोटिवर्षं रुद्रलोके महीयते। पञ्चामृतस्याभिषेकादमृत्वम् समश्नुते।।
श्रावण में रुद्राभिषेक करने वाला मनुष्य उसके पाठ की अक्षर-संख्या से एक-एक अक्षर के लिए करोड़-करोड़ वर्षों तक रुद्रलोक में प्रतिष्ठा प्राप्त करता है। पंचामृत का अभिषेक करने से मनुष्य अमरत्व प्राप्त करता है। श्रावण मास में भूमि पर शयन करना चाहिए। इसके बारे में स्कन्दपुराण में कहा गया है कि
“केवलं भूमिशायी तु कैलासे वा समाप्नुयात” अर्थात श्रावण मास में भूमि पर शयन करने से मनुष्य कैलाश में निवास प्राप्त करता है।

DISCLAIMER:यह लेख धार्मिक मान्यताओं व धर्म शास्त्रों पर आधारित है। हम अंधविश्वास को बढ़ावा नहीं देते। पाठक धर्म से जुड़े किसी भी कार्य को करने से पहले अपने पुरोहित या आचार्य से अवश्य परामर्श ले लें। KhabarSting इसकी पुष्टि नहीं करता।)

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