Bhai Dooj-2025: यमराज की कृपा पाने के लिए भैया दूज पर करें ये काम…पढ़ें यमुना की कथा

October 22, 2025 by No Comments

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Bhai Dooj-2025: हर साल कार्तिक शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को भैया दूज (भाई दूज) का त्योहार सनातन धर्म में मनाया जाता है. इस दिन को यम द्वितीया भी कहते हैं। इस बार भाई दूज का त्योहार 23 अक्टूबर यानी कल मनाया जा रहा है. इस पर्व का प्रमुख लक्ष्य भाई-बहन के पावन सम्बंध तथा प्रेम भाव की स्थापना करना है।

मालूम हो कि सनातन धर्म अर्थात हिंदू समाज में भाई-बहन के प्रेम के प्रतीक दो त्योहार मनाए जाते है। एक रक्षाबंधन और दूसरा भाई दूज। इसमें बहन भाई की लम्बी आयु की प्रार्थना करती है। इस दिन बहनें बेरी की पूजा की पूजा करती हैं और भाइयों के स्वस्थ्य तथा दीर्घायु होने की मंगलकामना करते हुए उन्हें तिलक लगाती हैं। भाई दूज को लेकर एक कथा प्रचलित है जिसमें कहा गया है कि अगर इस दिन भाई अपनी बहन के घर पर जाकर या फिर बहन के हाथों से भोजन करता है तो उस पर यमराज की कृपा बनी रहती है.

भाईयों को खिलाएं चावल

आचार्य सुशील कृष्ण शास्त्री बताते हैं कि इस दिन भाईयों को बहनों के घर पर भोजन जरूर करना चाहिए। इस दिन बहनों को चाहिए कि भाईयों को चावल जरूर खिलाएं। बहन चचेरी, ममेरी अथवा धर्म की, कोई भी हो सकती है। भाई भोजन करने के बाद बहनों को उपहार देते हैं। बता दें कि इसी दिन सूर्य तनया यमुना जी ने अपने भाई यमराज करो भी भोजन कराया था। इसीलिए इसे यम द्वितीया भी कहते हैं। इसीलिए इस दिन यमुना जी का विशेष पूजन भी किया जाता है। अगर किसी भाई की बहन न हों तो वो गाय, नदी आदि स्त्रीत्व पदार्थ का ध्यान करके अथवा उसके समीप बैठकर भोजन करनी भी शुभ माना गया है।

कथा

प्रचलित कथा के अनुसार सूर्य नारायण की पत्नी का नाम छाया था. उन्होंने ही यमराज तथा यमुना को जन्म दिया था. कथा के अनुसार यमुना यमराज को बहुत प्रेम और स्नेह करती थीं. वह यमराज से बार-बार निवेदन करती हैं कि वह अपने इष्ट मित्रों के साथ उनके घर पर आकर भोजन करें लेकिन यमराज अपने कार्य में व्यस्त रहने के कारण यमुना के निवेदन को टालते रहे.

इसी तरह दिन बीतते गए लेकिन एक बार कार्तिक शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि का दिन आया तो यमुना ने फिर से यमराज को अपने घर पर भोजन करने के लिए बुलाया. इस पर यमराज के मन में विचार आया कि वह तो प्राणों को हरने वाले हैं. भला उनको अपने घर पर कौन बुलाएगा? लेकिन बहन मुझे बड़ी ही सद्भावना के साथ बुला रही है तो मुझे जाना चाहिए. ऐसा सोचकर यमराज यमुना के घर पहुंचे लेकिन इससे पहले उन्होंने नरक में निवास कर रहे जीवों को मुक्त कर दिया.

तो दूसरी ओर यमराज को अपने घर में देखकर यमुना की खुशी का ठिकाना नहीं रहा. यमुना ने यमराज को स्नान कराकर पूजन किया और फिर भोजन खिलाया. इस पर यमराज प्रसन्न हो गए और बहन को वर मांगने के लिए कहा. इस पर यमुना ने कहा कि भद्र आप प्रतिवर्ष इसी तरह मेरे घर आकर भोजन करना और मेरी तरह जो बहन अपने भाई का आदर-सत्कार करके टीका करें तो उनको तुम्हारा भय न हो. इस पर यमराज ने तथास्तु कहा और यमुना को अमूल्य वस्त्र-आभूषण दिए और यमलोक चले गए.

माना जाता है कि तभी से यह परम्परा चल रही है और इस दिन को भाई दूज के रूप में मनाया जाता है और भाई परम्परागत तरीके से यमुना में स्नान करके अपनी बहन के घर पर जाते हैं और उनका आतिथ्य स्वीकार करते हैं तो वहीं बहनें टीका करती हैं. ऐसा करने से यम का भय नहीं रहता. आचार्य सुशील कृष्ण शास्त्री कहते हैं कि इस दिन यमराज तथा यमुना की पूजा भी करनी चाहिए.

DISCLAIMER: यह लेख धार्मिक मान्यताओं व धर्म शास्त्रों पर आधारित है। हम अंधविश्वास को बढ़ावा नहीं देते। किसी भी धार्मिक कार्य को करते वक्त मन को एकाग्र अवश्य रखें। पाठक धर्म से जुड़े किसी भी कार्य को करने से पहले अपने पुरोहित या आचार्य से अवश्य परामर्श ले लें। KhabarSting इसकी पुष्टि नहीं करता।)

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