Supreme Court: रेप के मामलों में होने वाले टू-फिंगर टेस्ट पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक, देखें क्या दी चेतावनी

October 31, 2022 by No Comments

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नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने रेप के मामलों में होने वाले टू-फिंगर टेस्ट (Two Finger test) के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है। इसी के साथ चेतावनी दी कि इस तरह के टेस्ट करने वाले व्यक्तियों को कदाचार का दोषी ठहराया जाएगा।

कोर्ट ने कहा टेस्ट का नहीं है कोई वैज्ञानिक आधार
कानून समाचारों की वेबसाइट लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ और जस्टिस हेमा कोहली की पीठ ने बलात्कार के एक मामले में दोषसिद्धि बहाल करते हुए दुख व्यक्त किया और कहा कि यह बेहद खेदजनक है कि टू-फिंगर टेस्ट आज भी जारी है। पीठ ने फैसला सुनाते हुए कहा कि “इस अदालत ने बार-बार बलात्कार और यौन उत्पीड़न के आरोपों के मामलों में टू फिंगर टेस्ट के उपयोग को रोक दिया है। तथाकथित टेस्ट का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है। इसके बजाय यह महिलाओं को फिर से पीड़ित और पुन: पीड़ित करता रहता है। टू फिंगर टेस्ट नहीं किया जाना चाहिए। यह टेस्ट एक गलत धारणा पर आधारित है कि एक सैक्चुली एक्टिव महिला का बलात्कार नहीं किया जा सकता है। सच्चाई से आगे कुछ भी नहीं हो सकता है।”

जानें आगे क्या कहा पीठ ने
रिपोर्ट के मुताबिक पीठ ने आगे कहा कि “एक महिला की गवाही का संभावित मूल्य उसके यौन इतिहास पर निर्भर नहीं करता है। यह सुझाव देना पितृसत्तात्मक और सेक्सिस्ट है कि एक महिला पर विश्वास नहीं किया जा सकता है जब वह कहती है कि उसके साथ केवल इसलिए बलात्कार किया गया क्योंकि वह सैक्चुली एक्टिव है।” पीठ ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि यौन उत्पीड़न और बलात्कार के सर्वाइवर का टू फिंगर टेस्ट नहीं होना चाहिए।

जानें क्या होता है टू फिंगर टेस्ट
लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक टू फिंगर टेस्‍ट में पीड़‍िता के प्राइवेट पार्ट में एक या दो उंगली डालकर उसकी वर्जिनिटी को टेस्‍ट किया जाता है। इस टेस्‍ट का उद्देश्य ये पता लगाना होता है कि महिला के साथ शारीरिक संबंध बने थे कि नहीं। प्राइवेट पार्ट में अगर आसानी से दोनों उंगलियां चली जाती हैं तो माना जाता है कि महिला सेक्‍चुली एक्टिव है। (फोटो सोशल मीडिया)