Janmashtami-2026: श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर दुल्हन की तरह सजा मथुरा-वृंदावन…व्रत के इन नियमों का करें पालन -Video

September 3, 2026 by No Comments

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Janmashtami-2026: भाद्रपद मास यानी भादो मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को भगवान श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मनाई जाती है. इस दिन मध्यरात्रि 12 बजे रोहिणी नक्षत्र में भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था. इस दिन घरों से लेकर मंदिरों और जेल में भी झांकी सजाई जाती है. दरअसल भगवान श्रीकृष्ण का जन्म कारागार में हुआ था, इसलिए देश भर की जेलों में लड्डू गोपाल की पूजा की परम्परा सदियों से चली आ रही है.

तो वहीं कान्हा की नगरी मथुरा वृंदावन भी दुल्हन की तरह सजधज कर तैयार हो गया है. इस दिन अधिकांश लोग व्रत नियम भी करते हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जन्माष्टमी का व्रत सामान्य उपवास से अलग होता है क्योंकि सिर्फ भोजन का ही नहीं बल्कि इस दिन बुराई का भी त्याग करना चाहिए. मन, वचन और आचरण में संयम रखना चाहिए.

साल 2026 में जन्माष्टमी का व्रत 4 सितंबर को रखा जा रहा है. इस दिन व्रती को सुबह स्नान करके व्रत का संकल्प लें. रात में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के समय पूजा-अर्चना कर प्रसाद ग्रहण करें.

जन्माष्टमी व्रत का पालन करें ये नियम

व्रत रखने वाले व्यक्ति को जन्माष्टमी से एक दिन पहले सात्विक भोजन करना चाहिए.
खान-पान में संयम बरतें.
व्रत के दौरान मन को शांत रखें और दिन भर लड्डू गोपाल के नाम का जप करें.
श्रीमद्भागवत कथा का पाठ करें.
भगवान श्रीकृष्ण या लड्डू गोपाल के सामने बैठकर हाथ में तुलसी दल रखकर व्रत का संकल्प करें.
पूजा के बाद क्षमायाचना जरूर करें.
अगर सामर्थ्य हो तो निराहार व्रत करें या फलाहारी व्रत भी कर सकते हैं.
इस दिन ब्रह्मचर्य का पालन करें.
भगवान श्रीकृष्ण की पूजा में तुलसी दल जरूर रखें और कान्हा को भी तुलसी दल अर्पित करें.
जन्माष्टमी की पूजा में हो सके तो पीले रंग के वस्त्र धारण करें.

जन्माष्टमी व्रत पारण

आचार्य सुशील कृष्ण शास्त्री बताते हैं कि वैसे तो कान्हा के जन्म यानी रात 12 बजे के बाद लोग व्रत का पारण कर लेते हैं लेकिन अगले दिन सूर्योदय के बाद पारण करना अति उत्तम रहता है. इसलिए व्रत का पारण 5 सितंबर को सुबह 6:01 बजे के बाद करें तो अति उत्तम रहेगा.

DISCLAIMER: यह लेख धार्मिक मान्यताओं व धर्म शास्त्रों पर आधारित है। हम अंधविश्वास को बढ़ावा नहीं देते। पाठक धर्म से जुड़े किसी भी कार्य को करने से पहले अपने पुरोहित या आचार्य से अवश्य परामर्श ले लें। KhabarSting इसकी पुष्टि नहीं करता।)

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