Ahoi Ashtami 2025: अहोई अष्टमी आज…इस शुभ मुहूर्त में करें पूजा; जानें कितने बजे निकलेंगे तारे?
Ahoi Ashtami 2025: कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को अहोई अष्टमी के तौर पर मनाया जाता है. इसी दिन से दीवाली का उत्सव शुरू माना जाता है. क्योंकि इसी दिन के बाद से लेकर भाई-दूज तक लगातार त्योहार पड़ते हैं और ये त्योहार दीवाली के उत्सव को और बढ़ा देते हैं. घर-घर में दीवाली का उत्सव इन्हीं त्योहारों के साथ शुरू हो चुका है तो वहीं आज अहोई अष्टमी का व्रत रखकर माताएं शाम को तारे को अर्घ्य देकर व्रत का पारण करेंगी. बता दें कि इस व्रत में चंद्रमा को अर्घ्य न देकर तारों को अर्घ्य दिया जाता है.
सूर्योदय से लेकर शाम तक इस व्रत को किया जाता है. ये व्रत भी निर्जला रखा जाता है और ये व्रत संतानों की दीर्घायु के लिए किया जाता है. अहोई अष्टमी में संध्या के समय माताएं कथा सुनती हैं फिर तारों को अर्घ्य देकर अपना व्रत पूर्ण करती हैं।
बता दें कि कुछ जगहों पर माताएं चंद्रोदय तक ये व्रत रहती हैं और चांद निकलने से पहले ही शाम को अहोई माता की विधि विधान से पूजा कर लेती हैं और फिर चंद्र दर्शन कर व्रत पारण करती हैं। इस साल अहोई अष्टमी पूजा का शुभ मुहूर्त 05:53 PM से 07:08 PM तक रहेगा। इस दौरान व्रती महिलाएं पूजा और कथा कर सकती हैं और फिर तारे निकलने पर अर्घ्य देकर व्रत का पारण करें. आचार्य सुशील कृष्ण शास्त्री ने बताया कि इस बार तारे निकलने का समय शाम 7 बजकर 32 मिनट है. कहीं-कहीं बादलों की वजह से तारा दिखने के समय में बदलाव हो सकता है.
अहोई अष्टमी कथा
अहोई अष्टमी को लेकर कथा प्रचलित है कि एक समय एक साहूकार था. उसके सात बेटे और एक बेटी थी. उसके सभी बेटों का विवाह हो चुका था लेकिन बेटी का विवाह अभी नहीं हुआ था. दीवाली का दिन आया तो सातों बहुएं अपनी ननद यानी साहूकार की बेटी के साथ जंगल में मिट्टी लेने के लिए गईं. जहां पर सभी मिट्टी खोद रही थीं वहीं पर एक स्याहू (सेई) की मांद थी. तो मिट्टी खोदते वक्त ननद के हाथ से स्याहू का बच्चा मर गया. इस पर क्रोधित होते हुए स्याहू माता ने ननद को श्राप देते हुए कहा कि मैं तेरी कोख बांधूंगी. इस पर ननद डर गई और अपनी भाभियों से कहा कि तुम में से कोई एक अपनी कोख बंधवा लो. इस पर सभी भाभियनों ने मना कर दिया. इस पर छोटी भाभी ने सोचा कि अगर मैं कोख नहीं बंधवाउंगी तो सास माता गुस्सा हो जाएंगी. इस पर उसने अपनी कोख बंधवा ली. इस वजह से छोटी भाभी को जो भी बच्चा होता वह सात दिन बाद मर जाता.
इस पर उसने एक पंडित को बुलाया और इसका उपाय पूछा तो पंडित ने कहा कि तुम सुरही गाय की पूजा करो. सुरही गाय स्याहू माता की भायली है. वह तेरी कोख जब छोड़ देगी तो तेरा बच्चा जीवित रहेगा. इस उपाय को जानने के बाद छोटी बहू सुबह जल्दी उठकर सुरही गाय के पास सफाई कर आती और उनकी सेवा करती. इस पर एक दिन गाय माता ने सोचा कि मेरी सेवा कौन कर रहा है. आज देखूंगी. इस पर गौ माता ने सुबह देखा की छोटी भाभी उसकी सेवा कर रही है और उसके आस-पास सफाई कर रही है.
