नेपाल के बाद इस देश ने… YouTube, X, Instagram और Whatsapp पर लगाया बैन; वजह जान उड़ जाएंगे होश
Social Media Apps Ban in Turkey: करीब 26 सोशल मीडिया प्लेटफार्म को बैन करने के बाद नेपाल के जो हाल हैं वो पूरी दुनिया देख रही है. युवा लगातार आगजनी, तोड़फोड़ जैसे प्रदर्शन कर रहे हैं और प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को इस्तीफा तक देना पड़ा है तो वहीं अब नेपाल में सेना ने पूरी कमान सम्भाल ली है. इसी बीच तुर्किए सरकार ने भी कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर रोक लगा दी है. हालांकि ये रोक अस्थाई है.
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यूट्यूब, एक्स (पहले ट्विटर), इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप पर यहां रोक लगाई गई है. यह रोक इस्तांबुल में पुलिस और विपक्षी समर्थकों के बीच झड़प होने के बाद लगाई गई है. इस दौरान देश भर में इंटरनेट की स्पीड 12 घंटे तक धीमी रही. बता दें कि यहां पर विरोध प्रदर्शन उस समय भड़का जब सरकार द्वारा नियुक्त एक ट्रस्टी ने रिपब्लिकन पीपल्स पार्टी (CHP) के मुख्यालय पर नियंत्रण करने की कोशिश की.
इसके बाद प्रदर्शन शुरू हुआ तो वहीं सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए पेपर स्प्रे का इस्तेमाल किया. इसी के बाद यह प्रतिबंध लागू हुआ. बहुत से यूजर्स वीपीएन का सहारा लेकर बैन से बचने की कोशिश करते दिखे.
Euronews की रिपोर्ट के मुताबिक, CHP के इस्तांबुल मुख्यालय को कई दिनों से पार्टी समर्थकों ने घेर कर रखा हुआ था. उनका उद्देश्य ट्रस्टी गुरसेल टेकिन के ऑफिस का नियंत्रण संभालने से रोकना. टेकिन को सरकार ने ओज़गुर सेलिक की जगह नियुक्त किया था जिन्हें सितंबर 2023 में चुना गया था.
तुर्किए की सूचना और संचार प्रौद्योगिकी प्राधिकरण (BTK) वेबसाइट या ऐप ब्लॉक होने पर आमतौर पर बयान जारी करती है लेकिन इस बार ऐसा कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है. अगर BTK की वेबसाइट को देखें तो इस पर भी किसी प्रतिबंध का जिक्र नहीं मिला है लेकिन सोमवार शाम 5 बजे तक इस्तांबुल में यूट्यूब, एक्स, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप काम करना बंद कर चुके थे. हालांकि कुछ अन्य प्रांतों में स्थानीय निवासियों ने सोशल मीडिया के जरिए सेवाओं के चलने की जानकारी दी. रिपोर्ट के मुताबिक, फिलहाल दोनों पक्षों के बीच बातचीत जारी है लेकिन पूरे देश में इंटरनेट काम नहीं कर रहा है.
पार्टी में पड़ सकती है फूट
सरकार विपक्षी दल CHP को मार्च से ही निशाने पर ले रही है. इस्तांबुल के मेयर और राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार एकरेम इमामोग्लू को गिरफ्तार कर जेल भेजे जाने के बाद से ही कई अन्य नेताओं को भी हिरासत में लिया गया. इसी बीच स्थानीय आलोचकों ने आरोप लगाया है कि सरकार फिर से पूर्व अध्यक्ष केमल किलिचदारोग्लू को पार्टी की कमान सौंपने की इच्छुक है लेकिन मौजूदा प्रमुख ओज़गुर ओज़ल 2023 के अंत में चुने गए थे.
फिलहाल माना जा रहा है कि सितंबर के मध्य में जो सुनवाई होने जा रही है इससे तय होगा कि किलिचदारोग्लू की वापसी होगी या नहीं. फिलहाल यहां के राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसा हुआ तो पार्टी में और अधिक फूट पड़ सकती है. विशेषज्ञों का कहना है कि भले ही वह वापसी कर लें लेकिन दिलचस्प बात ये है कि 21 सितंबर को होने वाली असाधारण कांग्रेस में ओज़ल अभी भी मजबूत दावेदार के तौर पर स्थापित हैं.
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