इसकी वजह से ही उनका मन इस कदर टूट गया कि उन्होंने गांव ही छोड़ दिया.
आश्रम में हरि नाम संकीर्तन गूंज रहा था और भक्त राधा रानी का नाम जप कर रहे थे.
वह प्रतिदिन वृंदावन में अपने निवास स्थान से तड़के 2 बजे पदयात्रा करते हुए नंगे पांव श्री हित राधा केली कुंज जाते हैं.
प्रेमानंद महाराज से ये उनकी तीसरी मुलाकात थी. इससे पहले वह चार जनवरी 2023 को संत प्रेमानंद से पहली बार मिले थे.
वृंदावन में श्री हरिवंश महाप्रभु के हितोत्सव के आयोजन के चलते परिक्रमा मार्ग पर टेंट और ट्रस लगाए गए थे।
छोटे भाई को चाहिए कि वह बड़े भाई को अपने पिता की तरह माने.
महाराज जी राधा रानी के नाम जप करने की बात कहते हैं. इसी के साथ ही वह युवाओं को सही मार्ग बताते हैं.
अस्पताल में भर्ती कराया गया था जिससे उनके स्वास्थ्य में सुधार हुआ था तो संत प्रेमानंद महाराज ने दोबारा पदयात्रा शुरू की थी.