Shri Krishna Janmashtami-2022: 19 अगस्त को मनेगी श्रीकृष्ण जन्माष्टमी, पूरे हो रहे हैं श्री कृष्ण जन्म के 5249 वर्ष, भ्रम दूर करने को ज्योतिषाचार्यों ने रखे अपने-अपने मत, कहा 20 करोड़ एकादशियों के समान अकेला है जन्माष्टमी का व्रत, देखें पूरी जानकारी

August 17, 2022 by No Comments

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भाद्रपद कृष्ण अष्टमी को जन्माष्टमी का उत्सव पूरे भारत में मनाया जाता है। श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की त्योहार भारत के प्रमुख त्योहारों में से एक है। इस बार यह व्रत त्योहार 19 अगस्त 2022 को मनाया जाएगा। इसको लेकर कुछ भ्रांतियां थीं कि 18 अगस्त को मनाया जाएगा, लेकिन देश के जाने-माने ज्योतिषाचार्यों ने सनातन धर्म को मानने वालों का भ्रम दूर करते हुए 19 अगस्त को ही जन्माष्टमी का त्योहार मनाने की सलाह दी है। देखें इस सम्बंध में क्या कह रहे हैं ज्योतिषाचार्य-

आचार्य विनोद कुमार मिश्र, निदेशक, भारतीय ज्योतिष अनुसन्धान संस्थान, लखनऊ

भारतीय ज्योतिष अनुसन्धान संस्थान, लखनऊ के निदेशक आचार्य विनोद कुमार मिश्र कहते हैं कि इस बार 19 अगस्त, दिन शुक्रवार को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का त्योहार मनाया जाएगा। भगवान श्रीकृष्ण युधिष्ठिरजी को कहते हैं। “२० करोड़ एकादशी व्रतों के समान अकेला श्रीकृष्ण जन्माष्टमी व्रत हैं।” सनातन धर्म में चार विशेष रात्रियाँ बताई गई हैं। दिवाली की रात्रि, महाशिवरात्रि की रात, होली की रात्रि और कृष्ण जन्माष्टमी की रात्रि। मान्यता है कि इन विशेष रात्रियों का जप, तप , जागरण बहुत बहुत पुण्य प्रदायक है। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की रात्रि को मोहरात्रि कहा जाता है। इस रात में योगेश्वर श्रीकृष्ण का ध्यान,नाम अथवा मन्त्र जपते हुए जागने से संसार की मोह-माया से मुक्ति मिलती है। जन्माष्टमी का व्रत व्रतराज है। इस व्रत का पालन करना चाहिए।

आचार्य पण्डित शक्ति धर त्रिपाठी, शक्ति ज्योतिष केन्द्र लखनऊ
आचार्य पण्डित शक्ति धर त्रिपाठी, शक्ति ज्योतिष केन्द्र लखनऊ, बताते हैं कि इस वर्ष की श्री कृष्ण जन्माष्टमी 19 अगस्त शुक्रवार की अर्द्ध रात्रि को मनायी जाएगी। शुक्रवार को अष्टमी तिथि सूर्योदय के पहले ही आरम्भ हो रही है और रात्रि के 01:06 बजे तक रहेगी। इस वर्ष रोहिणी नक्षत्र एवम् अष्टमी तिथि का योग नहीं हो पा रहा है। अतः शास्त्रीय मान्यता के अनुसार चंद्रोदय व्यापिनी अष्टमी को ही जन्मोत्सव मनाया जाएगा “रात्रौ नास्ति चंद्रोहिणी कला। रात्रि युक्तां प्रकुर्वित विशेषेणु संयुताम् ।।”

फोटो- सोशल मीडिया

अर्थात- इसी दिन योगिरज श्री कृष्ण के जन्म के 5249 वर्ष पूरे हो जाएँगे। मर्त्यु लोक पर उनका जीवन काल कुल 126 वर्षों का था। जिसमें 10 वर्ष 08 महीने के लगभग गोकुल में रहे। उसके बाद का जीवन संघर्षों से ओत प्रोत रहा। आयु के 86 वें वर्ष में श्री कृष्ण ने गीता का उपदेश दिया जो आज भी समीचीन है। इसीलिए वे पूज्य हैं, अनुकरणीय हैं।

ज्योतिषाचार्य-वास्तुविद् कमलकांत कुलकर्णी, पाराशर आवार्ड देहली सदस्य

ज्योतिषाचार्य-वास्तुविद् कमलकांत कुलकर्णी, पाराशर आवार्ड देहली सदस्य ने लोगों का भ्रम दूर करते हुए बताया है कि जन्माष्टमी 19 अगस्त को है, 18 को नहीं। इसलिए 19 अगस्त को ही जन्माष्टमी का त्योहार मनाएं। मुहूर्त ग्रंथ, शास्त्र व रोहिणी नक्षत्र, जिसमें भगवान कृष्ण का जन्म हुआ था,युक्त रात्रि 19 अगस्त को है। व्रत भी उदय कालिक अष्टमी को करना चाहिए। वैष्णव मत भी यही है। भगवान की जन्मस्थली गोकुल, मथुरा, वृंदावन में 19 अगस्त को ही जन्माष्टमी मनाई जाएगी। द्वारिकाधीर के बांके बिहारी मंदिर में भी उत्सव 19 को ही होगा। हमें भी भगवान के जन्म व कर्म स्थल का अनुकरण करना होगा।

जानें किस ग्रह-नक्षत्र में हुआ था कान्हा का जन्म
आचार्य सुशील कृष्ण शास्त्री बताते हैं कि वेद-पुराणों की मानें तो कान्हा का जन्म भाद्रपद कृष्ण अष्टमी को भगवान श्रीकृष्ण का जन्म, मथुरा नगरी में असुरराज कंस के कारागृह में हुआ था। कान्हा कंस की बहन देवकी की आठवी संतान थे। इस तिथि को रोहिणी नक्षत्र का विशेष महात्म्य है। इस दिन को ही कृष्ण जन्मोत्सव के रूप में मनाते हैं। जिस समय कान्हा का जन्म हुआ था, वह दिन बुधवार था और भाद्र पद कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि थी। रोहिणी नक्षत्र में अर्द्धरात्रि को वृष के चंद्रमा में कान्हा ने जन्म लिया था। मान्यता है कि कंस के डर से ही कान्हा के पिता वासुदेव रात में ही कान्हा को गोकुल में छोड़ आए थे। प्रभु की महिमा से कारागार के सभी दरवाजे अपने आप ही खुल ही गए थे और पहरेदार सो गए थे। इसीलिए इस दिन नन्द गांव में भी जमकर उत्सव मनाया जाता है।

DISCLAIMER:यह लेख धार्मिक मान्यताओं व धर्म शास्त्रों पर आधारित है। हम अंधविश्वास को बढ़ावा नहीं देते। पाठक धर्म से जुड़े किसी भी कार्य को करने से पहले अपने पुरोहित या आचार्य से अवश्य परामर्श ले लें। KhabarSting इसकी पुष्टि नहीं करता।)