Sharad Purnima 2025: शरद पूर्णिमा पर बना अद्भुत संयोग…आज रात इस समय दें चंद्रमा को अर्घ्य; पढ़ें पूजा विधि
Sharad Purnima 2025: आश्विन मास की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा (Sharad Purnima 2025) कहते है. इस बार यह पूर्णिमा आज यानी 6 अक्तूबर को मनाई जा रही है. इसे रास पूर्णिमा और कोजागरी पूर्णिमा भी कहते हैं. धर्मशास्त्रों के मुताबिक इस दिन कोजागार व्रत रखा जाता है. इस दिन मंदिरों से लेकर घरों में भी परम्परागत रूप से विधि-विधान से लोग अपने आराध्य देव की पूजा-अर्चना करते हैं और कथा सुनते हैं।
यह वह पावन तिथि है जब चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं से परिपूर्ण होते हैं। माना जाता है कि इस रात मां लक्ष्मी पृथ्वी पर आती हैं और भक्तों को धन-धान्य का आशीर्वाद देती हैं। यही वजह है कि इस दिन विधि-विधान से पूजा करने का विधान शास्त्रों में बताया गया है. इस दिन प्रात: स्नान और दान करने का विशेष महत्व है.
चंद्रोदय का समय (Moon Rise Timing)
आज ब्रह्म मुहूर्त 04 बजकर 39 मिनट से 05 बजकर 28 मिनट तक रहा
लाभ-उन्नति मुहूर्त 10 बजकर 41 मिनट से 12 बजकर 09 मिनट तक
अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त 12 बजकर 09 मिनट से 01 बजकर 37 मिनट तक
चंद्रोदय का समय- शाम 05 बजकर 27 मिनट पर।
ये काम करें
मान्यता है कि शरद पूर्णिमा के दिन पवित्र नदियों में स्नान करना चाहिए. अगर नदियों पर न जा सकें तो घर पर ही जल में गंगाजल मिलाकर स्नान करें। इस दिन सफेद वस्तुएं, चावल, दूध, चीनी, या वस्त्र का दान करने से अक्षय फलों की प्राप्ति होती है। इस दिन चंद्रमा को अर्घ्य देना चाहिए और अधिक से अधिक पूजा-पाठ करना चाहिए.
पूजा विधि
शरद पूर्णिमा के दिन पूजा स्थान को साफ कर एक वेदी पर लाल कपड़ा बिछाना चाहिए और फिर भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की मूर्ति स्थापित करें। इसके बाद फल-फूल आदि अर्पित कर घी का दीप जलाएं और मां लक्ष्मी को खीर का भोग अर्पित करें. इसके बाद मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए “ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद” मंत्र का 108 बार जाप करें।
चंद्रमा उदय होने के बाद एक लोटे में दूध, जल, चावल और सफेद फूल मिलाकर चंद्रमा को अर्घ्य दें। इसके बाद कथा सुनें और माता लक्ष्मी की आरती करें. खीर को रात भर खुले आसमान के नीचे रखें और अगले दिन सुबह प्रसाद के रूप में ग्रहण करें।
खीर का धार्मिक महत्व
शरद पूर्णिमा की रात खीर (Rice Pudding) बनाकर चंद्रमा की रोशनी में रखने की परम्परा है. इसको लेकर धार्मिक मान्यता है कि इस दिन चंद्रमा की किरणों में औषधीय गुण होते हैं। जब खीर (Kheer) को पूरी रात खुले आसमान के नीचे रखी जाती है, तो औषधीय गुण किरणों के रूप में खीर में प्रवेश कर जाते हैं. माना जाता है कि जो भी इस खीर को खाता है उसे रोग-दोष से मुक्ति मिलती है। साथ ही मां लक्ष्मी भी प्रसन्न होती हैं और उनकी कृपा सदैव बनी रहती है.
ये बना शुभ संयोग
शरद पूर्णिमा पर पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र सुबह 06:15AM तक है तो वहीं उत्तराभाद्रपद नक्षत्र सुबह 06:15AM से लेकर 7 अक्तूबर की सुबह 04:00 बजे तक है. इसी के साथ ही शुभ काल यानी अभिजित मुहूर्त सुबह 11:46 बजे से रात 12:33 तक रहेगा.
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