संध्या के समय माताएं कथा सुनती हैं फिर तारों को अर्घ्य देकर अपना व्रत पूर्ण करती हैं।
माताएं अपनी संतान की दीर्घायु के लिए निर्जला व्रत करती हैं और रात में तारों को अर्घ्य देने के बाद व्रत का पारण करती हैं।
गुरु पुष्य नक्षत्र को 27 नक्षत्रों के समूह का राजा कहा जाता है।