Guru Pushya Nakshatra 2024: धनतेरस से पहले अहोई अष्टमी पर बना गुरु पुष्य नक्षत्र का महायोग…इस मुहूर्त में करें खरीदारी; जानें क्या करें क्या न करें
Guru Pushya Nakshatra 2024: इस बार धनतेरस 29 अक्टूबर को है लेकिन इससे पहले यानी कल 24 अक्टूबर को गुरु पुष्य नक्षत्र के होने से खरीदारी के लिए विशेष मुहूर्त बन रहा है। मान्यता है कि इस दिन खरीदारी करने से घर में सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है और मां लक्ष्मी की कृपा सदैव बनी रहती है.गुरु पुष्य नक्षत्र को 27 नक्षत्रों के समूह का राजा कहा जाता है। पंचांग के अनुसार 24 अक्टूबर को सुबह 11:38 से 25 अक्टूबर दोपहर 12:35 बजे तक पुष्य नक्षत्र रहेगा।
आचार्य सुशील कृष्ण शास्त्री बताते हैं कि गुरुवार यानी 24 अक्टूबर को गुरु-पुष्य नक्षत्र के साथ सर्वार्थ सिद्धि योग भी बन रहा है. ऐसे में हर प्रकार के कार्य सिद्ध माने गए हैं। मान्यता है कि इस नक्षत्र में सोने-चांदी के आभूषण, चांदी की प्रतिमाएं, ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक, इलेक्ट्रिकल्स, जमीन, मकान, फैक्टरी आदि में निवेश करना शुभकर रहता है. इस दिन भूमि, भवन, व्यावसायिक प्रतिष्ठान की खरीदारी भी विशेष फलदायी होती है.
आचार्य बताते हैं कि गुरु-पुष्य योग में देवी लक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूजा का विशेष महत्व होता है. इस दिन देवी लक्ष्मी को खीर, दूध से बनी मिठाई और भगवान विष्णु को तुलसी दल, पंचामृत, गुड़ आदि का भोग लगाने का विधान है। इसी के लिए ही कनकधारा स्तोत्र का पाठ करें. बता दें कि इस दिन महालक्ष्मी, सर्वार्थसिद्धि, अमृतसिद्धि, पारिजात, बुधादित्य और पर्वत योग भी बनेगा।
जानें इस दिन क्या करें?
इस दिन प्रॉपट्री, नया घर या गृह प्रवेश कर सकते हैं. क्योंकि ये सभी कार्य करना शुभ माने गए हैं.
गुरु पुष्य नक्षत्र में छोटे बच्चों को विद्यारंभ करवाना लाभकारी माना गया है.
नए काम और व्यापार की शुरुआत करने के लिए गुरु पुष्य नक्षत्र का दिन सबसे शुभ माना गया है।
इस दिन आभूषण और पीपल के बर्तन खरीदने का महत्व बहुत अधिक होता है।
पुष्य नक्षत्र पर गुरु, शनि और चंद्रमा का प्रभाव सबसे ज्यादा रहता है। ऐसे में इस दिन सोना-चांदी खरीदना शुभ माना जाता है।
खरीदारी मुहूर्त
सोने-चांदी के आभूषण और वाहन खरीदने का मुहूर्त- सुबह 11.43 से दोपहर 12.28 तक
लाभ चौघड़ियां- दोपहर 12.05 से दोपहर 01.29 तक
शुभ चौघड़ियां- शाम 04.18 से 05. 42 मिनट तक
जानें क्या है गुरु पुष्य योग का महत्व?
तैत्रीय ब्राह्मण में इस नक्षत्र के बारे में बताया गया है कि ‘बृहस्पतिं प्रथमं जायमानः तिष्यं नक्षत्रं अभिसं बभूव। पुष्य नक्षत्र को बहुत ही शुभ माना गया है। जब गुरुवार के दिन पुष्य नक्षत्र का संयोग बने तो इसे गुरु पुष्य नक्षत्र योग माना जाता है. तो वहीं अगर यही नक्षत्र रविवार के दिन पड़ता है तो इसे रवि पुष्य नक्षत्र योग कहा जाता है। मुहूर्त ज्योतिष के यह श्रेष्ठतम मुहूर्तों में से एक है। नारदपुराण के अनुसार इस नक्षत्र में जन्मा जातक महान कर्म करने वाला, बलवान, कृपालु, धार्मिक, धनी, विविध कलाओं का ज्ञाता, दयालु और सत्यवादी होता है। आरंभ काल से ही इस नक्षत्र में किये गये सभी कर्म शुभफलदाई कहे गये हैं. आचार्य बताते हैं कि देवगुरु बृहस्पति भी इसी नक्षत्र में पैदा हुए थे। गुरुपुष्य योग में धर्म, कर्म, मंत्र जाप, अनुष्ठान, मंत्र दीक्षा अनुबंध, व्यापार आदि आरंभ करने के लिए अतिशुभ माना गया है। गुरु पुष्य नक्षत्र योग में खरीदारी करने से जीवन में सुख और समृद्धि में बढ़ोतरी होती है। दिवाली से पहले इस शुभ योग में सोना-चांदी, आभूषण, बर्तन, कपड़े, कार, चार पहिया वाहन, इलेक्ट्रॉनिक सामान और प्रॉपर्टी के सौदे करना शुभ माना जाता है. वैदिक ज्योतिष शास्त्र बताते हैं कि सभी 27 नक्षत्रों में आठवां नक्षत्र पुष्य होता है। इस नक्षत्र को सभी नक्षत्रों का राजा माना जाता है। इसे शास्त्रों में अमरेज्य भी कहा गया है. यह नक्षत्र जीवन में स्थिरता, समृद्धि और अमरता लाता है और इस नक्षत्र में जो भी शुभ काम किए जाते हैं वह शुभ और स्थायी माना जाता है।
कल ही है अहोई अष्टमी व्रत
कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को अहोई अष्टमी के तौर पर मनाते हैं. इस दिन से ही दीपावली का आगाज मान लिया जाता है. माना जाता है कि अहोई अष्टमी से दीपावली का त्योहार शुरू होता है और भइया दूज के साथ ये त्योहार सम्पन्न होता है. इस बीच रमा- तुलसी एकादसी, धनतेरस, छोटी दीपावली, बड़ी दीवाली, गोवर्धन पूजा का त्योहार मनाया जाता है. अहोई अष्टमी का व्रत संतान की दीर्घायु और सफलता के लिए किया जाता है. इस व्रत का पारण तारों को अर्घ्य देने के बाद किया जाता है। इससे संतान को जीवन में सफलता प्राप्त होती है। इस बार अष्टमी तिथि का प्रारंभ 23/24 अक्तूबर को रात 1:18 बजे होगा और 25 अक्तूबर को रात 1:58 बजे इसका समापन होगा. इस तरह से अहोई अष्टमी का व्रत 24 अक्टूबर को मनाया जाएगा।
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