यह देखकर गाय माता प्रसन्न हो गई और कहा कि तुम जो चाहो मांग लो. इस पर छोटी भाभी बोली कि स्याहू माता तुम्हारी भायली है और उसने मेरी कोख बांध दी है. इसलिए मेरी कोख खुलवा दो. इस पर गौ माता ने समुद्र में अपनी भायली के पास छोटी बहू को लेकर जाने लगी. तेज धूप होने के कारण मार्ग में दोनों एक पेड़ के नीचे बैठ गई. इसी दौरान एक सांप आया और पेड़ पर एक गरुड़ पक्षी के बच्चे को डसने लगा. इस पर साहूकार की छोटी बहू ने सांप को मारकर ढाल के नीचे दबा दिया और बच्चे को बचा लिया. कुछ ही देर बाद गरुड़ पक्षी आई तो वहां खून देखकर समझा कि छोटी बहू ने उसके बच्चे को मार दिया है. इस पर वह बहू को चोच मारने लगी. इस पर बहू ने कहा कि मैंने तेरे बच्चे को नहीं मारा बल्कि सांप से रक्षा की है जो कि तेरे बच्चे को डसने के लिए आया था. यह सुनकर गरुड़ पक्षी खुश हो गई और कुछ मांगने के लिए कहा. इस पर बहू ने कहा कि सात समुद्र पार स्याहू माता रहती है. हमें उसके पास पहुंचा दो. इस पर पक्षी ने दोनों को अपनी पीठ पर बैठाकर स्याहू माता के पास पहुंचा दिया.
स्याहू माता ने गाय को देखकर कहा कि बहन बहुत दिनों बाद आई. इसी के साथ ही स्याहू माता ने कहा कि मेरे सिर में जुएं पड़ गए हैं. इस पर गाय माता ने साहूकार की बहू से सलाई से जुएं निकालने को कहा. इस पर बहू ने जुएं निकाल दिए. इस पर स्याहू माता प्रसन्न हो गई और आशीर्वाद देते हुए कहा कि तूने मेरे सिर में बहुत सलाई डाली है. इसलिए तेरे सात बेटे-बहू होंगी.
इस पर बहू उदास होकर बोली कि मेरे तो एक भी बेटा नहीं तो सात कहां से होंगे. इस पर स्याहू माता ने कहा कि वचन दिया है अगर वचन से तोड़ूं तो धोबी के कुण्ड में कंकरी हो जाऊं. फिर बहू ने कहा कि मेरी कोख तो तुम्हारे पास बंद पड़ी है. यह सुनकर स्याहू माता अचरज में पड़ गई और कहा कि तूने मुझे ठग लिया. मैं तेरी कोख खोलती तो नहीं लेकिन अब खोलनी पड़ेगी. फिर स्याहू माता ने कहा कि जा तेरे घर सात बेटे और बहू मिलेंगे. तू जाकर उजमन करना और सात अहोई बनाकर सात कढ़ाई करना.
इसके बाद बहू जब लौटी तो देखा कि उसके सात बेटे और सात बहुएं बैठे हुए हैं. सभी को देखकर वह खुश हो गई और फिर उसने सात अहोई बना और सात उजमन किया. सात कढ़ाई बनाई. तो दूसरी ओर रात में छोटी बहू से बड़ी उसकी जिठानियों ने कहा कि जल्दी-जल्दी नहाकर पूजा कर लो नहीं तो बच्चों की याद करके छोटी रोने लगेगी लेकिन सुबह हो गई पर रोने की आवाज नहीं आई तो जेठानियों ने अपने बच्चों को छोटी बहू के घर पर भेजा और कहा कि देखकर आए वह रोई क्यों नहीं? इस पर बच्चे जब लौटकर जेठानियों के पास आए तो बताया कि चाची के घर पर खूब उजमन हो रहा है और वह कुछ मांड़ रही हैं. यह सुनते ही जेठानियां दोड़कर उसके घर गई और फिर कोख छुड़ाने के बारे में पूछा तो छोटी बहू बोली की ये सब स्याहू माता की कृपा से हुआ है उन्होंने मेरी कोख खोल दी है. हे स्याहू माता जैसे आपने छोटी बहू पर कृपा की वैसे ही सब पर कृपा करना. जय हो अहोई माता की.
DISCLAIMER: यह लेख धार्मिक मान्यताओं व धर्म शास्त्रों पर आधारित है। हम अंधविश्वास को बढ़ावा नहीं देते। किसी भी धार्मिक कार्य को करते वक्त मन को एकाग्र अवश्य रखें। पाठक धर्म से जुड़े किसी भी कार्य को करने से पहले अपने पुरोहित या आचार्य से अवश्य परामर्श ले लें। KhabarSting इसकी पुष्टि नहीं करता।)
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